NEWSPAPER SUMMARY 15 November 2018

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NEWSPAPER SUMMARY 15 November 2018

1.इसरो के बाहुबली ने अंतरिक्ष में पहुंचाया सबसे भारी सेटेलाइट

  • भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की सफलता गाथा में एक और अध्याय जुड़ गया है। बुधवार को इसरो ने बाहुबली कहे जाने वाले अपने सबसे भारी रॉकेट जीएसएलवी-एमके3-डी2 की मदद से देश के सबसे भारी और उन्नत संचार उपग्रह जीसेट-29 को कक्षा में स्थापित किया। यह उपग्रह पूवरेत्तर और जम्मू-कश्मीर के दूरस्थ इलाकों में इंटरनेट अन्य संचार सुविधाएं मुहैया कराने में मददगार होगा।

USE IN PRELIMINARY,ISRO ACHIEVEMENT

2.विधानसभा चुनावों के नतीजे के दिन ही शुरू होगा संसद का शीतकालीन सत्र

  • विधानसभा चुनावों के नतीजे के दिन ही शुरू होगा संसद का शीतकालीन सत्र आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में संसदीय मामलों की कैबिनेट कमेटी (सीसीपीए) ने मंगलवार की रात को ही यह फैसला लिया।

· संसद का शीतकालीन सत्र आमतौर पर पहले नवंबर में शुरू होता था, लेकिन यह लगातार दूसरा साल है जब यह दिसंबर में आहूत हो रहा है। हालांकि इस साल सत्र में देरी का कारण पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव हैं।

USE IN PAPER 2-PAELIAMENT DECLINE,DEMOCRACY

3.ईपीसीए की दो टूक, निजी वाहनों पर रोक या बिना छूट के ऑड-इवेन

  • नेशनल ग्रीन टिब्यूनल (एनजीटी) ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से रिहायशी क्षेत्रों में चल रहे करीब 52 हजार उद्योगों पर कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। एनजीटी ने कहा कि बोर्ड से जो रिपोर्ट मिली है, उसमें कमेटी बनाने का जिक्र है। इसके बावजूद अवैध उद्योगों पर क्या कार्रवाई की गई, इसके बारे में नहीं बताया गया।

USE IN PAPER 2-TRIBUNAL 3-ENVIRONMENT POLICY/POLLUTION

4.मरीज के तीमारदार और कांफ्रेंस में भाग लेने वालों को भी -वीजा

  • विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने में -वीजा की योजना काफी प्रभावी साबित हो रही है। यही कारण है कि -वीजा पर यात्र करने वाले पर्यटकों की संख्या में पिछले चार सालों में लगभग चार गुना तक बढ़ोतरी हुई है। चार साल पहले शुरू इस योजना के माध्यम से 166 देशों के नागरिकों को सुविधा मिल रही है। मरीज के तीमारदारों सहित कांफ्रेंस में भाग लेने वालों को भी -वीजा की सहूलियत दी गई है।

· गृह मंत्रलय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 2015 में -वीजा पर केवल 4.47 लाख लोग भारत आए थे, 2017 में यह संख्या 17 लाख हो गई। इस साल 31 अक्टूबर तक 18.78 लाख पर्यटक -वीजा पर भारत चुके हैं।

USE IN PAPER 3-TOURISM,MEDICAL HUB

5.सितारों की सियासत, जमीनी मुद्दे हवा

  • स्टार प्रचारकों की सभाओं में काला रंग खौफ बना हुआ है। ज्यादातर स्टार प्रचारकों की सभा में स्थानीय प्रशासन काले रंग को लेकर इतना खौफजदा रहता है कि इस रंग के कपड़े का टुकड़ा भी लेकर किसी को कार्यक्रम स्थल तक जाने नहीं दिया जा रहा है।

USE IN VALUE OF DEMOCRACY TOPIC ESSAY, ETHICS,

6.निजी अस्पताल भ्रामक विज्ञापन देने का दोषी, एक लाख जुर्माना

  • भ्रामक विज्ञापन देकर व्यापार के अनुचित तरीके अपनाने और मरीज से एंजियोप्लास्टी स्टेंट इम्प्लांट के लिए ज्यादा धनराशि वसूलने पर राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने हरियाणा के एक निजी अस्पताल पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।

