PIB (Press Information Bureau)

UPSC / State PSC की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों को PIB की जरुरत क्यों ?

भारत सरकार के विभिन्न अंगों यथा – विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका से सम्बंधित गतिविधियों की प्रामाणिक सूचना देने के लिए सरकार द्वारा PIB की स्थापना की गयी.

भारत सरकार की विभिन्न नीतियों, विधिक- कानूनों, उसके क्रिया- कलापों, पडोसी एवं अन्य देशों के साथ भारत के संबंधों और समझौतों, नयी- नयी पहलों को PIB के माध्यम से जनता तक पहुँचाया जाता है.

सिविल सेवकों की भर्ती के लिए आयोजित होने वाली सिविल सेवा की विभिन्न परीक्षाओं जैसे UPSC और स्टेट PCS द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय परीक्षाओं में इन सूचनाओं का महत्त्व अध्याधिक बढ़ जाता है.

ऐसे में सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी में PIB के महत्त्व को नकारा नहीं जा सकता. #GSHindi आप सभी सिविल सेवा के अभ्यर्थियों के लिए PIB के रूप में एक नया सेक्शन शुरू करने जा रहा है. यहाँ पर आपको PIB के महत्वपूर्ण आर्टिकल के अपडेटस रेगूलर बेस पर प्राप्त होते रहेंगे. तो PIB के updates पाने के लिए हमसे जुड़े रहिये.


 

भारत वन स्‍थिति रिपोर्ट 2017 (India state of forest report 2017)

India state of forest report 2017 Summery
     वन क्षेत्र के मामले में भारत दुनिया के शीर्ष 10 देशों में है। 
    ऐसा तब है जबकि बाकी 9 देशों में जनसंख्‍या घनत्‍व 150 व्‍यक्‍ति/वर्ग किलोमीटर है और भारत में यह 382 व्‍यक्‍ति/वर्ग किलोमीटर है। 
    भारत के भू-भाग का 24.4 प्रतिशत हिस्‍सा वनों और पेड़ों से घिरा है, हालांकि यह विश्‍व के कुल भूभाग का केवल 2.4 प्रतिशत हिस्‍सा है ओर इनपर 17 प्रतिशत मनुष्‍यों की आबादी और मवेशियों की 18 प्रतिशत संख्‍या की जरूरतों को पूरा करने का दवाब है।

राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (national productivity council)


    भारत सरकार के उद्योग मंत्रालय द्वारा सन् 1958 में स्थापित स्वायत्तशासी, बहुपक्षीय, गैर लाभांश संगठन है। 
    National Productivity Councii टोक्यो स्थित अंतः-शासकीय निकाय, एशियाई उत्पादकता संगठन (ए.पी.ओ.) का घटक है जिसके स्थापक-सदस्यों में से भारत सरकार भी एक है। 
    उद्योग मंत्री रा.उ.प. के प्रधान (President) हैं और सचिव (औद्योगिक नीति और संवधन विभाग) इसके अध्यक्ष (Chairman) हैं।
    

ऐश ट्रैक मोबाइल ऐप (ash track mobile app)


प्लेटफार्म ताप बिजली संयंत्रों द्वारा उत्पादित ऐश के बेहतर प्रबंधन में सहायक होगा क्योंकि यह फ्लाई ऐश उत्पादकों (ताप बिजली संयंत्र) तथा सड़क ठेकेदारों, सीमेंट संयंत्रों जैसे संभावित उपयोगकर्ता के बीच सेतु का काम करेगा।
 ऐश ट्रैक मोबाइल ऐप की निम्नलिखित विशेषताए हैं-
उपभोक्ताओं के लिए
    यह ऐप एक निश्चित स्थान से 100 किलोमीटर तथा 300 किलोमीटर के दायरे में स्थापित कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को दिखाता है
     यूजर जहां से फ्लाई ऐश लेना चाहता है उस पावर स्टेशन का चयन कर सकता है।

स्वस्थ राज्य, प्रगतिशील भारत’ रिपोर्ट 


नीति आयोग ने  ‘स्वस्थ राज्य, प्रगतिशील भारत’ शीर्षक से एक व्यापक स्वास्थ्य सूचकांक रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट में स्वास्थ्य के मोर्चे पर वार्षिक प्रगति तथा एक दूसरे की तुलना में समग्र प्रदर्शन के आधार पर राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को विभिन्न श्रेणियों में रखा गया है।
    यह रिपोर्ट स्वास्थ्य क्षेत्र में देश के प्रदर्शन को विविधता तथा जटिलता के आधार पर वार्षिक स्तर पर आंकने के लिए एक व्यवस्थित पद्धति विकसित करने का प्रयास है।

भारतीय दिवाला एवं दिवालियापन बोर्ड (कॉरपोरेट व्यक्तियों के लिए फास्ट ट्रैक दिवाला समाधान प्रक्रिया) विनियम, 2017 में संशोधन किए गए

भारतीय दिवाला एवं दिवालियापन बोर्ड (आईबीबीआई) ने कल भारतीय दिवाला एवं दिवालियापन बोर्ड (कॉरपोरेट व्यक्तियों के लिए फास्ट ट्रैक दिवाला समाधान प्रक्रिया) विनियम, 2017 में संशोधन कर दिए।
संशोधनों के अनुसार –

उज्‍ज्‍वला योजना के तहत लक्ष्‍य में बढ़ोतरी को मंजूरी

  • आर्थिक मामलों पर कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने 4800 करोड़ रुपये के अतिरिक्‍त आवंटन के साथ प्रधानमंत्री उज्‍ज्‍वला योजना (पीएमयूवाई) के लक्ष्

मंत्रिमंडल ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अधीन स्वायत्तशासी निकायो को युक्तिसंगत बनाने का मंजूरी दी


     मंत्रिमंडल ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अधीन स्वायत्तशासी निकायो को युक्तिसंगत बनाने को मंजूरी दी। इन निकायों में राष्ट्रीय आरोग्य निधि (आरएएन) और जनसंख्या स्थिरता कोष (जेएसके) शामिल हैं। इनके कामकाज को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के तहत करने का भी प्रस्ताव है।
     स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अधीन स्वायत्तशासी निकायों को युक्तिसंगत बनाने में अंतर-मंत्रालयी परामर्श तथा इन निकायों के मौजूदा उप-नियमों की समीक्षा शामिल है।
राष्ट्रीय आरोग्य निधि

मंत्रिमंडल ने वर्गीकरण के मानकों को बदलने के लिए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उपक्रम विकास अधिनियम, 2006 में संशोधन मंजूरी


     मंत्रिमंडल ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उपक्रमों के वर्गीकरण के आधार में बदलाव को मंजूरी दी है। इसे ‘संयंत्र एवं मशीनरी/उपकरण में निवेश’ से बदलकर ‘वार्षिक कारोबार’ में बदलने का प्रस्ताव है।
     इस कदम से व्यापार करने में आसानी होगी और वर्गीकृत वृद्धि के नियम बनेंगे और जीएसटी के दायरे में नयी कर प्रणाली वजूद में आएगी।