जानें क्या है NSCN


नागालैंड के कई अलगाववादी गुट सालों से भारत से अलग होने की मांग करते आये हैं. इन सभी गुटों ने मिलकर 31 जनवरी 1980 को नेशनल सोशलिस्ट कौंसिल ऑफ नागालैंड नाम का एक संगठन बनाया है, बाद में इस गुट में फूट पड़ गई और 30 अप्रैल 1988 को एनएससीएन खापलांग ने अपना अलग गुट बना लिया.
    खापलांग का गुट नागालैंड का सबसे खतरनाक अलगाववादी गुट माना जाता है. ये गुट सालों से भारत से अलग होने की मांग पर अड़ा हुआ है. पिछले दिनों भारत सरकार ने नागालैंड में सक्रिय तमाम दूसरे अलगाववादी गुटों से बातचीत शुरू की और उन्हें शांति समझौता में शामिल किया.

रक्का का अपना आखिरी गढ़ खोने के बाद भी आईएस का खत्म होना मुश्किल क्यों

Although ISIS area has shrinked but its reemergence can not be neglected and instability in Syria and west can provide conducive ground for its reemergence.

#Satyagriha

इस्लामिक स्टेट (आईएस) की राजधानी कहे जाने वाले रक्का शहर पर अमेरिका समर्थित कुर्द और अरब लड़ाकों का कब्जा होना इस आतंकी संगठन के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका है. आईएस के नियंत्रण में एक समय ब्रिटेन के बराबर भूभाग आ चुका था. फिलहाल यह संगठन इराक और सीरिया के कुछ छोटे-मोटे इलाकों तक सिमटकर रह गया है.

पश्चिमी दुनिया में हो रहे आतंकी हमलों की जड़ें पाकिस्तान में हैं : UN Expert

Terrorism attack in western countries are increasing and according to an expert panel of UN roots of it can be traced to Pakistan.
#Satyagriha
संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने पाकिस्तान पर आतंकी समूहों को आश्रय और आर्थिक मदद देने के गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि :
    पश्चिम जगत और दक्षिण एशिया में हुईं आतंकी घटनाओं के लिए पाकिस्तान ज़िम्मेदार है. 

खबरों में देश की सुरक्षा के साथ कोई समझौता न हो

आजकल राष्ट्रीय स्तर के इलेक्ट्रॉनिक समाचार चैनलों के बीच सीमावर्ती संवेदनशील सैन्य स्थलों की रिपोर्टिंग करने की होड़ मची है। चैनलों के संवाददाता कई बार अपने अथवा सेना के ही वाहनों व हवाई जहाजों से सैन्य ठिकानों अथवा अंतरराष्ट्रीय सीमा पहुंच जाते हैं। इनकी रिपोर्ट्स में संबंधित जगह की दुर्गम्यता, सेना के जवानों के लिए रसद की स्थिति, परिवहन के साधनों की उपलब्धता, मौसम, संबंधित ठिकाने पर सैन्य कर्मियों की दिनचर्या आदि संबंधी जानकारी शामिल होती हैं। ये रिपोर्टें प्रसंग के अनुरूप उस वक्त तो प्रसारित होती ही है, बाद में भी कई महीनों तक फिलर के तौर पर इनका प्रसारण होता रहता है।