USE IN PAPER 3- CONSUMER RIGHT,CORRUPTION,CODE OF ETHICS

7. अब लिक्विड के बजाय जेल प्रोपेलेंट से उड़ाएं स्पेसक्राफ्ट

  • कम जगह लेकर ज्यादा ऊर्जा देता

· एयरोस्पेस इंडस्ट्री में लगातार बढ़ रही योजनाओं अनुसंधान यात्रओं के लिए बड़े स्पेसक्राफ्ट बनाए जाते हैं, जिनमें लिक्विड प्रोपेलेंट की खपत अधिक होती है। यह प्रोपेलेंट महंगे होते हैं। अधिक मात्र में इनका इस्तेमाल होने से खर्च और बढ़ जाता है। वहीं, जेल प्रोपेलेंट उनकी तुलना में सस्ता होने के साथ ही जगह भी कम लेता है। इससे यह छोटे स्पेसक्राफ्ट के लिए भी मुफीद साबित होगा। भविष्य में छोटे स्पेसक्राफ्ट इससे उड़ाए जा सकेंगे।

USE IN PAPER3-SCIENCE&TECH PRELIMINARY

8.गंगा में आस्था के साथ उमड़ेगा एडवेंचर टूरिज्म

  • चुनौती 1 : 2.5 मीटर से तीन मीटर गहराई के फेयरवे का विकास अनुरक्षण करना होगा।

· निदान : प्राधिकरण ने ड्रेजिंग के लिए जलमार्ग का तीन चरणों में -टेंडर कर दिया है, एक टेंडर अडानी ग्रुप को जारी कर दिया गया है। कंपनियां गंगा में गहराई बढ़ाएगी। वाराणसी से गाजीपुर तक कंपनी चयन प्रक्रिया चल रही।

· चुनौती 2 : गंगा में गाद का फिर से बनना और अनियमित गाद।

· निदान : चूंकि 13 तरह के जलपोत इस जलमार्ग पर चलेंगे, इसलिए जिन कंपनियों को ड्रेजिंग की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, वह पांच साल तक गंगा में गाद पर निगाह रखेंगी, वह रास्ते को बेहद सुगम बनाएंगी।

· तट अपरदन को कम करने के लिए तीव्र नियंत्रण विनियमन अन्य उपयोग कर्ताओं को सुरक्षा

· चौड़ी नदी में नौचालन के लिए चैनल की पहचान करना और विनियमन द्वारा बहाव को नियंत्रित करना-टर्मिनल के विकास के लिए भूमि के अधिग्रहण में आने वाली बाधाएं।

· चुनौती 3 : रो-रो सेवा की सुरक्षा टर्मिनल स्थानों को कनेक्टिविटी

· निदान : प्राधिकरण ने डिजास्टर प्लान बनाने के लिए डीपीआर बना दिया है। कंपनी चयन प्रक्रिया के लिए टेंडर डाक्यूमेंट अपलोड किए गए हैं। जिन्हें सुरक्षा की जिम्मेदारी दी जाएगी, वे स्थानीय प्रशासन की मदद से काम पूरा करेंगे।

USE IN PAPER 1-GEOGRAPHY,3-POLLUTION,TRANSPOTATION

9. बंगाल में मनाया गया रसगुल्ला दिवस

  • रसगुल्ला प्रेमियों या यूं कहें कि मिठाई खाने वाले शौकीनों के लिए 14 नवंबर का दिन खास है। अपनी विशिष्ट विरासत को समेटे बंगाल के रसगुल्ले को पिछले वर्ष इसी दिन भौगोलिक पहचान (जीआइ) का तमगा हासिल हुआ था।

PRELIMINARY

10. एयर इंडिया का राहत पैकेज विनिवेश का विकल्प नहीं

  • एयर इंडिया का 29000 करोड़ रुपये का कर्ज स्पेशल परपज व्हीकल (एसपीवी) को ट्रांसफर करने पर बातचीत अंतिम दौर में पहुंच गई है। विनिवेश पर उन्होंने कहा कि एयर इंडिया के प्रस्तावित विनिवेश को अस्थायी रूप से टाला गया है। हालात दुरुस्त होने पर विनिवेश प्रक्रिया दोबारा शुरू की जाएगी। उन्होंने बताया कि एयरलाइन के नॉन-कोर असेट्स के साथ कर्ज एसपीवी को ट्रांसफर किया जाएगा।

USE IN PAPER3-DISINVESTMENT

11. ईमानदार करदाताओं को पुरस्कार देने के प्रस्ताव पर विचार

  • केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) एक रिपोर्ट पर विचार कर रहा है, जिसमें ईमानदार करदाताओं को विभिन्न प्रकार की सेवाओं और कर संबंधी कार्य में प्राथमिकता देने का प्रस्ताव पेश किया गया है। सीबीडीटी आयकर (आइटी) विभाग की नीतियां तय करता है। उसने इस बारे में एक समिति गठित की थी, जिसने अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें जमा कर दी हैं।
  • बैठक में विभाग से आग्रह किया था कि वे करदाताओं के लिए सेवाएं बेहतर करें और यह सुनिश्चित करें कि ईमानदार करदाताओं को समुचित महत्व मिले। यह भी प्रस्ताव रखा गया था कि जो करदाता ईमानदारी से कर जमा करते हैं या सिर्फ रिटर्न भी दाखिल करते हैं, उन्हें वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों द्वारा सार्वजनिक तौर पर सम्मानित किया जाए।

