निर्भया के चार साल और स्टाफ की कमी से झुझती पुलिस

निर्भया की मौत को चार साल पूरे हो चुके हैं| इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया| और विडम्बना की बात यह है कि इसी 15 दिसंबर को दिल्ली से फिर एक बलात्कार की खबर आई जिसने एक बार यह साबित किया कि पुलिस पूरी क्षमता के साथ गश्त (पेट्रोलिंग) नहीं कर रही है|

पुलिस की शिकायत :

  • दिल्ली पुलिस का कहना है कि उसके पास ड्राइवरों और अन्य स्टाफ की काफी कमी है| इससे गश्ती दल अपनी क्षमता के दो-तिहाई के बराबर भी गश्त नहीं कर पाता.
  •  महिला जवानों की भी कमी है. यानी गश्त के लिए जाने वाले हर वाहन (खास तौर पर आपात प्रतिक्रिया वाहन) में महिला सिपाहियों की तैनाती भी नहीं हो पाती जबकि बलात्कार जैसे मामलों की सूचना मिलने के बाद मौके पर जाते समय पुलिस दल के साथ महिला सिपाही होनी ही चाहिए.

क्या कमियाँ है अभी भी मौजूद पुलिस प्रशासन में

  • पेट्रोल वैन हैं, लेकिन ड्राइवर नहीं:
  • 2012 में 16 दिसंबर को हुई सामूहिक बलात्कार (निर्भया कांड) की घटना के बाद पेट्रोलिंग के लिए 370 वाहन मंजूर किए गए थे. लेकिन इन्हें चलाने के लिए ड्राइवर ही नहीं हैं.’|
  • इन नए वाहनों के शामिल होने के साथ पुलिस बल के पास वाहनों की कुल संख्या बढ़कर 1,000 के आसपास पहुंच चुकी है. इनमें वे वाहन शामिल नहीं हैं, जो रखरखाव या सुधार कार्यों के लिए खड़े हैं या फिर लगभग 820 वे वाहन जो कबाड़ होने की स्थिति में आ चुके हैं. यानी सिर्फ सड़क पर दौड़ने के लिए फिट 1,000 वाहनों को गश्त के लिहाज से 24 घंटे चलाने के लिए पुलिस को लगभग 3,400 ड्राइवरों की जरूरत है. लेकिन उसके पास यह अमला सिर्फ 2,200 की संख्या में ही है.
  • अपर्याप्त महिला सिपाही पुलिस के आपातकालीन 100 नंबर पर जैसे ही किसी घटना-दुर्घटना की सूचना आती है, सबसे पहले गश्ती वाहन ही मौके पर पहुंचता है. ऐसे में हर वाहन में कम से कम एक महिला सिपाही का होना आवश्यक है. खासतौर पर अगर घटना दुष्कर्म या महिलाओं के शारीरिक शोषण से संबंधित हो, तब तो यह और जरूरी हो जाता है क्योंकि महिला सिपाही से अपनी तकलीफ बताने में महिलाओं को स्वाभाविक रूप से आसानी हो जाती है. इसके बावजूद आंकड़े बताते हैं कि 2014 तक पुलिस के गश्ती नेटवर्क के साथ सिर्फ 43 महिला अफसरों की ही तैनाती हुई थी. कुछ और महिला सिपाही/अफसरों की तैनाती के बाद फिलहाल यह आंकड़ा 240 के करीब है.

स्टाफ की कमी से पुलिस की हर इकाई को दिक्कत उठानी पड़ रही है और नतीजा वाही दुर्बल व्यवस्था जो महिलीओ के प्रति  अपराध रोकने में नाकामयाब रह रही है