February 2016

यूपी का 'चुनावी बजट

अब तक सबसे बड़ा बजट
बजट एक नजर में
- 3.47 लाख करोड़ का है बजट
- 14.6% पिछली बार से ज्यादा
- 10% ज्यादा कर वसूली का लक्ष्य
- 14 हजार करोड़ की नई योजनाएं
- 50 हजार करोड़ रुपये का घाटा
- 1255 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज बुंदेलखंड को
किसको कितना
शिक्षा : 54256 करोड़
खेती व ग्राम विकास : 38246 करोड़
बिजली : 33862 करोड़
चिकित्सा : 19383 करोड़
सड़क व पुल : 14721 करोड़
सिंचाई : 8941 करोड़

नदियों के प्रदूषण को कम कर सकते हैं पौधे

नदियों पर केवल घरेलू सीवेज का ही भार नहीं है। उद्योगों से आने वाले उत्प्रवाह में ज्यादा मात्रा में मौजूद भारी धातुओं का भी बड़ा योगदान हैं। 
- खास बात यह है कि इस घातक प्रदूषण से निपटने के लिए फिलहाल गंगा सहित किसी भी नदी में कहीं कोई इंतजाम नहीं हैं। ऐसे में यदि सीवेज का शोधन कर भी लिया जाए तो भी भारी धातुओं की मौजूदगी एक बड़ी समस्या बनी रहेगी।

- लेकिन राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआई) के वैज्ञानिकों ने पेड़-पौधों की मदद से इस समस्या को काफी हद तक कम करने का दावा किया है। यही नहीं, हरिद्वार के शांतिकुंज आश्रम में नाले पर यह सफल प्रयोग भी कर दिखाया है।

चीन की अर्थव्यवस्था में क्षरण की कहानी

चीन की कहानी किसी परीकथा की तरह है। लाखों गरीबों का यह देश महज चंद दशकों में ही एक वैश्विक महाशक्ति के रूप में जब उभरकर सामने आया तो सभी हतप्रभ रह गए। हालत यह हो गई कि चीन को दुनिया की सबसे बड़ी फैक्टरी कहा जाने लगा ..... एक मैन्युफेक्चरिंग पॉवर हाउस! 
- लेकिन अब लगता है कि चीन के उभार की कहानी जिस तरह से किसी परीकथा की तरह थी, उसके क्रमिक पतन की कहानी उससे भिन्न् होगी। आज पूरी दुनिया चीन पर नजरें जमाए हुए है।
- दुनिया अपने विकास के पहियों को हरकत में बनाए रखने के लिए चीन पर किस हद तक निर्भर हो गई थी, यह तभी पता चल सका, जब खुद चीन की अर्थव्यवस्था लड़खड़ाने लगी।

स्टार्टअप क्रांति : स्‍टार्टअप का नया हब बनता भारत

नौकरी अब पुराना फैशन हो गई है और नौजवान हिंदुस्तान अब स्टार्टअप नेशन बनना चाहता है। भारत में स्टार्टअप सालाना 270 फीसदी के रेट से बढ़ रहे हैं। हर महीने 500 से 800 नए स्टार्टअप शुरू होते हैं। और उम्मीद है कि अगले 5 साल में ये स्टार्टअप्स करीब 3 लाख नौकरियां खड़ी कर देंगें।

"क्या हैं स्टार्ट अप?
- यह सवाल किसी के भी मन में उठ सकता है कि स्टार्टअप दरअसल क्या बला है? स्टार्टअप दरअसल उन कारोबार को कहते हैं जिसे नये उद्यमी छोटे पैमाने पर शुरू करते हैं लेकिन जिनके लक्ष्य बड़े होते हैं.

डालर की तुलना में रूपए में कमजोरी और इसके प्रभाव

- अंतर बैंक विदेशी मुद्रा बाजार में डालर की तुलना में रुपए की गणना इस तरह से की जाती है कि एक डालर के बदले कितने रुपए मिल रहे हैं. 
- जैसे कि अगर अंतर बैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 65 रुपये प्रति डालर है तो मतलब एक डालर के बदले 65 रुपए.... तो रुपए की मात्रा जितनी बढेगी वह डालर की तुलना में उतना ही अधिक कमजोर होता जाएगा. यानी डालर की तुलना में उसका मूल्य कम होता जाएगा.