USE IN PAPER 4-ETHICS,INTEGRITY

12. भारत ने मृत्युदंड पर यूएन मसौदा प्रस्ताव के विरोध में किया मतदान

  • भारत ने मृत्युदंड को लेकर संयुक्त राष्ट्र महासभा की ओर से लाए गए मसौदा प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया है। भारत ने कहा कि यह प्रस्ताव संवैधानिक कानून के खिलाफ है और देश में विरले मामलों में ही मौत की सजा सुनाई जाती है।

· महासभा की तीसरी समिति (सामाजिक, मानवीय और सांस्कृतिक) की ओर से मंगलवार को पेश किए गए इस मसौदा प्रस्ताव के पक्ष में 123 और विरोध में 46 मत पड़े। 30 सदस्य देशों ने इस मतदान में हिस्सा नहीं लिया। भारत उन देशों में शामिल रहा, जिन्होंने प्रस्ताव के विरोध में मतदान किया। इस प्रस्ताव के जरिये महासभा सभी देशों से मौत की सजा का सामना कर रहे लोगों के अधिकारों की अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत सम्मान करने की अपील करेगी।

USE IN PAPER 1-SOCIETY,CRIME,2-PUNISHMENT REFORM

13. छात्रों की सक्रियता से घबराए चीन ने दी चेतावनी

  • सरकार के खिलाफ प्रदर्शनों में युवाओं की बढ़ती सहभागिता से चीन परेशान है। हाल में मजदूरों के समर्थन हुए प्रदर्शन में छात्रों के सम्मिलित होने के बाद प्रशासन ने विश्वविद्यालयों पर नकेल कसनी शुरू कर दी है। चीन की प्रतिष्ठित पेकिंग यूनिवर्सिटी में छात्रों को घोषित तौर पर ऐसे प्रदर्शनों से दूर रहने की चेतावनी दी गई है। पेकिंग यूनिवर्सिटी को छात्र आंदोलनों का गढ़ माना जाता है।

USE IN PAPER 2- IR COUNTER FOR CHINA ,DEMOCRACY VALUE

14. मंगल पर नासा के यान की लैंडिंग का होगा सीधा प्रसारण

  • 26 नवंबर को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का इनसाइट यान जब मंगल की सतह को छुएगा, तब पूरी दुनिया उस पल की गवाह बनेगी। दरअसल, नासा टेलीविजन, नासा की वेबसाइट और यूट्यूब समेत विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसका सीधा प्रसारण किया जाएगा।

· नासा ने पांच मई को इनसाइट को मंगल ग्रह की ओर रवाना किया था। 2012 में भेजे गए क्यूरियोसिटी रोवर के बाद मंगल पर पहुंचने वाला यह नासा का पहला यान होगा।

USE IN PAPER 3-SCIENCE & TECH ,SOCIAL  MEDIA USAGE

15. ग्लोबल वार्मिग बीते 100 वर्षो में कभी नहीं रुकी

  • ग्लोबल वार्मिग बीते 100 वर्षो में कभी नहीं रुकी शोधकर्ताओं का कहना है कि इस नवीन अध्ययन से स्पष्ट है कि 100 वर्षो से ग्लोबल वार्मिग निरंतर जारी है और बीते तीन दशकों में इसमें एक निश्चित दर में वृद्धि हो रही है। शोधकर्ताओं ने कहा कि 2014 अल निनो दक्षिणी ऑसीलेशन (ईएनएसओ) घटना के रूप में समाप्त हुआ था, जो भूमध्य रेखा के मध्य पूर्व प्रशांत क्षेत्र में विकसित हो रहा था। इससे पृथ्वी के तापमान में तेजी से वृद्धि हुई।

USE IN ESSAY,POLLUTION ,CLIMATE CHANGE

16. अध्ययन: पीढ़ी-दर-पीढ़ी बढ़ रही है इंसान की उम्र

  • अध्ययन: पीढ़ी-दर-पीढ़ी बढ़ रही है इंसान की उम्र इंसान की उम्र पीढ़ी-दर-पीढ़ी बढ़ रही है। हर पीढ़ी की उम्र पिछली पीढ़ी से करीब तीन साल ज्यादा है। आगे भी ऐसा ही क्रम बने रहने की उम्मीद है। अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में हुए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है।

