Canadian prime minister visit and controversy


भारत और कनाडा के बीच लंबे समय से अच्छे संबंध हैं और कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की भारत यात्रा इन संबंधों का जश्न मनाने और इन्हें एक अगले स्तर पर ले जाने का मौका होनी चाहिए थी. लेकिन ऐसा लग रहा कि दुनिया के सबसे दुलारे नेताओं में शुमार ट्रूडो के लिए यह यात्रा कहीं अपनी इस छवि की चमक फीकी करने वाली साबित न हो जाए.
Reason 

 क्या OMAN से समझौता खाड़ी क्षेत्र में भारत की सैन्य कूटनीति की एक नई शुरुआत



प्रधानमंत्री की OMANयात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धि नई दिल्ली और मस्कट के बीच हुआ एक विशेष समझौता है. इसके तहत अब भारत इस खाड़ी देश के दुक्म बंदरगाह का सैन्य इस्तेमाल कर सकता है. हालांकि यह समझौता बहुत पहले हो जाना चाहिए था. खाड़ी क्षेत्र की यह सल्तनत भारत के साथ सुरक्षा संबंधों को मजबूत करने में हमेशा दिलचस्पी दिखाती रही है, लेकिन नई दिल्ली की तरफ से उसे ज्यादातर मौकों पर ठंडी प्रतिक्रियाएं ही मिलीं.


Peeping into history: India Oman Relation

मुक्तिदाता न बने भारत (India Maldive)


#Rashtriya_Sahara
Maldive current events
हिन्द महासागर के तटीय क्षेत्रमें स्थित मालदीव अपने आंतरिक संकट से जूझ रहा है। निरंकुश और अधिकारवादी राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना करके देश में आपातकाल थोप दिया है। मुख्य न्यायाधीश अब्दुल्ला सईद और एक अन्य न्यायाधीश अली हमीद को गिरफ्तार कर लिया गया है। सरकार के इस फैसले के खिलाफ जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, और काफी पहले से चली आ रही राजनीतिक अस्थिरता के कारण देश की अर्थव्यवस्था और राजनीति, दोनों बुरी तरह से प्रभावित हो रही हैं। 

कार्यस्थल पर लैंगिक समानता (gender equality) कायम करने की कीमत

What cost we have to bear for gender equality at working places
#Business_Standard
आम बजट में महिला कर्मचारियों के भविष्य निधि अंशदान को मानक 12 फीसदी से कम करके 8 फीसदी करने का प्रस्ताव रखा गया है जबकि नियोक्ता के अंशदान में कोई बदलाव नहीं है। क्या 4 फीसदी का यह अंतर और अधिक महिलाओं को कंपनियों में रोजगार की ओर ले आएगा? इसकी संभावना नहीं है। आइए जानते हैं क्यों? 

‘One Nation One Election’ संघीय अवधारणा और स्वस्थ लोकतंत्र के विरुद्ध’


#Rajasthan_Patrika
भारत में ‘एक देश एक चुनाव’ का प्रयास लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाने की बजाय उसको कमजोर ही करेगा। यह देश हित में नहीं है। इसके लिए चुनाव पर बहुत ज्यादा धन खर्च होने और निरंतर चुनाव से प्रशासन के व्यस्त रहने व विकास कार्य में अड़चनों की दलीलें दी जा रही हैं। चुनाव आयोग द्वारा कराए गए चुनाव में होने वाले खर्च को राष्ट्र वहन नहीं कर सकता, यह कभी नहीं कहा गया। चुनाव खर्च का ताल्लुक राजनीतिक दलों व उम्मीदवारों के खर्चों से ही होता है।