रेल एकॉस्टिक सेंसिंग बेस्ड सेफ्टी तकनीक

Background:

हाल में कानपुर के समीप हुए दो रेल हादसों से सबक लेते हुए रेल प्रबंधन अपनी परिचालन व्यवस्था को सुरक्षित करने के तहत भारतीय रेल एकॉस्टिक सेंसिंग बेस्ड सेफ्टी तकनीक अपनाने जा रही है।

क्या है यह :

  • यह तकनीक ट्रेन की वास्तविक स्थिति के बारे में ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) से कई गुना सटीक जानकारी देगी।
  •  इसके लिए रेल ट्रैक के किनारे एकॉस्टिक सेंसर लगा आप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) बिछाया जाएगा, जो कंट्रोल रूम के डिस्प्ले स्क्रीन से जुड़ा होगा।
  • इस सेंसर के जरिये ट्रेन की सही स्पीड के साथ वास्तविक स्थान की जानकारी भी मिलती रहेगी।

तकनीक :

ओएफसी सेंसर : ओएफसी सेंसर अल्ट्रासोनिक तरंगों के माध्यम से उच्च ऊर्जा संकेत भेजता है। इससे कंट्रोल रूम में लगे ट्रांसमीटर का अलार्म संकेत देने लगता है। इससे संभावित दुर्घटना को रोकने में मदद मिलेगी। ओएफसी सेंसर से रेल ट्रैक पर लगातार नजर रखी जा सकती है। ट्रैक में किसी भी असमानता का पता चलने पर केबल में लगा सेंसर कंट्रोल रूम में लगे डिसप्ले पर संकेत देने लगेगा।

फायदे

Ø  इस तकनीक के माध्यम से मानवीय भूल के कारण होने वाली दुर्घटना के साथ कोहरे की वजह से ट्रेनों की लेटलतीफी को खत्म किया जा सकेगा।

Ø  ’कंप्यूटराइज्ड मॉनीटरिंग व विश्लेषण से ट्रेनों की वास्तविक स्थिति कंट्रोल रूम में लगे डिस्प्ले स्क्रीन पर लाइव देखी जा सकेगी।

Ø  ’चूंकि यह तकनीक ट्रैक पर जरा भी इंपैक्ट को रिकॉर्ड करती है, इसलिए सामान्य गतिविधियां भी रिकॉर्ड होंगी।

Ø  ’किस ट्रैक पर ट्रेन है, इसकी सही जानकारी मिलेगी। 1’कोहरे से होने वाली ट्रेन दुर्घटना को रोकने में मदद मिलेगी ।

Ø  ’ट्रेनों का परिचालन समय पर सुनिश्चित कराने में सहूलियत होगी।