अफ्री़की विकास बैंक (एएफडीबी) की वार्षिक बैठक के उद्घाटन में प्रधान मंत्री का भाषाण

भारत के अफ्री़का के साथ सदियों से मजबूत रिश्‍ते रहे हैं। ऐतिहासिक रूप से, पश्चिमी भारत, विशेष रूप से गुजरात तथा अफ्री़का के पूर्वी तट के समुदाय एक दूसरे की भूमियों में बसे हुए हैं। ऐसा कहा जाता है कि भारत के सिद्धी (Siddhis) लोग पूर्वी अफ्री़का से आए थे। तटवर्ती केन्‍या में बोहरा समुदाय 12वीं सदी में भारत आए थे। वास्‍कोडिगामा के बारे में कहा जाता है कि वह एक गुजराती नाविक की सहायता से मालिन्‍दी से कालिकट पहुंचे थे। गुजरात के लोगों (dhows) ने दोनों दिशाओं में व्‍यापार किया। समाजों के बीच प्राचीन संपर्कों से भी हमारी संस

जलवायु परिवर्तन की नई चुनौतियां

#Editorial_Business Standard

In news:

अमेरिका के डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन ने संकेत  दिया है कि वह पेरिस में 2015 में आयोजित संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन समझौते में जताई गई प्रतिबद्घताओं से पीछे हट सकता है। यह बात मायने रखती है क्योंकि अमेरिका वैश्विक ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन में 14 फीसदी का जिम्मेदार है। अमेरिका का इस समझौते से पीछे हटना अन्य देशों को भी इसके लिए प्रोत्साहित कर सकता है। 

 

पाकिस्तान के भीतर भी संप्रभुता का सवाल और OBOR

भारत और OBOR

चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना द बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव को लेकर बीते दिनों बीजिंग में आयोजित सम्मेलन में भारत ने हिस्सा नहीं लिया. चीन पाकिस्तान औद्योगिक गलियारा (सीपेक) भी इस परियोजना का हिस्सा है जिसका भारत संप्रभुता के आधार पर विरोध कर रहा है. यह गलियारा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से होकर गुजर रहा है. भारत ने इस पर आपत्ति जताते हुए चीन की इस महत्वाकांक्षी परियोजना से खुद को अलग रखने का निर्णय लिया है.

पकिस्तान में सवाल

चीन और आसियान देश दक्षिण चीन सागर पर लंबे समय से जारी विवाद सुलझाने के लिए नियम बनाने पर सहमत

दक्षिण चीन सागर पर जारी टकराव को दूर करने की कोशिशें आगे बढ़ती दिख रही हैं.

Ø  इसे लेकर चीन और एसोसिएशन ऑफ साउथ ईस्ट एशियन नेशंस (आसियान) के सदस्य देशों के बीच एक बैठक हुई. इसके बाद चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस विवाद को सुलझाने के लिए लंबे समय से अटकी पड़ी आचार संहिता की रूपरेखा पर सभी पक्षों में सहमति बन गई है. आसियान में इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, वियतनाम, सिंगापुर, कंबोडिया, म्यांमार, थाईलैंड, ब्रुनेई और लाओस शामिल हैं.

Why conflict:

भारत और OBOR

In news:

भारत ने बेजिंग में हुए ओबीओआर शिखर सम्मेलन में हिस्सा नहीं लिया। ओबीओआर यानी वन बेल्ट वन रोड चीन की एक अति महत्त्वाकांक्षी परियोजना है और इसी पर व्यापक सहमति बनाने के मकसद से उसने यह सम्मेलन आयोजित किया था। प्रस्तावित परियोजना कितनी विशाल है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि :

Ø  दुनिया की आधी से अधिक आबादी, तीन चौथाई ऊर्जा-स्रोत और चालीस फीसद जीडीपी इसके दायरे में आएंगे।

जापान से रिश्ते आगे बढ़ने की कवायद

भारत के साथ सबसे अहम द्विपक्षीय रिश्ते अमेरिका, चीन या पाकिस्तान के साथ नहीं बल्कि जापान के साथ माने जा सकते हैं। फिलहाल कोई और देश भारतीय अर्थव्यवस्था की मदद करने की वैसी स्थिति में नहीं है जैसा कि जापान।

USA and JAPAPN

दक्षिण एशिया उपग्रह और पडौस नीति

#Business_Standard_Editorial

प्रक्षेपित किया गया दक्षिण एशियाई संचार उपग्रह (जीसैट-9) प्रौद्योगिकी के लिहाज से कोई नए आयाम नहीं छूता। लेकिन इससे यह पता चलता है कि स्वदेशी क्रायोजेनिक तकनीक अब स्थिर हो चली है। कुल 2,230 किलोग्राम वजन वाला यह उपग्रह संचार, आपदा राहत, मौसम के पूर्वानुमान और समुद्री परिवहन की निगरानी जैसे काम करेगा।

 लेकिन यह भारत के अपनी ताकत के सुलझे हुए इस्तेमाल का भी प्रदर्शन करता है। भारत ने पड़ोसी देशों को यह सेवा देकर अपनी प्रतिष्ठा  मजबूत की है।

दक्षिण एशिया उपग्रह जीसैट-9

दक्षिण एशिया उपग्रह ‘जीसैट-9’ के सफल लॉन्च के साथ भारत ने अंतरिक्ष कूटनीति की दिशा में कदम बढ़ा दिया है| इसे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से छोड़ा गया. इसके लॉन्च में 49 मीटर लंबे और 450 टन वजनी जीएसएलवी रॉकेट का इस्तेमाल किया गया. इस उपग्रह को बनाने से लेकर लॉन्च तक कुल 450 करोड़ रुपये का खर्च आया है, जिसे भारत ने उठाया है.

Who will share the data from this satellite