Daily Current Affairs

जन परिवहन प्रणाली को सहारा देगी रेल सेवा

शहरो में परिवहन की समस्या

शहरों में निजी वाहनों की तादाद बहुत तेजी से बढ़ती जा रही है। दूसरी ओर सार्वजनिक परिवहन प्रणाली की हिस्सेदारी अपेक्षित स्तर तक नहीं बढ़ पा रही है। इसमें सड़क पर उपलब्ध जगह से जुड़ी बाधाओं की अपनी भूमिका है। शहरों के भीतर आवाजाही को बेहतर बनाने की तमाम कवायदों के बावजूद राष्ट्रीय शहरी परिवहन नीति, 2006 और शहरों में मेट्रो रेल और बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम के लिए अधिक केंद्रीय मदद के बावजूद शहरों में आवाजाही और जाम के झाम की समस्या बहुत मामूली स्तर तक ही सुलझी है। 

चर्च-कोर्ट के जरिए मिला तलाक कानूनन वैध नहीं

सर्वोच्च अदालत ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कहा कि चर्च-कोर्ट के जरिए मिला तलाक कानूनन वैध नहीं है। अदालत ने इस सिलसिले में दायर याचिका खारिज कर दी।

क्या था मामला

वन्यजीवों पर मंडराता संकट

#editorial Jansatta

हाल ही खबरों में

हाल ही में उत्तर प्रदेश के अमेठी में एसटीएफ ने पुलिस व वन विभाग की टीम के साथ मिल कर एक ट्रक से तस्करी के लिए जा रहे 4.40 टन कछुओं को पकड़ा। देश में अब तक कछुओं की तस्करी का यह सबसे बड़ा मामला बताया जा रहा है। बरामद कछुओं की कीमत दो करोड़ से भी अधिक बताई जा रही है। दरअसल, कछुओं की लगभग दो सौ प्रजातियां होती हैं लेकिन हमारे देश में पचपन प्रजातियां ही पाई जाती हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण ही है कि आज वन्यजीवों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

इलेक्ट्रानिक भुगतान क्षेत्र के लिये नियामक बनाने पर विचार

खबरों में

देश में डिजिटल लेनदेन के बढ़ते दौर में सरकार इस क्षेत्र के लिये एक अलग नियामक बनाने पर विचार कर रही है। नियामक देश में इलेक्ट्रानिक भुगतान को बेहतर बनाने के साथ साथ इसके लेनदेन शुल्कों का भी नियमन करेगा। 

FRBM समिति ने राजकोषीय घाटे पर लचीला रख अपनाने का सुझाव दिया

एन के सिंह समिति ने राजकोषीय स्थिति को मजबूत बनाने संबंधी अपनी रपट में सरकार को इस दिशा में नरम रख अपनाने का सुझाव दिया है ताकि विकास पर खर्च करने की सरकारी की  शक्ति पर ज्यादा अंकुश न लगे। 

Background:

नीतियों में स्पष्टता जरूरी तभी बनेंगे निवेश की धुरी

# Business Standard Editorial

वर्ष 2012 के बाद से भारत में भी कारोबारी चक्र में मंदी देखने को मिली है। भारत में मंदी कम निवेश और कम कारोबारी मुनाफे के मिलेजुले रूप में नजर आती है। एक अतिरिक्त विशेषता जिसने अर्थव्यवस्था पर इस बार नकारात्मक असर डाला है वह है बैलेंस शीट का संकट। मोटेतौर पर देखा जाए तो कारोबारी बैलेंस शीट वर्ष 2016 में दबाव में रही। इन फर्म की बात की जाए तो ये ब्याज चुकाने लायक परिचालन मुनाफा भी नहीं कमा पा रही थीं।