आईसीजे का यह आदेश वैसा ही है जैसा इसे होना चाहिए था, लेकिन क्या पाकिस्तान इसे मानेगा?

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इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) ने अपने एक अंतरिम फैसले में कुलभूषण जाधव की फांसी पर रोक लगा दी है. यह फैसला बुनियादी रूप से तार्किक लगता है. साथ ही यह उन मानवीय मूल्यों का भी सम्मान करने वाला है जिन्हें राजनीति से अलग रखा जाना चाहिए|

Ø  11 में से सभी जज इस पर एकराय थे कि यह मामला आईसीजे के अधिकारक्षेत्र में आता है क्योंकि यह जाधव को राजनयिक सहायता का अधिकार देने से जुड़ा है.

What was the matter:

भारत और OBOR

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भारत ने बेजिंग में हुए ओबीओआर शिखर सम्मेलन में हिस्सा नहीं लिया। ओबीओआर यानी वन बेल्ट वन रोड चीन की एक अति महत्त्वाकांक्षी परियोजना है और इसी पर व्यापक सहमति बनाने के मकसद से उसने यह सम्मेलन आयोजित किया था। प्रस्तावित परियोजना कितनी विशाल है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि :

Ø  दुनिया की आधी से अधिक आबादी, तीन चौथाई ऊर्जा-स्रोत और चालीस फीसद जीडीपी इसके दायरे में आएंगे।

भारतीय सॉफ्टवेयर उद्योग को चुनौतियाँ

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भारतीय सॉफ्टवेयर उद्योग के लॉबी समूह नैसकॉम ने भले ही कहा हो कि देश का सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग हर वर्ष 1.50 लाख लोगों को रोजगार दे रहा है लेकिन कुछ हालिया रिपोर्टों से पता चलता है कि इस क्षेत्र की कंपनियां अपनी कारोबारी संभावनाओं पर पुनर्विचार कर रही हैं और वे शुरुआती और मझोले स्तर पर कर्मचारियों की छंटनी की तैयारी में हैं।

हाल ही खबरों में

संरक्षण विकास की गारंटी नहीं है

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क्यों यह मुद्दा

आजकल भारतीय मीडिया और सरकारी हलकों में एक समूह-गान चल रहा है कि भारतीय ऑनलाइन कंपनियों को उबर और अमेजन जैसी अमेरिकी कंपनियों से बचाने की जरूरत है। इन दिनों राष्ट्रवाद एक ऐसा जरिया बन गया है, जिसके सहारे आप किसी का भी ध्यान अपनी ओर खींच सकते हैं, लेकिन नई दिल्ली में बैठे नीति-नियंताओं ने दूरदर्शिता दिखाते हुए फिलहाल ऐसे किसी तर्क-वितर्क में उलझने से अपने को दूर रखा है। कम से कम अब तक का उनका रुख तो यही बताता है।