· इस तरह किया अध्ययन : शोधकर्ताओं ने पिछले 50 साल के आंकड़ों का अध्ययन किया। इसमें पाया गया कि जो लोग 65 साल की उम्र पार कर लेते हैं, उनकी उम्र प्राय: उनके माता-पिता से ज्यादा रहती है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर श्रीपद तुलजापुरकर ने कहा, ‘आंकड़े दिखाते हैं कि उम्र बढ़ रही है और इस क्रम में कोई बदलाव होता भी नहीं दिख रहा है। उम्र की कोई अधिकतम सीमा फिलहाल नहीं दिखाई दे रही है।

· उम्र की आखिरी सीमा की ओर बढ़ रहा है इंसान : पहले के कुछ अध्ययनों में कहा गया था कि इंसान उम्र की आखिरी सीमा की ओर बढ़ रहा है। हालांकि नए शोध में इस बात को खारिज किया गया है।

USE IN PAPER 1-SOCIETY,3-RESEARCH ,HDI

                                                                               EDITORIAL

1.रिश्तों में खतरनाक बेगानापन

  • दिल्ली से सटे गुरुग्राम में दीपिका नामक एक विवाहित महिला की मौत के सिलसिले में पुलिस की ओर से दी गई जानकारी केवल दंग करने वाली है, बल्कि यह भी बताती है कि पति-पत्नी के रिश्तों में कितना बेगानापन रहा है और लोग प्रेम और नफरत में एक-दूसरे की जान लेने में किस हद तक जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार, गुरुग्राम की वैली व्यू नामक सोसाइटी में शेफाली भसीन तिवारी अपने पति के साथ रहती थी। उसकी चार साल की एक बेटी है। वह दोबारा मां भी बनने वाली है। इस दंपति के सोसाइटी में दो फ्लैट थे। वर्ष 2015 में एक फ्लैट विक्रम चौहान को बेच दिया। इसी क्रम में शेफाली की जान-पहचान विक्रम से हुई। दोनों अपने बच्चों को स्कूल बस में छोड़ते वक्त मिलते रहते थे। धीरे-धीरे दोनों की बातचीत दोस्ती में बदल गई। विक्रम भी विवाहित था। उसकी पत्नी दीपिका एक बैंक में अफसर थी।

· नवंबर 2017 तक दोनों की दोस्ती गंभीर रिश्ते में तब्दील हो गई। दोनों चाहते थे कि वे एक-दूसरे के साथ रहें। शेफाली ने अपने पति को मना लिया कि वह उसे तलाक दे दे। वह राजी हो गया, मगर विक्रम की पत्नी दीपिका तलाक के लिए राजी नहीं थी। उसने अपने सास-ससुर को इस बारे में बताया। वे अपने बेटे को समझा रहे थे। इस बीच शेफाली और विक्रम दीपिका को मारने की योजना बना रहे थे। कुछ समय पहले शेफाली और विक्रम लेह और लद्दाख भी गए। वहां वे पति-पत्नी के रूप में रहे। शेफाली विक्रम पर दबाव डाल रही थी कि वह अपनी पत्नी से किसी भी तरह मुक्तिपाए। पुलिस ने विक्रम और शेफाली के मेल, वॉट्स एप आदि पर तमाम फोटो और सूचनाएं पाईं। पुलिस के अनुसार दोनों दीपिका को मारने की योजना बनाते रहते थे। एक मेल में शेफाली ने लिखा कि उसे छोड़ने का मतलब क्या है? या तो तुम उसे तलाक दो या मार दो, तभी वह तुम्हारी पत्नी नहीं रहेगी। पुलिस की मानें तो विक्रम दीपिका को नैनीताल भी ले गया था। वहां वह उसे मारना चाहता था, लेकिन मौका नहीं मिला। दोनों ने तब दीपिका को ऊपर से धक्का देकर मारने की सोची।

