मोटर वाहन संशोधन विधेयक 2016

 

हर साल देश में करीब 5 लाख सड़क हादसे होते हैं। वर्ष 2015 में 1.46 लाख भारतीयों की मौत सड़क दुर्घटनाओं में हुई थी, जो पिछले साल के मुकाबले 5 फीसदी ज्यादा थे। साल दर साल बढ़ते हादसों और ट्रांसपोर्ट सिस्टम को सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से 9 अगस्त, 2016 को सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने लोक सभा में मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक, 2016 को प्रस्तुत किया। जिसे हाल ही में संसद द्वारा पास किया गया। मोटर वाहन विधेयक 1988 में संशोधन कर इसमें कई अहम बदलाव किए गए हैं और कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। मोटर वाहन संशोधन विधेयक 2016 की बड़ी बातें-

 

1. Vehicle manufacture standard का उल्लंघन करने पर निर्माण कंपनी को 100 करोड़ जुर्माना और जेल की सज़ा का प्रावधान

2. टैक्सी संचालन समूहों के लिए लाइसेंस की अनिवार्यता

3. संचालन समूहों को आईटी एक्ट 2000 के प्रावधानों का पालन करना होगा

4. ड्रिंक एंड ड्राइव मामले में जुर्माना 10000 रुपए तक बढाया गया

5. बिना लाइसेंस के ड्राइविंग में 5000 रुपया जुर्माना

6. बिना इंश्योरेंस के ड्राइविंग पर 2000 रुपए जुर्माना

7. गतिसीमा से ज्यादा तेज वाहन चलाने पर 1000 रुपए जुर्माना

8. स्पीडिंग औऱ रेसिंग पर 5000 रुपए जुर्माना

9. सीट बेल्ट नहीं पहनने पर 1000 रुपए जुर्माना

10. हेलमेट नहीं पहनने पर 1000 रुपए जुर्माना और 3 महीने तक लाइसेंस के अयोग्य करार दिया जाएगा।

11. नाबालिग द्वारा ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन कर जुर्म करने पर उनके माता-पिता या गार्जियन दोषी होंगे, और 25000 तक जुर्माने के साथ 3 साल तक जेल की सजा होगी। जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत नाबालिग पर केस चलेगा

12. गुड समैरिटन यानी नेक व्यक्तियों, जो दुर्घटना पीड़ित को आपातकालीन चिकित्सकीय या गैर- चिकित्सकीय मदद देता है, उसके विधेयक में संरक्षण दिए जाने का प्रावधान किया गया है। ऐसे व्यक्तियों (गुड समैरिटन) को किसी भी आपराधिक अथवा दीवानी कार्रवाई से मुक्त रखने का प्रावधान किया गया है।

 13. ट्रांसपोर्ट क्षेत्र में सेफ्टी और एफिशिएंसी मुद्दे पर जारी ब्राजील घोषणा पत्र अमल करने का विधेयक में कोशिश की गई है। इस घोषणा पत्र के मुताबिक दुर्घटना में मौत के मामलों में 2020 तक 50 फीसदी की कमी लाना लक्ष्य है।

14. इसके तहत विधेयक में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को और बेहतर और सुरक्षित बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

15. यह विधेयक केंद्र सरकार को ऐसे मोटर वाहनों को रिकॉल (वापस लेने) की शक्ति देता है, जो किसी खराबी के कारण पर्यावरण,ड्राइवर या सड़क का प्रयोग करने वाले को नुकसान पहुंचा सकता है।

16. गाड़ी के निर्माण में खामी रहने पर निर्माण कंपनी को ग्राहकों को 100 फीसदी रिप्लेसमेंट करना होगा
17. केंद्र सरकार ‘मोटर वाहन दुर्घटना कोष’ (Motor Vehicle Accident Fund) का गठन करेगी। यह कोष सड़क का प्रयोग करने वाले सभी व्यक्तियों को अनिवार्य बीमा कवर प्रदान करेगा।  कोष का प्रबंधन केंद्र सरकार द्वारा निर्दिष्ट अथॉरिटी करेगी। कोष के लिए फंड की उगाही सेस के ज़रिए की जाएगी।

18. संशोधन विधेयक में ‘राष्ट्रीय परिवहन नीति’ (National Transportation Policy) के निर्माण का प्रावधान है, जिसे केंद्र सरकार राज्यों से विचार-विमर्श द्वारा विकसित करेगी।

19 .रिन्यूअल लाइसेंस के लिए अवधि का विस्तार किया गया है0

ड्राइवर लाइसेंस की वैधता खत्म होने से 6 महीने पहले या बाद में रिन्यूअल के लिए एप्लाई किया जा सकेगा, जो अभी मात्र 1 महीना है

ट्रांसपोर्ट लाइसेंस की वैधता रिन्यूअल कराने की समय सीमा 3 साल से बढ़ाकर 5 साल की गई है।

लर्नर लाइसेंस के लिए ऑनलाइन एप्लाई की व्यवस्था की गई है।

लाइसेंस अथॉरिटी को दिव्यांगों को लाइसेंस जारी करने के अधिकार दिए गए हैं।

20. गोल्डेन ऑवर (दुर्घटना के तुरंत बाद) के दौरान सड़क दुर्घटना के शिकार लोगों का कैश-लेश उपचार करने हेतु केंद्र सरकार द्वारा एक योजना विकसित की जाएगी।

 

यकीनन इस विधेयक के ज़रिए सड़क दुर्घटनाओं में कमी के साथ-साथ ट्रांसपोर्ट सिस्टम को बेहतर बनाया जा सकता है, लेकिन अभी भी कुछ मुद्दों पर काम करना बाकी है मसलन-

1. जुर्माने की राशि बढ़ाने के साथ ही ट्रैफिक पुलिसिंग में भी सुधार करना होगा। क्योंकी इसे लागू करने की ज़िम्मेदारी उन पर होती है।

2. लाइसेंस लेने के लिए मिनिमम क्वालिफिकेशन या उचित ट्रेनिंग की व्यवस्था करनी होगी।

3. लोगों में ट्रैफिक नियमों के प्रति शिक्षा और जागरुकता फैलाने की जरूरत है।

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