निताकत: सऊदी अरब की संशोधित जॉब स्कीम भारतीय कामगारों को बड़ा झटका

निताकत

- सऊदी अरब की संशोधित निताकत (सऊदीकरण) स्कीम वहां रोजगार की तलाश में गए भारतीयों को जोरदार झटका देगी। नई योजना के तहत सितंबर 2017 से सऊदी अरब की कुछ कंपनियां ही विदेशी एंप्लॉयीज को अपने यहां नौकरी पर रखने के लिए नए ब्लॉक वीजा का आवेदन कर पाएंगी। इनमें वही कंपनियां आएंगी जिन्होंने अपने यहां सऊदी एंप्लॉयीज की संख्या और अन्य मानदंडों के आधार पर हाई ग्रेड्स हासिल किया है। 

इंटरनैशनल नॉर्थ साउथ ट्रांसपोर्टेशन कॉरिडोर (INSTC) : चीन के वन बेल्ट वन रोड को टक्कर देने के लिए गलियारे पर त्वरित कार्यवाही पर भारत का जोर

★ भारत को ईरान के रास्ते रूस और यूरोप से जोड़ने की परियोजना को अमीला जामा पहनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ा दिया गया है।
★ इंटरनैशनल नॉर्थ साउथ ट्रांसपोर्टेशन कॉरिडोर (INSTC) के तहत सीमा शुल्क की आसान सुविधा वाले हरित गलियारे (ग्रीन कॉरिडोर) के जरिए जल्द ही सामानों की आवाजाही का पूर्वाभ्यास (ड्राइ रन) किया जा सकता है। 

★ भारत-रूस के बीच राजनयिक सबंधों की 70वीं वर्षगांठ के मौके पर इस महीने इसका संचालन हो सकता है।

सीरिया पर अमेरिकी हमले के भारत पर असर

★ सीरिया में रासायनिक हमले के बाद अमेरिका का रुख आक्रामक है। उसने सीरिया पर टॉमहॉक मिसाइलों से हमला बोल दिया। 
★इस घटना के बाद से रूस और अमेरिका में भी तनातनी है। तनाव इतना बढ़ चुका है कि कुछ को तीसरे विश्व युद्ध की आहट नजर आने लगी है। 
★ दुनियाभर के शेयर बाजारों में गिरावट देखने को मिली है। सीरिया पर अमेरिकी मिसाइलों के बरसने का असर भारत पर भी पड़ सकता है। वजह है अचानक कच्चे तेल की कीमतों में उछाल। यदि यह दौर जारी रहा तो भारत में भी पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत बढ़ सकती है।

भारत-ऑस्ट्रेलिया में आतंकवाद से निपटने के लिए समझौता

- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष मैल्कम टर्नबुल की बैठक के बाद दोनों देशों ने आतंकवाद से निपटने में सहयोग को बढ़ावा देने वाले एक करार समेत छह समझौतों पर हस्ताक्षर किए।

- दोनों नेताओं ने पारस्परिक हितों और चिंताओं के विभिन्न द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर व्यापक चर्चा की।

- व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते पर अगले दौर की चर्चा के जल्द आयोजन समेत कई दूरदर्शी फैसले किए

- टर्नबुल वर्ष 2015 में पदभार ग्रहण करने के बाद अपनी पहली भारत यात्रा पर पहुंचे।

बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना की भारत यात्रा इतनी अहम क्यों?

- बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना सात साल बाद भारत आ रही हैं। जानते हैं उनकी भारत यात्रा के पीछे क्या बड़े मायने हैं।

बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना का भारत दौरा, भारत-बांग्लादेश के बीच हुए अहम् समझौते

दोनों देशों के बीच परमाणु ऊर्जा क्षेत्र सहित 22 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। 

- कोलकाता और खुलना के बीच बस व ट्रेन संबंध बहाल

- पांच अरब डॉलर की वित्तीय मदद देने का फैसला

- तीस्ता जल बंटवारे संधि पर जल्द अंतिम फैसले का आश्वासन

अहम समझौते

- पांच साल का रक्षा सहयोग फ्रेमवर्क बना

- रक्षा उपकरणों की खरीद के लिए 50 करोड़ डॉलर का कर्ज

- बांग्लादेश में परियोजनाओं के लिए 4.5 अरब डॉलर की मदद

- बांग्लादेश के सैनिकों को मिलेगा भारत में बेहतर प्रशिक्षण

श्रीलंका-भारत : अस्पष्ट समुद्री सीमा बढ़ते तनाव का कारण

- श्रीलंका हमेशा से भारत के सबसे अच्छे मित्रों और पड़ोसियों में से एक रहा है. भारत और श्रीलंका सिर्फ जल-सीमा साझा करते हैं.

- भारत-श्रीलंका जल-सीमा विवादित तो नहीं है, पर पूरी तरह स्पष्ट रूप से परिभाषित भी नहीं है. इसीलिए दोनों देशों के मछुआरें एक-दूसरे के इलाकों में अक्सर चले जाते हैं. दोनों देशों की जल-सीमा पर श्रीलंकाई नौसेना कई बार गोलियां चलाकर भारतीय मछुआरों को मार डालते हैं. 

मछुआरों की समस्या :-

भारत-रूस राजनयिक संबंधों के 70 वर्ष : पुरानी गर्माहट लाने की कोशिश

क्या रूस दशकों पुराने अपने मित्र भारत के हितों को प्रभावित करने की शर्त पर चीन व पाकिस्तान के साथ रिश्तों को आगे बढ़ाना जारी रखेगा?

स्विट्जरलैंड सितंबर, 2018 से भारत के साथ कालेधन से जुड़ी सूचनाएं साझा करने पर सहमत

- एक करार के तहत स्विट्जरलैंड सितंबर, 2018 से भारत के साथ कालेधन से जुड़ी सूचनाएं साझा करने पर सहमत हो गया है

- स्विट्जरलैंड कालेधन पर जानकारी देने को तैयार है लेकिन उसने साफ किया है कि ऐसा तभी हो पाएगा जब सूचनाओं की गोपनीयता बरकरार रखी जाए. यदि ऐसा न किया गया तो वह सूचनाओं के आदान-प्रदान को रोक देगा. उसका तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में सूचनाओं की गोपनीयता और सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण होती है.

वर्तमान में ‘लुक वेस्ट’ नीति बेहतर

- वर्ष 1991 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव को आखिरकार आर्थिक उदारीकरण लागू करना पड़ा था क्योंकि इससे पहले लगभग नगण्य रह गए विदेशी मुद्रा भंडार के परिप्रेक्ष्य में भारत को अपना राष्ट्रीय गौरव तजते हुए सोना गिरवी रखना पड़ा था। उदारीकरण के उपायों ने न सिर्फ देश की घरेलू आर्थिक नीतियों में आमूलचूल परिवर्तन करके रख दिया था बल्कि इन बदलावों ने पूर्व में स्थित हमारे पड़ोसियों की तेजी से तरक्की करती आर्थिकी से तालमेल बिठाने में भी सहायता की थी।