· इसी अक्टूबर में करवा चौथ के दिन विक्रम की पत्नी दीपिका सोसाइटी के आठवीं मंजिल के फ्लैट से नीचे गिरपड़ी और उसकी मौत हो गई। पुलिस ने इस बारे में जांच की और प्रमाण मिलने पर विक्रम चौहान और फिर शेफाली को दीपिका की हत्या के सिलसिले में गिरफ्तार किया। इसी तरह की एक घटना में गुजरात में सामने चुकी है। यहां शिल्पा नामक महिला ने हरेश नामक आदमी से कहा कि मेरे पति को मार दो, तभी मैं तुम्हारी हो सकती हूं। और हरेश ने उसके पति की हत्या कर दी। इसी तरह दिल्ली में एक मॉडल से शादी करने के चक्कर में एक पति ने अपनी स्कूल टीचर पत्नी की सुपारी देकर हत्या करा दी। आंध्र प्रदेश में एक महिला की दोस्ती फेसबुक पर एक आदमी से हो गई। वह अपने इस मित्र से शादी करना चहती थी। इसलिए उसने अपने पति की हत्या सुपारी देकर करा दी। ऐसी घटनाओं का एक और भी पहलू है। हाल में आगरा में एक आदमी ने पत्नी और सास से परेशान होकर आत्महत्या कर ली। मरने से पहले उसने सोलह पेज का सुसाइड नोट लिखा। उसने पत्नी, उसकी बहन और सास को सजा देने के लिए मोदी सरकार से कहा। यह भी कहा कि अगर इन्हें सजा नहीं मिली तो वह भूत बनकर इन्हें परेशान करेगा। विशेष नाम का यह शख्स अपने पिता के साथ नकली गहनों का व्यवसाय करता था। दो साल पहले उसकी शादी हुई थी। पत्नी अलग रहना चाहती थी। इसलिए दो महीने से अपने माता-पिता के साथ रह रही थी। पत्नी के इस तरह चले जाने से वह डिप्रेशन का शिकार हो गया और उसने जहर खा लिया। उसने अपने सुसाइड नोट में यह भी लिखा कि पत्नी, बहन और सास को ऐसी सजा मिले जिससे किसी के ससुराल वाले इस तरह से लड़कों को परेशान कर सकें। इस तरह के मामले आजकल अक्सर देखने में आने लगे हैं। देश भर में पत्नियों से परेशान पतियों की संख्या बढ़ रही है।

· पिछले दिनों मध्य प्रदेश में आठ सौ पतियों ने पत्नियों द्वारा उनके प्रति की गई घरेलू हिंसा की शिकायत की। ऐसे मामले अक्सर सुर्खियों में आते हैं, लेकिन मीडिया में इन पर ज्यादा बहस नहीं होती, क्योंकि समझा यह जाता है कि ये मामले लीक से हटकर होते हैं और महिलाएं आम तौर पर ऐसा नहीं करतीं। ऐसा लगता है कि इस तरह की घटनाओं को देखने का हमारा नजरिया पुराना ही बना हुआ है। अपराध के मामले में यह मान लेना कि स्त्रियां ऐसा नहीं कर सकतीं, सिर्फ पुरुष ही ऐसा करते हैं, ठीक नहीं है। नई तकनीक, स्त्रियों की शिक्षा, नौकरी आदि ने एक-दूसरे से मिलने-जुलने के अवसर खोले हैं। ऐसे में विवाह से इतर एक-दूसरे के प्रति आकर्षित होना कोई अजूबा नहीं है, मगर एक संबंध से दूसरे में जाने के लिए हत्या का सहारा लेना कहां तक जायज है? पुरुषों द्वारा किसी नए संबंध के लिए पत्नी की जान लेना उतना ही निंदनीय है जितना महिलाओं के लिए। कोई कह सकता है कि अब तक पुरुष महिलाओं के साथ ऐसा करते आए हैं। अब महिलाएं ऐसा कर रही हैं तो इसमें क्या गलत, लेकिन यदि महिलाएं भी वैसा ही करने लगें जैसा पुरुष करते आए हैं तो स्त्रियों और पुरुषों में अंतर क्या रहा? क्या वह पुरानी कहावत सही है कि हम जिन गलत आदतों से नफरत करते हैं उन्हें देखकर उनका ही शिकार बन जाते हैं।

  • अगर इसे बदलाव कहते हैं तो यह बदलाव स्त्रियों और पुरुषों और साथ ही समाज के लिए अच्छा नहीं है। रिश्तों में आया यह बेगानापन परेशान करता है। बात नहीं बन रही या कोई और पसंद गया तो अलग हुआ जा सकता है और संबंध को खत्म किया जा सकता है। यह चिंताजनक है कि इसके बजाय जान ली जा रही है। आखिर हत्या जैसे जघन्य अपराध के बाद यह कैसे सोचा जा रहा है कि हम बच निकलेंगे और अपनी पसंद के साथी के साथ जी सकेंगे?

