हादसे की पटरी

Why rail accidents in News:

इंदौर-पटना एक्सप्रेस ट्रेन का  कानपुर देहात में रेल हादसा , भारतीय रेल किस प्रकार गंभीर है हादसों को रोकने में उस पर प्रश्न चिह्न करते है |

Looking into Causes

  • ऐसी दुर्घटनाएं आमतौर पर पटरियों के उखड़ने या फिर पहियों में खराबी आने की वजह से होती हैं। रेल महकमा इससे अनजान नहीं है। मगर इस मामले में प्राय: लापरवाही बरती जाती है।
  • स्टेशनों के आसपास की पटरियों की नियमित जांच तो होती रहती है, पर दूर-दराज की जगहों पर मुस्तैदी प्राय: नहीं दिखाई जाती।
  • तेज रफ्तार गाड़ियों के गुजरने से अक्सर पटरियों की फिश-प्लेटें खिसकने की शिकायत मिलती है। वैसे भी यात्रियों का दबाव कम करने के लिए देश की ज्यादातर रेल लाइनों पर क्षमता से अधिक गाड़ियों का बोझ रहता है। इसलिए उनकी देखभाल, मरम्मत आदि में अधिक सतर्कता की जरूरत होती है, मगर इस मामले में अक्सर लापरवाही देखी जाती है। इसी का नतीजा है कि रेल हादसों पर रोक लगाना मुश्किल बना हुआ है।

Failure to implement rail safety recommendations of past

हर साल बजट में रेल सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने और यात्री सुविधाएं बढ़ाने का संकल्प दोहराया जाता है। मगर रेल हादसों पर अंकुश लगाने संबंधी जरूरी कदम अब तक नहीं उठाए जा सके हैं।

  • गाड़ियों में टक्कररोधी उपकरण लगाने की योजना बरसों पहले बनी थी, पर अभी तक वह कागजों पर ही सिमटी हुई है।
  • इसी तरह गाड़ियों में आधुनिक संचार उपकरण लगाने की योजना बनी थी, पर इस दिशा में अभी तक पहल नहीं हो पाई है।

ताजा रेल हादसे में एक बार फिर जांच के आदेश और मुआवजे वगैरह देकर जिम्मेदारियां पूरी समझ ली जाएंगी, पर जब तक सुरक्षा के आधुनिक उपाय नहीं किए जाते, ऐसे हादसों पर अंकुश का भरोसा दिलाना संभव नहीं होगा।