January 2017

Prelims Question The Hindu (31 Jan)

Reference: http://gshindi.com/category/hindu-analysis/hindu-analysis-19-21-jan-17

1.निम्नलिखित में से कौनसे कथन परिसीमन आयोग के लिए सत्य है:

1. यह एक वैधानिक संस्था है |

2. इसके द्वारा दिए गए निर्णयों को सर्वोच्च  न्यायालय में चुनौती दी जा सकती है

निचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए

(a) केवल 1

(b) केवल 2

(c)1 और 2 दोनों

(d) न तो 1 न ही 2

2. जल्लीकट्टू के बारे में निम्न कथनों पर विचार कीजिए :

What do you understand by integrity and what is significance of it in civil services?

GS PAPER IV

लोक प्रशासनों में लोक/सिविल सेवा मूल्य तथा नीतिशास्त्रा

  आप सत्यनिष्ठा से क्या समझाते हो और सार्वजनिक सेवाओं में इस गुण का क्या महत्त्व है ?

What do you understand by integrity and what is significance of it in civil services?

What is the potential of Steel sector in India and in this respect analyse the draft Steel Policy 2017?

GS PAPER III

अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोजगार से सम्ब​न्धित विषय

भारत में स्टील सेक्टर कि क्या  क्षमता है और इस सन्दर्भ में हाल ही में जो स्टील नीति  का जो मसौदा  प्रस्तुत हुआ है उसका विश्लेषण करे ?

Q.  What is the potential of Steel sector in India and in this respect analyse the draft Steel Policy 2017?

Daily Updates

एनपीपीए ने 33 जरूरी दवाओं के दाम तय किए, अब महंगी नहीं होंगी जरूरी दवाएं

  • कैंसर, एड्स, इंफेक्शन जैसी बीमारियों की दवाइयों के दाम अब कंपनियां मनमाने तरीके से बढ़ा नहीं पाएंगी.
  •  केंद्र सरकार ने 11 आवश्यक दवाओं के दाम तय कर दिए हैं और 22 दूसरी दवाओं की कीमत में संशोधन किया है.
  • इसमें कैंसर, एड्स, बैक्टीरिया संक्रमण इत्यादि की दवाएं शामिल हैं.

वैश्विक मानकों से दूर : भारत की बहुराष्ट्रीय कंपनियां

# Business standard Editorial

देश का निजी कारोबारी जगत जिसे हम इंडिया इंक के नाम से जानते हैं, वह आखिर किस दिशा में बढ़ रहा है? आमतौर पर जारी किए जाने वाले तिमाही नतीजों के आंकड़ों के अलावा आखिर इनके बड़े लक्ष्य क्या हैं? जहां तक संगठनात्मक आकार और ढांचे में तेजी से बदलाव और उसे किफायती बनाने की बात है तो वर्ष 2000 के दशक के आरंभ में आर्थिक सुधारों ने उसे अंजाम दे दिया। तब से अब तक भारतीय उद्योग जगत ने शायद ही कोई बदलावपरक कदम उठाया हो।