- वैश्वीकरण के इस दौर में इस तरह के घटनाक्रम से देश, कंपनी विशेष की अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है इससे इनकार नहीं किया जा सकता.

अंतर्राष्ट्रीय मुद्राकोष(International Monitory fund) में बढ़ेगी भारत की हिस्सेदारी

- भारत पहली बार अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) के दस सबसे बड़े सदस्य देशों में शामिल होगा। यह रुतबा आईएमएफ के लंबे समय से लटके कोटा सुधारों के लागू होने की वजह से हासिल होने जा रहा है। 
- इस नई व्यवस्था के बाद भारत ही नहीं, अन्य उभरते देशों का भी मुद्राकोष में वोटिंग अधिकार बढ़ेगा।

** फिलहाल भारत को 188 सदस्यों वाले मुद्राकोष में 2.34 फीसद मताधिकार प्राप्त है। जबकि कोटे के मामले में उसकी हिस्सेदारी 2.44 फीसद है। अब इन दोनों में वृद्धि हो जाएगी।

सेबी प्रमुख यूके सिन्हा को मिला सेवा विस्तार

- सरकार ने बाजार नियामक सेबी के प्रमुख यू के सिन्हा को एक साल का सेवा विस्तार दे दिया है। 
- वैश्विक अर्थव्यवस्था में उथल-पुथल के अभी थमने के आसार नहीं है इसलिए सरकार नहीं चाहती कि सेबी प्रमुख पद पर कोई बदलाव किया जाए।

- यही वजह है कि कैबिनेट सचिव पी के मिश्रा की अध्यक्षता वाली समिति के वित्तीय क्षेत्र के कई चर्चित लोगों के साक्षात्कार करने के बाद भी सरकार ने सिन्हा को ही सेबी प्रमुख के पद पर जारी रखने का फैसला किया है।

Sovereign Gold Bond

- दरअसल, ये बांड निवेशकों को सोना खरीदे बगैर, उसके भाव में लम्बे समय में होने वाली बढ़ोतरी का फायदा देने का जरिया है, वहीं सरकार के लिए ये आम लोगों से कर्ज लेने का एक माध्यम है.

- एक बांड एक ग्राम सोने के बराबर है. योजना के तहत कम से कम दो ग्राम यानी दो बांड और ज्यादा से ज्यादा आधा किलो यानी 500 यूनिट मे पैसा लगा सकते हैं.

- योजना का ऐलान पिछले साल बजट में हुआ था.

ब्रिक्स... कल, आज और कल : किस्सा ब्रिक्स का

- वर्ष 2003 में गोल्डमैन सैक्स ने चार ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाओं (ब्राजील, रूस, भारत और चीन) पर आधारित अपनी रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट में यह भविष्यवाणी की गई थी कि अगली आधी सदी तक दुनिया में वृद्घि को आगे बढ़ाने का काम यही अर्थव्यवस्थाएं करेंगी और 40 साल से भी कम समय में इनका संयुक्त जीडीपी उस वक्त की छह शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं (अमेरिका समेत) यानी जी- 6 के कुल जीडीपी को पार कर जाएगा।

- वर्ष 2003 में गोल्डमैन सैक्स की भविष्यवाणी के कुछ अहम पहलू उसके जारी होने के पहले दशक में सही साबित हो चुके हैं।

वर्तमान में वैश्विक आर्थिक जगत एक बड़ी मंदी की ओर जा रहा है। ऐसे में उन मुख्य कारणों की विवेचना कीजिये, जो वैश्विक मंदी के लिए जिम्मेदार हैं।

वर्तमान वैश्विक मंदी के मुख्य कारण है....
1. चीन की अर्थव्यवस्था में आया हुआ स्थगन /मंदी कई देशों के लिए संकट पैदा कर रहा है।

- चीन अब तक अमरीका की तरह विश्व के आर्थिक विकास में इंजन की तरह काम कर रहा था। इस देश में आर्थिक स्थगन से सबसे अधिक नुकसान उन देशों को हुआ है जो चीन को कच्चा माल निर्यात करते थे। 
- फिलहाल चीन के औद्योगिक तंत्र में क्षमता बहुत है, मगर उनके उत्पादनों को बाजार नहीं मिल रहा है इसलिए उत्पादन कम हो रहा है और कच्चे माल की मांग कम हो रही है।