2.सुशासन का पर्याय -गवर्नेस

  • सरकार टेक्नोलॉजी का उपयोग सभी लोगों तक सरकारी सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए कर रही है। चाहे जन्म प्रमाणपत्र लेना हो या बुढ़ापे की पेंशन या फिर छात्रवृत्ति। इसके तहत 300 से अधिक केंद्र और राज्य सरकार की सेवाओं को उमंग एप के माध्यम से एक ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लाया गया है तथा देश भर में तीन लाख से अधिक कॉमन सर्विस सेंटर्स से गांव-गांव ऑनलाइन सेवाएं दी जा रही हैं।
  • आज सुशासन के लिए -गवर्नेस को समय की जरूरत माना जा रहा है तथा वर्तमान सरकार इस सोच के साथ आगे बढ़ रही है। इसके लिए सूचना तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। इसका एक उदाहरण प्रत्यक्ष लाभ अंतरण या डीबीटी है जिसके माध्यम से लोगों के बैंक खातों में सीधे सब्सिडी हस्तांतरण की जाती है। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डीबीटी योजना का मुख्य स्तंभ आधार संख्या है। सरकार कई तरह की सब्सिडी जैसे स्वास्थ्य, पीडीएस, मनरेगा जैसी योजना पर सालाना लगभग 28 अरब डॉलर खर्च करती है। लेकिन भ्रष्टाचार के कारण योजनाओं का लाभ सही लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा था और सब्सिडी के बढ़ते बोझ के कारण राजस्व घाटा भी लगातार बढ़ता जा रहा था। एशियन डेवलपमेंट बैंक की रिपोर्ट के अनुसार खाद्य पदार्थ पर सरकार की सब्सिडी के बावजूद गरीबी के स्तर में व्यापक पैमाने पर कमी नहीं आई और इसका 70 फीसद लाभ गैर-गरीबों को मिला। लेकिन अब डीबीटी से योजनाओं में भ्रष्टाचार पर रोक लगाने में काफी मदद मिल रही है तथा लोगों के खाते में सीधे पैसा जाने से केवल नौकरशाही का दखल कम हुआ है, बल्कि मध्यस्थों की भूमिका भी खत्म हो रही है।
  • पहले कई मामलों में सरकारी मदद और सब्सिडी, पेंशन आदि का पैसा अपात्रों के हाथों में चला जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। डीबीटी योजना के बाद से केंद्र सरकार द्वारा भेजा गया पैसा सीधे जरूरतमंद के हाथों में पहुंचने लगा है। आधारसे जुड़ी इस योजना के जरिये मार्च, 2018 तक केंद्र सरकार को 90 हजार करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई है।
  • यूपीए सरकार द्वारा शुरू की गई महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के जरिये वर्तमान सरकार को सब्सिडी मद में सबसे ज्यादा बचत हो रही है। मोदी सरकार ने आधार और डीबीटी के इस्तेमाल के जरिये इस योजना के एक करोड़ फर्जी लाभार्थियों को हटाकर इसे बेहतर बनाया है। खाद्य सब्सिडी में सालाना 17 हजार करोड़ रुपये की चोरी रुक गई है। आधार से जोड़ने के बाद देश भर में कुल तीन करोड़ फर्जी और नकली राशन कार्ड रद्द किए जा चुके हैं।
  • अब सरकार सेवाओं के डिजिटल स्वरूप को अगले चरण में ले जाने को तैयार है। सरकार का इरादा अगले तीन सालों में 1,200 सेवाओं को मोबाइल एप के माध्यम से उपलब्ध कराने का है। स्मार्टफोन ने मोबाइल एप को लोकप्रिय बना दिया है। मोबाइल एप स्टोर इस दिशा में एक बड़ी पहल है। भारत के लिए मोबाइल एप्स के जरिये गवर्नेस का रास्ता इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि मोबाइल हैंडसेट अकेला ऐसा माध्यम है जिससे देश की आबादी के एक बड़े हिस्से तक पहुंचा जा सकता है। यह अकेला ऐसा माध्यम है जो शहरों और कस्बों की सीमा लांघता हुआ तेजी से दूरदराज के गांवों तक पहुंच गया है। मोबाइल पर इंटरनेट सुविधा हासिल करने वालों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है। एक अनुमान के मुताबिक 2019 के अंत तक भारत में स्मार्टफोन इस्तेमाल करनेवाले उपभोक्ताओं की संख्या लगभग 65 करोड़ हो जाएगी।
  • शुरुआत में मोबाइल का उपयोग केवल संचार के माध्यम के रूप में किया जाता था, लेकिन अब शासन के तरीकों में परिवर्तन लाने के लिए मोबाइल को एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में देखा जा रहा है। सरकारी एजेंसियों द्वारा आज इसका उपयोग केवल लोगों तक महत्वपूर्ण जानकारी पहुंचाने के लिए किया जा रहा है, बल्कि उन्हें कभी भी कहीं भीसरकारी सेवाएं उपलब्ध कराए जाने के उद्देश्य से भी किया जा रहा है। आज मोबाइल के माध्यम से लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग, बिजनेस, शिकायत करने से संबंधित सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही है। पहले इन सेवाओं को पाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे। उम्मीद की जा रही है कि सरकारी विभागों के एप्स से नौकरशाही की बाधाओं से भी लोगों को मुक्ति दिलाई जा सकेगी तथा जो .-गवर्नेस की सोच एक हद तक पहुंच कर रुक गई थी वह मोबाइल गवर्नेस से आगे बढ़ेगी.

