5 वर्ष से ज्यादा लंबित मुकद्दमों व अपीलों के निर्णय में तेजी लाने का निर्देश 

5 वर्ष से ज्यादा लंबित मुकद्दमों व अपीलों के निर्णय में तेजी लाने का निर्देश 
#Punjab_Kesari
समय-समय पर विभिन्न मंचों पर न्यायालयों में वर्षों से लटकते आ रहे मुकद्दमों और अपीलों के अम्बार पर चिंता जताई जाती रही है। इसी पृष्ठभूमि में भारत के मुख्य न्यायाधीश ने हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों को जोर देकर यह कहा है कि वे पांच वर्ष से ज्यादा समय से लंबित मुकद्दमों तथा इतनी ही अवधि से जेलों में बंद लोगों की अपीलों पर निर्णय लेने में तेजी लाएं।

साइबर नहीं बुनियादी सुधार की दरकार न्यायपालिका को

#Business_standard_editorial

खबरों में

देश की सबसे बड़ी अदालत ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद खुलेगी तो वह कागज रहित हो चुकी होगी। यह घोषणा स्वयं मुख्य न्यायाधीश जे एस खेहड़ ने हाल ही में की। वह नए सूचना तंत्र का उद्घाटन कर रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने वर्ष 2016-17 में ई-कोर्ट मिशन के लिए 2,130 करोड़ रुपये मंजूर किए थे लेकिन दिसंबर तक महज 88 करोड़ रुपये खर्च हुए। जाहिर है इस क्षेत्र में खर्च करने के लिए बहुत सारी धनराशि उपलब्ध है। 

चर्च-कोर्ट के जरिए मिला तलाक कानूनन वैध नहीं

सर्वोच्च अदालत ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कहा कि चर्च-कोर्ट के जरिए मिला तलाक कानूनन वैध नहीं है। अदालत ने इस सिलसिले में दायर याचिका खारिज कर दी।

क्या था मामला

राष्ट्रपति शासन

राष्ट्रपति शासन लगाने से जुड़ा वह सब जिसे आपको जानने और समझने की आवश्यकता है"
(राष्ट्रपति शासन लगाने से जुड़े संवैधानिक प्रावधान और इस पर सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देश, सरल भाषा में)

संवैधानिक प्रावधान :-

† राष्ट्रपति शासन से जुड़े प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 356 और 365 में हैं.

★आर्टिकल 356 के मुताबिक राष्ट्रपति किसी भी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा सकते हैं यदि वे इस बात से संतुष्ट हों कि राज्य सरकार संविधान के विभिन्न प्रावधानों के मुताबिक काम नहीं कर रही है. ऐसा जरूरी नहीं है कि वे राज्यपाल की रिपोर्ट के आधार पर ही करे.

मुकदमों का बोझ : त्वरित और बेहतर बने न्यायतंत्र

न्याय की अवधारणा की बाबत अकसर कहा जाता है कि विलंबित न्याय दरअसल न्याय से इनकार ही है।

- मुख्यमंत्रियों और उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के सम्मेलन में सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति टी. एस. ठाकुर ने न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने की अपील की। वर्तमान में देश भर की अदालतों में लगभग सवा तीन करोड़ मुकदमे लंबित हैं।