चीन ने तिब्बत से नेपाल के लिए खोला हाईवे, रणनीतिक रूप महत्वपूर्ण इस रोड का सैन्य उपयोग  भी संभव

China has opened road route to Nepal via Tibbet
इसका इस्तेमाल नागरिक और सैन्य उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है। यह हाईवे भारत के लिए भी चिंता का सबब हो सकता है। 
    इस कदम के बारे में चीनी विशेषज्ञों का कहना है कि इससे चीन आसानी से दक्षिण एशिया में प्रवेश करने में सक्षम होगा। 
    यह राजमार्ग तिब्बत की राजधानी ल्हासा को नेपाल सीमा पर स्थित झांगमू से जोड़ेगा। यह हाईवे एक ओर नेपाल सीमा से जुड़ता है तो दूसरी ओर से तिब्बत स्थित निंगची को जोड़ता है, जो अरुणाचल प्रदेश की सीमा के बेहद निकट है। 

इटली के पीएम 10 साल बाद भारत आए , छह समझौतों पर हुए हस्ताक्षर

 

इटली के  पीएम पाओलो जेंटीलोनी भारत पहुंचे। 10 साल बाद इटली का कोई प्रधानमंत्री भारत दौरे पर आया है। इससे पहले 2007 में इटली के तत्कालीन पीएम रोमानो प्रोडी आए थे।

ग्लोबल रैंकिंग में सिंगापुर का पासपोर्ट सबसे पावरफुल, भारत 75वें नंबर पर


एक ग्लोबल रैंकिंग में सिंगापुर के पासपोर्ट को सबसे पावरफुल बताया गया है। 94 देशों की इस लिस्ट में भारत 75वीं रैंक है। पिछले साल की तुलना में भारत की रैंकिंग में तीन प्वाइंट का सुधार हुआ है। 
- Global Passport Power Rank 2017 की इस लिस्ट में अफगानिस्तान की रैंकिंग 94 दर्ज की गई है। उसके पास सिर्फ 22 प्वाइंट हैं। यह रैंकिंग ग्लोबल फाइनेंशियल एडवाइजरी फर्मन Arton Capital जारी करती है।  
 =>TOP 3 पर कौन

उम्मीदों को पंख लगाने का सही वक्त : India US Relation

Recent visit of Tillerson to India signify many things for India and his speech has clear message to India to come on board to counter China and making a coalition of Democratic nation
#Hindustan
अमेरिकी विदेश सचिव रेक्स टिलरसन के भारत आने का मकसद ट्रंप प्रशासन के उस इरादे को थोड़ा और पुख्ता करना है कि वह दिल्ली के साथ रिश्तों में गर्मजोशी का इच्छुक है। 

रक्का का अपना आखिरी गढ़ खोने के बाद भी आईएस का खत्म होना मुश्किल क्यों

Although ISIS area has shrinked but its reemergence can not be neglected and instability in Syria and west can provide conducive ground for its reemergence.

#Satyagriha

इस्लामिक स्टेट (आईएस) की राजधानी कहे जाने वाले रक्का शहर पर अमेरिका समर्थित कुर्द और अरब लड़ाकों का कब्जा होना इस आतंकी संगठन के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका है. आईएस के नियंत्रण में एक समय ब्रिटेन के बराबर भूभाग आ चुका था. फिलहाल यह संगठन इराक और सीरिया के कुछ छोटे-मोटे इलाकों तक सिमटकर रह गया है.