3.प्रदूषण से हांफता बचपन

  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने संकेत दिए हैं कि दिल्ली की आबोहवा में जहरीले तत्व इतने अधिक मात्र में घुल चुके हैं कि यहां करीब आधे बच्चे अस्थमा की चपेट में हैं। बोर्ड के अनुसार वाहनों से निकलने वाले धुएं में मौजूद जहरीले कणों का सालाना स्तर 60 माइकोग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए। लेकिन बोर्ड की पड़ताल बताती है कि दिल्ली में यह स्तर 149 माइकोग्राम तक है।एक अन्य अध्ययन बताती है कि भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे देशों के लोगों के फेफड़ों की क्षमता उत्तरी अमेरिका और यूरोपीय लोगों की तुलना में 31.3 फीसद कमजोर है।
  • यह सही है कि हवा में घुलते जहर का असर फेफड़ों पर के अलावा त्वचा, आंख और याददाश्त पर भी पड़ता है। बच्चों का शरीर चूंकि विकास की प्रक्रिया में होता है इसलिए प्रदूषण के सबसे अधिक शिकार भी बच्चे ही होते हैं।विश्व स्वास्थ संगठन की रिपोर्ट खुलासा करती है कि आज 98 फीसद पांच साल से कम उम्र के बच्चे देश में भयावह प्रदूषकों से प्रभावित हैं।
  • दरअसल इस हांफते बचपन के लिए हमारी आरामतलब विलासित जीवन शैली भी बहुत हद तक जिम्मेदार है। वर्तमान बाजार में सस्ते कर्ज की उपलब्धता ने दोपहिया और चार पहिया वाहनों के क्रय करने की क्षमता को गति दी है। इससे मध्यम और निम्न मध्यम वर्ग के बीच इन वाहनों के क्रय करने की जबरदस्त होड़ बढ़ी है।

  • कहते हैं स्वस्थ शरीर में स्वस्थ दिमाग निवास करता है। इसलिए बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए यह माता-पिता की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को रोजाना योग व्यायाम में शामिल कराएं। आज अधिकांश बच्चे सोशल मीड़िया की पकड़ में हैं। उन्हें उसकी लत से बाहर निकालकर खुले में खेलने मैदान में दौड़ने की आदत विकसित करनी पड़ेगी। पहले हमारे परंपरागत खेल कबड्डी गुल्ली-डंडा इत्यादि खेल प्रचलन में थे। इससे बच्चों का शरीर स्वस्थ रहता था। फेफड़े भी सही काम करते थे। कहना होगा कि वर्तमान की तोता रटंत अंग्रेजी शिक्षा ने बच्चों पर भारी बस्तों होमवर्क के बोझ के साथ-साथ बच्चों के साथ माता-पिता की संलग्नता को भी बढ़ाया है। स्थिति यहां तक गई है कि आज बच्चे नींद में सुनहरे स्वप्न देखने की बजाय रात को होमवर्क से जुड़े काम को लेकर ही बुदबुदाते पाए जाते हैं। अगर आज थोड़ा बहुत समय बच्चों पर है भी तो इसमें वे या तो मोबाइल पर डटे रहते हैं अथवा स्कूटी और बाइक पर। उनका पैदल अथवा साइकिल से चलना यह खुद अथवा परिवार की शानो-शौकत के खिलाफ माना जाने लगा है। यही वजह है कि बच्चों के सड़क पर पैदल की तुलना में त्वरित गति के वाहनों से चलने के कारण फेफड़े सिकुड़ रहे हैं और उनमें सांस संबधी बीमारियां तेजी से पैर पसार रहीं हैं। यह सच है कि बच्चों के स्वस्थ रहे बिना देश में स्वस्थ भविष्य की कल्पना नहीं की जा सकती। देखने में रहा है परिवार स्कूल जैसी बच्चों को सिखाने की प्राथमिक संस्थाओं का बच्चों से संवाद भी निरंतर घट रहा है। इसलिए इन संस्थाओं की जिम्मेदारी बनती है कि वे बच्चों से सघन संवाद करके और उनसे जीवन से जुड़े स्वास्थ्य पर्यावरण के मुद्दों से उन्हें रूबरू कराएं।
  • बढ़ते प्रदूषण के मुद्दे पर जहां सरकार को इसकी चिंता करनी है, वहीं यह नागरिक समाज का भी दायित्व बनता है कि वह भी अपनी विलासी जीवनशैली में बदलाव लाएं।

