ब्रिक्स :प्रतिक्रियाशील, समावेशी एवं सामूहिक समाधानों का निर्माण

=>ब्रिक्स की अवधारणा और उसका आधार :-

Recent Summit

भारत की अध्यक्षता में 8वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन गोवा में इस महीने के मध्य में संपन्न होने के लिए निर्धारित है। ब्रिक्स ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के समूहीकरण का एक अद्वितीय अंतरराष्ट्रीय तंत्र है जो वैश्विक प्रभाव पुनर्संतुलन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जिससे विश्व अर्थव्यवस्था और राजनीति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ रहे हैं।

A look into facts

-सामूहिक रूप से BRICS देशों की दुनिया की आबादी में 43% हिस्सेदारी है, कुल विश्वभूमि क्षेत्र में लगभग 25% और विश्व व्यापार में लगभग 17% हिस्सेदारी के साथ विश्व के सकल घरेलू उत्पाद में इनकी 30% की भागीदारी है।

- ये पांच प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक, आर्थिक और राजनीतिक मंच पर अपनी क्षमताओं के अनुकूल एक सही स्थान की तलाश कर रहे हैं। इनकी बढ़ती प्रमुखता निश्चित रूप से वैश्विक मुद्दों को एक बेहतर तरीके से हल करने में मदद करेगी।

A look into how BRICS idea got develop

  • गोल्डमैन सैक्स द्वारा 2001 में वैश्विक अर्थशास्त्र पर प्रकाशित एकशोध पत्र 'बेहतर वैश्विक अर्थव्यवस्था का निर्माण- बीआरआईसी' में ब्रिटिश अर्थशास्त्री जिम ओ 'नील ने चार तेजी से विकासशील अर्थव्यवस्थाओं - ब्राजील, रूस, भारत और चीन के लिए ‘ब्रिक्स’शब्द की रचना एवं प्रयोग किया था।
  • 2006 में, ब्राजील, रूस, भारत और चीन ने नियमित रूप से एक अनौपचारिक कूटनीतिक समन्वय पहल शुरू की जो संयुक्त राष्ट्र महासभा की आम बहस (संयुक्त राष्ट्र महासभा) के हाशिये पर विदेश मंत्रियों की वार्षिक बैठकों के साथ शुरू हुई। इन सफल बातचीतों का निर्णय यह निकला कि चर्चा को राज्याध्यक्षों और शासनाध्यक्षों के स्तर पर वार्षिक शिखर सम्मेलनों के द्वारा आगे बढ़ाना चाहिए।
  • सबसे पहले ब्रिक शिखर सम्मेलन का आयोजन 2009 में येकातेरिनबर्ग (रूस) में हुआ था। ब्रिक समूह के सदस्यों के बीच संवाद का दायरा और गहराई वर्ष दर वर्ष बढ़ते गए जो 2011 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल किए जाने के साथ ही ब्रिक्स समूह बन गया।

What is significance of BRICS

  • अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था में उभरते हुए देशों के समूह के एक संक्षिप्त नाम से बढ़कर ब्रिक्स एक आशाजनक राजनीतिक एवं कूटनीतिक इकाई बन गया जो वित्तीय बाजारों की अपनी मूल अवधारणा से कहीं अधिक है।
  • गत वर्षों में ब्रिक्स चरणबद्ध और प्रगतिशील तरीके से विकसित हुआ है, जिसने बहुत सावधानी से अपने दो मुख्य स्तंभों को मजबूती प्रदान की है जो क्रमशः 1)- आर्थिक और राजनीतिक प्रशासन पर ध्यान देते हुए बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय तथा 2)- सदस्यों में आपसी सहयोग है।
  • वैश्विक शासन के मंचों और ढांचों में सुधार के लिए ब्रिक्स पुरजोर कोशिश करता है, विशेष रूप से आर्थिक और वित्तीय क्षेत्रों के मंच जैसे - अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक, जी -20 आदि। साथ ही राजनीतिक संस्थाओं जैसे कि संयुक्त राष्ट्र में सुधारों पर भी ब्रिक्स विशेष जोर दे रहा है।
  • इंट्रा-ब्रिक्स सहयोग भी पिछले कुछ वर्षों में विकसित किये गए एक स्पष्ट और व्यापक एजेंडे के तहत मजबूती हासिल कर रहा है। अन्य क्षेत्रों के अलावा इसमें वित्त, कृषि, अर्थव्यवस्था और व्यापार, अंतर्राष्ट्रीय अपराध से मुकाबला, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, शिक्षा, कॉर्पोरेट और शैक्षिक संवाद और सुरक्षा, जैसे क्षेत्र भी शामिल हैं।
  •  यह समूह सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरण क्षेत्र की चुनौतियों से निपटने, और विशेष रूप से सतत विकास के वर्ष 2030 के एजेंडे को नज़र में रखते हुए विभिन्न क्षेत्रों में ब्रिक्स समूह के सदस्यों के लिए नए अवसर उत्पन्न करने के लिए तैयार है।
  •  ब्रिक्स के साथ ही अन्य उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों को बुनियादी ढांचे की कमियों और टिकाऊ विकास की जरूरतों को संबोधित करने के लिए कई बार प्रमुख वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
  • सितंबर 2016 में हांग्जो, चीन में जी -20 शिखर सम्मेलन के हाशिए पर ब्रिक्स नेताओं ने एक अनौपचारिक मुलाकात की तथा इस अवसर पर जारी एक मीडिया नोट के अनुसार, ब्रिक्स नेताओं ने खुलेपन, एकता, समानता, आपसी समझ, समग्रता, पारस्परिक रूप से लाभप्रद सहयोग के सिद्धांतों द्वारा निर्देशित कूटनीतिक भागीदारी को और मजबूत करने के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय कानून पर आधारित एक उचित और न्यायसंगत विश्व आधार व्यवस्था की स्थापना के महत्व को भी रेखांकित किया।

