रूसी साम्यवादी क्रांति के १०० साल पूरे; जानते हैं इस क्रांति के वर्तमान प्रभाव 

Does Russian revolution still has impact on world?
    आज पूरी दुनिया में रूस की साम्यवादी क्रांति के 100 साल पूरे होने पर बहस, बातचीत हो रही है। ऐसे में बीते सौ साल में रूस में जो बदलाव आया है, उसे एक घटना से समझा जा सकता है। इस वक्त रूस में न्यू रशियन रेवेल्यूशन 2017 की मांग जोर पकड़ रही है।
    इसके बावजूद 20वीं सदी के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक जीवन पर जिन चंद घटनाओं ने सबसे ज्यादा असर डाला है, उनमें दोनों विश्वयुद्ध के बाद रूस की क्रांति सबसे महत्वपूर्ण है। 

ओडिशा का पाइका विद्रोह

1857 का स्वाधीनता संग्राम जिसे सामान्य तौर पर भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम माना जाता है उससे भी पहले 1817 में ओडिशा में हुए पाइका बिद्रोह ने पूर्वी भारत में कुछ समय के लिये ब्रिटिश राज की जड़े हिला दी थीं।

 

ऐतिहासिक शहर अहमदाबाद यूनेस्कों की विश्वं धरोहर संपत्ति घोषित

  • ऐतिसाहिक शहर अहमदाबाद’ 8 जुलाई, 2017 को विश्व विरासत समिति के 41वें सत्र के दौरान यूनेस्को की विश्व विरासत की सूची में स्थान पाने में

बैसाखी: जानिये क्यों कहते हैं इसे किसानों का त्यौहार...

★ देश के अलग-अलग जगहों पर इसे अलग नामों से मनाया जाता है-जैसे असम में बिहू, बंगाल में नबा वर्षा, केरल में पूरम विशु के नाम से लोग इसे मनाते हैं.
♂ इतने बड़े स्तर पर देशभर में बैसाखी आखिर क्यों मनाते हैं लोग. 

★ बैसाखी, सिख धर्म की स्थापना और फसल पकने के प्र‍तीक के रूप में मनाई जाती है. 
★इस महीने खरीफ फसल पूरी तरह से पक कर तैयार हो जाती है और पकी हुई फसल को काटने की शुरुआत भी हो जाती है. ऐसे में किसाना खरीफ की फसल पकने की खुशी में यह त्यौहार मनाते हैं. 

अब तक की सबसे पुरानी सभ्यता : कुनाल (हरियाणा) में खुदाई के दौरान 6000 वर्ष पूर्व के मिले अवशेष

 पुरातत्व विभाग द्वारा गांव कुनाल (फतेहपुर हरियाणा) में शुरू की गई खुदाई के कार्य में प्री-हड़प्पाकालीन सभ्यता के अवशेष मिले हैं, जो 6000 साल पूर्व के हैं। यह सभ्यता अब तक की सबसे पुरानी सभ्यता हो सकती है।

हड़प्पाकालीन सभ्यता करीब 3500 साल पुरानी है, जबकि प्री-हड़प्पाकालीन सभ्यता तो 5 से 6 हजार वर्ष पुरानी है। खुदाई के दौरान टीम को आभूषण, मणके, हड्डियों के मोती मिले हैं। ये वस्तुएं बेशकीमती हैं और पुरातत्व विभाग इन्हें अपने संग्रहालय में सहज कर रखेगा।

जल्लीकट्टू के बचाव में कंहा तक उचित है देसी नस्लों के संरक्षण की दलील

#Business_Standard_Editorials

चेन्नई के मरीना बीच पर बैलों से जुड़े पारंपरिक खेल जल्लीकट्टू पर लगे प्रतिबंध को हटाने को लेकर विरोध प्रदर्शन चला। अब यह शांत हो चुका है|

क्या प्रतीकात्मक रीतियों के साथ हमें बने रहना चाहिए

जानें क्या है जलीकट्टू और इससे जुड़ी हुई व्यवस्थाएं? और क्या है इससे जुड़ा हुआ विवाद

★तमिलनाडु में पोंगल त्योहार के  दौरान खेला जाना वाला लोकप्रिय खेल जलीकट्टू पर प्रतिबंध हटाने को लेकर राज्य में बवाल मचा हुआ है। राज्य में कई जगहों पर इसको लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
★ तमिलनाडु सरकार ने केंद्र सरकार से अध्यादेश लाने की मांग की है। अध्यादेश के जरिए कानून बनाकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटा जा सकता है।

=>जलीकट्टू पर प्रतिबंध कब और क्यों ?

सभ्यता एवं संस्कृति में अन्तर

- प्राय: सभ्यता और संस्कृति को समानार्थी समझ लिया जाता है, जबकि ये दोनों अवधारणाएँ अलग-अलग हैं। तथापि विभेद ठीक वैसा ही है, जैसे हम एक फूल को सभ्यता और उसकी सुगन्ध को संस्कृति कहें। 
- सभ्यता से किसी संस्कृति की बाहरी चरम अवस्था का बोध होता है। संस्कृति विस्तार है तो सभ्यता कठोर स्थिरता। सभ्यता में भौतिक पक्ष प्रधान है, जबकि संस्कृति में वैचारिक पक्ष प्रबल होता है। यदि सभ्यता शरीर है तो संस्कृति उसकी आत्मा।

=>सभ्यता और संस्कृति में अंतर
☆ सभ्यता और संस्कृति में निम्नलिखित अन्तर पाये जाते हैं-