मणिपुर में जारी नाकेबंदी

मणिपुर में जारी नाकेबंदी को बावन दिन हो गए हैं। राज्य में इस नाकेबंदी ने चौतरफा संकट पैदा किया है। 

Why this blockade:

मणिपुर में यूनाइटेड नगा काउंसिल की ओर से नये जिले बनाने के विरोध में  यह आर्थिक नाकाबंदी चालु की गई है | मणिपुर में नए जिलों के गठन की मांग बहुत पुरानी है. लेकिन तमाम सरकारें अशांति के अंदेशे से पांव पीछे खींचती रही हैं|

  • इस साल राज्य में प्रशासनिक सहूलियत के लिहाज से सरकार ने सात नए जिलों के गठन का फैसला किया था.
  • लेकिन खासकर सदर हिल्स, जिसका नया नाम अब कांगपोक्पी हो गया है, को जिले का दर्जा देने के सवाल पर राज्य की नगा जनजाति ने विद्रोह का बिगुल बजा दिया. 
  • नागा समुदाय और नागा संगठनों ने ये कहते हुए इसका विरोध किया कि वो ऐतिहासिक तौर पर नागा इलाक़े हैं और उनके प्रस्तावित ग्रेटर नागालिम का हिस्सा हैं.

भौगोलिक स्थति

यूनाइटेड नगा काउंसिल ने दो राजमार्गों- एनएच-2 (इंफल-दीमापुर) और एनएच-37 (इंफल-जिरिबाम)- पर आवाजाही रोक रखी है। ये दोनों राजमार्ग, जो कि बाहरी दुनिया से मणिपुर को जोड़ते हैं, राज्य की जीवनरेखा कहे जाते हैं। इन पर आवाजाही ठप रहने से राज्य को आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। खाद्य पदार्थों से लेकर र्इंधन तक, रोजमर्रा की जरूरत की सारी चीजें मुहाल हो गई हैं। 

मणिुपर के लिए नाकाबंदी कोई नया अनुभव नहीं है। अपनी किसी मांग की खातिर दबाव बनाने के एक हथियार की तरह इसका इस्तेमाल कई बार हो चुका है। वर्ष 2011 में तो कुकी संगठनों की तरफ से हुई नाकाबंदी सौ दिन से ज्यादा चली थी, और बदले में फिर नगाओं ने भी वैसा ही किया था। दबाव डालने के ऐसे हथकंडों से किसी समस्या का हल तो कभी नहीं निकला है न निकल सकता है, उलटे राज्य में तरह-तरह का ध्रुवीकरण जरूर होता रहा है।