4.मानव विकास पर असर डालती आय समानता

  • स्थिर आय वितरण के संदर्भ में ही भारत के मानव विकास को समझा जा सकता है। वर्ष 2017 के एचडीआई सूचकांक में शामिल 188 देशों में से भारत की रैंकिंग 130 है जबकि 2015 में यह 131वें स्थान पर था। इस तरह भारत की एचडीआई रैंकिंग में बहुत मामूली सुधार हुआ है। भारत का एचडीआई सूचकांक 0.63 से बढ़कर 0.64 हो गया, जन्म के समय जीवन प्रत्याशा 68.3 वर्ष से बढ़कर 68.8 वर्ष हो गई, स्कूली शिक्षा में बिताए जाने वाले औसत वर्ष 6.3 से बढ़कर 6.4 हो गए और प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय उत्पाद (जीएनपी) 5691 से बढ़कर 6363 डॉलर हो गया।
  • सीएचआई से मापी जाने वाली असमानता का एचडीआई में समावेश किया जा सकता है। इस तरह एक समग्र असमानता समायोजित एचडीआई (आईएचडीआई) मिलती है। साफ है कि असमानता जब तक रहेगी वह एचडीआई को खराब करती रहेगी। इसका मतलब है कि आईएचडीआई का स्तर एचडीआई से कम होगा। दोनों की तुलना से यह नुकसान परिलक्षित होता है। एचडीआई और आईएचडीआई के बीच प्रतिशत नुकसान भारत (दक्षिण अफ्रीका को छोड़कर) के लिए सबसे अधिक है। उससे पता चलता है कि अन्य देशों की तुलना में भारत के मानव विकास पर असमानता का निराशाजनक असर जारी है।

  • संयुक्त राष्ट्र की बहुआयामी गरीबी (एमडीपी) अवधारणा के हिसाब से देशों के बीच तुलनात्मक गरीबी अधिक स्पष्टता से नजर आती है। इस अवधारणा में वंचना के स्तर को भी ऊपर वर्णित मानदंडों में जोड़ा जाता है। मसलन, अगर किसी परिवार के 10 साल या उससे अधिक उम्र के किसी भी सदस्य ने पांच वर्षों की स्कूली शिक्षा पूरी की हो तो उस परिवार को स्कूली शिक्षा से वंचित माना जाएगा। यूनेस्को की वर्ष 2017-18 रिपोर्ट में अकायर और कणगरत्नम ने कहा है कि स्कूल में उपस्थिति, बाल मृत्यु दर, पोषण, स्वच्छता, बिजली, पेयजल, फर्श वाला मकान, खाना पकाने का ईंधन और संपत्ति स्वामित्व के बिंदु वंचना स्तर को निर्धारित करते हैं। अगर कुल आबादी की 33 फीसदी संख्या वंचित है तो उसे बहुआयामी गरीबी कहते हैं जबकि 50 फीसदी आबादी के गरीब होने पर उसे गंभीर एमडीपी कहते हैं।

  • तीसरी सारिणी से पता चलता है कि भारत की 27.5 फीसदी आबादी एमडीपी के दायरे में है जबकि 8.6 फीसदी आबादी गंभीर एमडीपी की श्रेणी में है। ब्राजील, चीन और दक्षिण अफ्रीका में ये आंकड़े काफी कम हैं। हालांकि भारत ने पिछले दो दशकों में गरीबी और अतिशय गरीबी को कम करने में बड़ी कामयाबी हासिल की है लेकिन संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य 2030 के तहत किसी को भी अतिशय गरीब की श्रेणी में नहीं छोडऩे का मकसद हासिल करने के लिए भारत को तेजी दिखानी होगी।

  • बीबीसी ने आधुनिक समय की गुलामी पर अक्टूबर में प्रसारित अपनी सीरीज में भारत पर एक घंटे की कवरेज की थी। उसमें दिखाया गया था कि भारत के हजारों छोटे बच्चों-बच्चियों को उनके मां-बाप से दूर देश के दूसरे हिस्सों में ले जाया जाता है। उनके मां-बाप यह कहते नजर आए कि उनके पास अपने बच्चों की तलाश के लिए जरूरी पैसे नहीं हैं। जहां पर बच्चे अपने मां-बाप के साथ रहते हैं वहां पर भी हालात खतरनाक हैं। अपनी तीन साल की बेटी को अभ्रक जमा करने के लिए खदान में भेजने वाली एक मां कहती है कि उसके परिवार को कर्ज की भरपाई के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।

  • इस बायोस्कोप को पूरी दुनिया ने देखा था। पिछले महीने इस समाचारपत्र के अंग्रेजी संस्करण में संपादक के नाम प्रकाशित एक पत्र में भारत की बढ़ती आय असमानता को लेकर गहरी चिंता जताई गई थी। उसमें कहा गया था, 'आखिर आय समानता लाने में और कितने दशक लगेंगे? यह पीपीपी के मामले में भारत के दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने या भारत के दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होने जैसे सवालों से कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण है।'

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