अनर्जक परिसंपत्तिया (NPA)

Non Performing Assests (NPA) = Bad Loan

अनर्जक परिसंपत्तिया (NPA) बैंकों के  द्वारा दिया गया एक ऐसा ऋण या अग्रिम हैं जिसके मूलधन या ब्याज का भुगतान 90 दिनों की अवधि तक बकाया हो |

यह ज्यादातर काफी बड़ा loan होता है जो की कंपनी चुकता नहीं करती | उन्हें रिकवर करने की सम्भावना बेहद कम होती है | loan न देने के कई कारन होते है जैसे की :

1. कंपनी का दिवालिया निकल जाना |

2. कंपनी का जान बूछ कर घटा दिखा देना |

भारतीय स्वास्थ्य देखभाल का 2022 तक तीन गुना विस्तार संभव : एसोचैम

देश के उद्योग एवं वाणिज्य क्षेत्र की प्रतिनिधि संस्था, एसोचैम ने अपने एक अध्ययन का जिक्र करते हुए रविवार को कहा कि भारत में स्वास्थ्य देखभाल का बाजार 2022 तक तीन गुना बढ़कर 372 अरब डॉलर का हो सकता है।

भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन को महारत्न का दर्जा मिला


भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) को ‘महारत्न’ कंपनी का दर्जा प्रदान किया गया है और बीपीसीएल महारत्न के रूप में सम्मानित की जाने वाली अठवीं कंपनी बन गयी है। 
पीएसयू कंपनियों को तीन कैटेगरी में बांटा गया है-
1- महारत्न
2 नवरत्न
3- मिनिरत्न- कैटेगरी -1
                     कैटेगरी- 2
=>महारत्न
    सरकार द्वारा इस टाइटल की स्थापना 2010 में की गई, जिसने एक कंपनी के निवेश को 1000 करोड़ से बढ़ाकर 5000 करोड़ कर दिया। 

सरकार का अर्थव्यवस्था को नौ लाख करोड़ के पैकेज 


आर्थिक मोर्चे पर चुनौतियों का सामना कर रही मोदी सरकार ने अर्थव्यवस्था को गति देने और ‘न्यू इंडिया’ की नींव रखने के लिए भारी भरकम नौ लाख करोड़ रुपये के पैकेज का डोज देने का फैसला किया है। इसके तहत साढ़े पांच लाख करोड़ रुपये की ‘भारतमाला परियोजना’ शुरू कर देश में अभूतपूर्व स्तर पर हाईवे और एक्सप्रेस-वे का जाल बिछाया जाएगा। वहीं, फंसे कर्ज के संकट से बैंकों को उबारने के लिए 2.11 लाख करोड़ रुपये की पूंजी उपलब्ध कराई जाएगी। माना जा रहा है कि इन उपायों से न सिर्फ विकास की रफ्तार तेज होगी बल्कि बड़े स्तर पर रोजगार भी पैदा होंगे

निर्यात और जीएसटी

This article discuss about impact of GST on Export sector of Indian Economy
#Business_Standard
बीते कुछ वर्ष देश के वाणिज्यिक निर्यात पर भारी पड़े हैं। बीती कई तिमाहियों से निर्यात में लगातार गिरावट आई है। इस बीच वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धी राष्ट्रों का निर्यात बढ़ा है। परंतु कमजोर वैश्विक मांग के बीच भारत अपनी प्रतिस्पर्धा और विश्व व्यापार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा पाने में नाकाम रहा। ऐसा करने की कोशिशें नाकाम रहीं क्योंकि घरेलू आपूर्ति शृंखला और श्रम जैसे क्षेत्रों में जरूरी सुधार नहीं हो सका है। 

आर्थिक समीक्षा 2016-17 खंड-2 : अर्थव्यवस्था की स्थिति – विश्लेषणात्मक समीक्षा और नीति अनुमान

Economic Survey  2016-17 खंड-2 में भारतीय अर्थव्यवस्था  (Indian Economy) में ढांचागत सुधारों के प्रति नई आशा जताई गई है। नई आशा के कारकों में जीएसटी लांच किया जाना, विमुद्रीकरण के आर्थिक प्रभाव, एयर इंडिया के निजीकरण का सैद्धा

ऑटोमेशन के दौर में रोजगार की धुंधली तस्वीर

#Editorial_Business-Standard

इस साल ऑटोमेशन के चलते सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में नौकरियां गंवाने वाले कर्मचारियों की संख्या उतनी अधिक नहीं है लेकिन भविष्य में यह आंकड़ा काफी परेशानी पैदा करने लायक हो सकता है। अगर कंपनियों और सरकार ने आईटी कर्मचारियों के प्रशिक्षण और कौशल विकास पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया तो स्थिति बिगड़ सकती है। उसके अभाव में बहुतेरे लोगों के लिए रोजगार की संभावनाएं क्षीण नजर आ रही हैं। 

क्या हम इसको पचा पा रहे है ?

क्या होता है सीआरएआर (पूंजी पर्याप्ता अनुपात)

पूंजी पर्याप्ता अनुपात / कार 

- यह बैंक की पूंजी को मापने का एक तरीका है। यह वास्तव में बैंक की जोखिम वाली पूंजी का प्रतिशत बताता है।

- इस अनुपात का इस्तेमाल जमाकर्ताओं के धन की सुरक्षा और वित्तीय तंत्र के स्थायित्व के लिये किया जाता है।

- डिपॉजिट को नुकसान पहुंचाए बगैर लोन बुक पर बैंक कितना घाटा उठा सकता है, पूंजी पर्याप्ता अनुपात से इसका पता चलता है।

अगर यह अनुपात ज्यादा है तो इससे जमाकर्ताओं का जोखिम कम होता है। 

- यह बैंक की जोखिम भारित क्रेडिट को प्रतिशत के रूप में व्यक्त करता है।