आतंक का सामना Fighting terror

 

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग और शोपियां जिलों में सुरक्षा बलों के ताजा अभियान में तेरह आतंकवादियों के मारे जाने की घटना निश्चित रूप से एक बड़ी कामयाबी है। लेकिन इस दौरान तीन जवानों सहित चार नागरिकों की जान चली गई और यह देश के लिए बड़ा नुकसान है। इसके बावजूद यह कहा जा सकता है कि आतंकवाद से पीड़ित इस राज्य में सुरक्षा बलों को आतंकवादियों का सामना करने के मामले में कामयाबी की दर बढ़ रही है। (#GSHINDI #THECOREIAS)

पिछले कई दशक से आतंकवाद पर काबू पाने के मकसद से की जा रही तमाम कवायदों के बावजूद आज भी कई बार आतंकी गिरोह सुरक्षा बलों पर हमले कर अपनी मौजूदगी का अहसास कराते रहते हैं। लेकिन यह भी सच है कि पिछले कुछ समय से खुफिया सूचनाओं के लेन-देन के मोर्चे पर अलग-अलग सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल बेहतर हुआ है और इसमें स्थानीय आबादी को भी सहयोग की भूमिका में लाने की कोशिश की गई है। इसका हासिल यह है कि आतंकवादियों के अचानक हमलों से निपटने के लिए की जाने वाली पूर्व तैयारी या रणनीति बनाने में काफी मदद मिली है। इस लिहाज से देखें तो अनंतनाग और शोपियां में एक साथ बहुस्तरीय अभियान में एक दर्जन से ज्यादा आतंकियों को मार गिराने की घटना महत्त्वपूर्ण है। निश्चित तौर पर इससे हिज्बुल मुजाहिदीन और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकवादी संगठनों को करारा झटका लगा है, जो पाकिस्तान की शह पाकर भारत में आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देते रहते हैं। विडंबना यह भी है कि भारत की ओर से लगातार चेतावनी और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तमाम फजीहत के बावजूद पाकिस्तान लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई करने की जहमत नहीं उठाता।
 

What was special in this mission (Can be used in case study and in Internal Security)

इस अभियान की एक अहम उपलब्धि यह रही कि दायलगाम मुठभेड़ के दौरान एक वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने एक आतंकी के परिजनों से काफी देर बातचीत के बाद उसे आत्मसर्पण के लिए राजी कर लिया। ऐसे उदाहरण कम मिलते हैं, जिनमें आतंकियों का सामना करते हुए ऐसी समझदारी का परिचय दिया गया हो। निश्चित रूप से इसे एक जटिल समस्या के ठोस हल की ओर बढ़ते कदम के रूप में देखा जा सकता है, जिसके तहत आतंकवाद के जाल में उलझे लोगों को यथार्थ का अहसास करा कर उन्हें मुख्यधारा की ओर लौटने के लिए तैयार किया जा सके। ताजा अभियान में तेरह आतंकियों के मारे जाने के बाद जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक ने कहा कि नौजवानों को इस तरह मरते देखना दुखद है और मैं सभी माता-पिता से अपील करता हूं कि वे अपने बच्चों से हिंसा छोड़ कर देश की मुख्यधारा में शामिल होने का अनुरोध करें। हालांकि पिछले कुछ समय से जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की ओर आकर्षित हो रहे युवाओं या उनके परिजनों से संवाद कायम कर उन्हें आतंक के रास्ते से वापस लाने की कवायदें भी साथ चल रही हैं। इनमें कुछ मामलों में परिजनों की अपील के बाद आतंकी दस्तों से कुछ युवाओं को वापस लाने में सफलता भी मिली है। जाहिर है, सुरक्षा बलों की चौकसी और अभियानों के साथ-साथ स्थानीय आबादी को विश्वास में लेने की रणनीति आतंकवाद की समस्या के दीर्घकालिक हल का रास्ता तैयार कर सकती है।

READ MORE @GSHINDI आतंक को पनाह देने वाले देशों की जवाबदेही तय हो

#JANSATTA

Download this article as PDF by sharing it

Thanks for sharing, PDF file ready to download now

Sorry, in order to download PDF, you need to share it

Share Download