NDB and BRICS
इन मुद्दों का समाधान करने के लिए, ब्रिक्स के पास अब खुद का अपना ‘नया विकास बैंक’ (एनडीबी) है जो ब्रिक्स और अन्य उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में बुनियादी ढांचे और सतत विकास की परियोजनाओं के लिए संसाधन जुटाने के लिए उपयोगी साबित होगा तथा एनडीबी के कार्यों में सहायता करने के लिए समूह के पास 100 बिलियन डॉलर के शुरूआती पूँजी के साथ एक ब्रिक्स आकस्मिक रिज़र्व कोष (सीआरए) भी है जो देशों की अल्पकालिक वित्तीय संकटों से निपटने में मदद करेगा।

NDB and its establishment

 बैंक की स्थापना का सुझाव 2012 में नई दिल्ली में आयोजित चौथे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारत द्वारा प्रस्तावित किया गया था। फ़ोर्टालेज़ा (ब्राजील)  में छठे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान सभी समझौतों पर ब्रिक्स सदस्यों द्वारा हस्ताक्षर किए गए और मई, 2015 में भारत के श्री के. वी. कामथ नए विकास बैंक के अध्यक्ष नियुक्त किये गए जिसका मुख्यालय शंघाई (चीन) में है। जुलाई 2015 में ऊफ़ा (रूस) में हुए 7वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में एनडीबी समझौता लागू हो गया।

 हाल ही में बैंक ने 811 मिलियन डॉलर मूल्य के अपने पहले ऋण पैकेज को मंजूरी दी है। ब्राजील, चीन, दक्षिण अफ्रीका और भारत में स्थित सभी चार परियोजनाएं अक्षय और हरित ऊर्जा के विकास के क्षेत्र में हैं। एनडीबी के प्रवक्ता के अनुसार, "रूस की परियोजनाओं सहित कई अन्य परियोजनाएं भी कतार में हैं, जो इस वक़्त विचार अथवा मूल्यांकन के विभिन्न चरणों में हैं। उन्होंने आगे कहा "एनडीबी विकासशील देशों की परिपक्वता तथा उनकी अपने पैरों पे खड़े होने की आकांक्षाओं का प्रतीक है।"

Goa declaration and BRIS

  •  भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कहा था, "राजनीतिक चुनौतियों, सुरक्षा संबंधी चुनौतियों और आर्थिक चुनौतियों से भरे इस विश्व में ब्रिक्स आशा के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में कार्य करता है"।
  •  ब्रिक्स नेताओं ने आतंकवाद के जघन्य कृत्यों की जोरदार निंदा की जो कि वैश्विक शांति और सुरक्षा को बाधित करते हैं तथा सामाजिक और आर्थिक विश्वास को भी कमजोर करते हैं। उन्होंने आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए एक संयुक्त वैश्विक प्रयास की आवश्यकता पर बल दिया जो अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों और मानदंडों के अनुसार हो जिसमें संयुक्त राष्ट्र चार्टर भी सम्मिलित है।
  • नेताओं ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता तथा ब्रिक्स सहयोग एजेंडे के विस्तार और कार्यान्वयन की अच्छी गति की सराहना की और भारत की अध्यक्षता में गोवा में होनेवाली आगामी आठवीं ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के सफल आयोजन में पूर्ण सहमति से जोर दिया। उन्होंने भारत के विभिन्न प्रांतों और शहरों में आयोजित किये जा रहे विभिन्न ब्रिक्स कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों के बीच आदान-प्रदान को मजबूत बनाने की पहलकी भी सराहना की।
  •  भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की कार्य योजना के बारे में बात करते हुए विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज ने नई दिल्ली में कहा,  "हम पांच आयामी दृष्टिकोण अपनाएंगे। इसमें संस्था निर्माण, क्रियान्वयन, एकीकरण, अभिनव खोज, तथा समेकन के साथ निरंतरता का समावेश होगा।"
  •  आठवें ब्रिक्स शिखर सम्मलेन के पार्श्व में एक ब्रिक्स-बिम्सटेक आउटरीच शिखर सम्मलेन भी आयोजित किया गया  जिसमें बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार और थाईलैंड के नेता ब्रिक्स के नेताओं के साथ शामिल होंगे।