भारत में 30 करोड़ बोवाईन है जो विश्व की बोवाईन आबादी का 18 प्रतिशत हैं

    भारत में 30 करोड़ बोवाईन है, जो विश्व की बोवाईन आबादी का 18 प्रतिशत हैं। पारंपरिक तथा वैज्ञानिक ज्ञान के माध्यम से सैकड़ो वषों की मेहनत के बाद देश के देशी बोवाईन आनुवंशिक संसाधन विकसित हुए हैं और आज हमारे पास गोपशुओं की 42 नस्लों के साथ-साथ याक और मिथुन के अलावा भैंसों की 13 नस्लें हैं
    केन्द्र सरकार ने अगले पांच वर्षों में किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने में डेयरी क्षेत्र की अहम भूमिका है। इस काम को पूरा करने के लिए पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन विभाग ने नेशनल एक्शन प्लॉन ऑन डेयरी डेवलपमेंट तैयार किया है
     देशी नस्लों के सरंक्षण एवं संवर्धन के लिए एक नयी योजना राष्ट्रीय गोकुल मिशन की शुरुआत दिसम्बर २०१४ में की गयी। इसी क्रम में देशी नस्लों के उत्पादन एवं उत्पादकता में तेजी से वृद्धि के लिए राष्ट्रीय बोवाइन उत्पादकता मिशन की शुरुआत नवम्बर 2016 मे की गयी। देशी नस्लों में तेजी से वृद्धि के लिए पशुपालन, डेयरी एवं मत्य्य पालन विभाग द्वारा कई महत्व पूर्ण सामूहिक कार्यक्रम राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत किये गये।  
    एसतरस सिनक्रोनाइजेसन (estrus synchronization) जो अक्टूबर 2016 को किया गया, प्रमुख है। देश में पहली बार एसतरस सिनक्रोनाइजेसन के जरिये 124000 पशुओं का देशी नस्लों के उच्च गुणवता वाले वीर्य से कृत्रिम गर्भाधान किया गया। इन सभी पशुओं को UID के द्वारा चिन्हित किया गया तथा इनाफ डाटा बेस पर रजिस्टर भी किया गया। इन देशी गायों का बियाने तक अनुसरण किया गया। राज्यों से आई रिपोर्ट के अनुसार 41353 बछडे-बछडी उत्पन्न हुए। इन बछडे-बछडीयों का अनुसरण भी विभाग द्वारा किया जा रहा है।
    देश भर के 12 ईटीटी केंद्रों में 2 से 14 अक्तूबर, 2017 के दौरान, राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत 10 राज्यों के सहयोग से देशी नस्लों में सामूहिक भ्रूण अंतरण का महत्वपूर्ण कार्यक्रम देश में पहली बार किया गया।
     इस कार्यक्रम के तहत सरोगेट गायों में उच्चम आनुवंशिक गुणता वाली ६ देशी गोपशु नस्लों जैसे साहीवाल, गिर, रेड सिंधी, ओंगोल, देवनी तथा वेचुर के 391 भ्रूणों को अंतरित किया गया। इन गायों को UID के द्वारा चिन्हित किया गया है तथा इनके ब्याने तक अनुसरण किया जायेगा। इस कार्यक्रम से उत्पन्न उच्च गुणवता वाले बछडो का उपयोग वीर्य केन्द्रों पर वीर्य उत्पादन के लिए किया जायेगा
 

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