वक्त की मांग है पुरुष आयोग का गठन
पिछले साल मी टू अभियान का बहुत शोर हुआ था। उस दौरान महिलाओं का एक वर्ग कह रहा था कि अच्छा है कि औरतें अपने प्रति हुए यौन अपराधों की बातें कह रही हैं। बात सच भी थी, क्योंकि औरतों को अपने प्रति हुए इस तरह के अपराधों को छिपाने की सलाह कोई और नहीं उनके परिवार वाले ही… Read More
शिक्षा नीति
तीन दशक बाद शिक्षा नीति को बदलने की कवायद शुरू हुई है। पिछली बार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 में तय हो पाई थी, जिसे कुछ फेरबदल के बाद 1992 में उसे लागू किया गया था। एनडीए सरकार ने 2014 में सत्तारूढ़ होने के बाद पूर्व कैबिनेट सचिव टीएसआर सुब्रहमण्यम की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन करके… Read More
भारत की जनसंख्या
देश-दुनिया की तमाम सरकारों और नीति-निर्माताओं के लिए आज यह याद करने का दिन है कि जनसंख्या और उससे जुड़े मसलों का हल उनकी विकास-नीतियों के मूल में होना चाहिए। भारतीय संदर्भ में देखें, तो 1920 के दशक तक हमारे हिस्से में अत्यधिक जन्म-दर और मृत्यु-दर रही है, पर उसके बाद से इसमें… Read More
सबसे जरूरी है लोगों के पोषण में निवेश करना
विगत दशक के दौरान पोषण ने फिर सबका ध्यान खींचा है और यह राजनीतिक विमर्श का विषय बन गया है। पिछले दो वर्षों में हम नीति-निर्माण के सर्वोच्च स्तर पर पोषण के प्रति प्रतिबद्धता के गवाह रहे हैं। पोषण अभियान इस दिशा में बिल्कुल सामयिक पहल है। इस कार्यक्रम के… Read More
क्रिप्टोकरेंसी पर पूर्ण प्रतिबंध कितना मुमकिन!
विश्व में कई सरकारें क्रिप्टोकरेंसी को प्रतिबंधित करने पर विचार कर रही हैं लेकिन उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र की क्षमताओं का उपयोग करने के लिए नियमन कारगर साबित होगा
दिग्गज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक ने मंगलवार को घोषणा की… Read More
जब राजेंद्र बाबू को लगा था कि देश प्रेम और घर प्रेम में घर का वजन ज्यादा भारी पड़ रहा है
सन 1910 का किस्सा है. राजेंद्र बाबू तब कलकत्ता में वकालत पढ़ रहे थे. यहां एक दिन उन्हें उस दौर के प्रसिद्ध बैरिस्टर श्री परमेश्वर लाल ने बुलाया था. वे कुछ समय पहले ही गोखलेजी से मिले थे. बातचीत में गोखलेजी ने… Read More
हमें बुद्ध बनना चाहिए या बौद्ध?
आज वैशाख महीने की पूर्णिमा है. मान्यता है कि आज ही के दिन मां महामाया के गर्भ से शाक्यमुनि राजकुमार गौतम का जन्म हुआ था. यह भी संयोग माना जाता है कि इसके ठीक 35 वर्ष बाद इसी तिथि को उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ और इस तरह बुद्ध के रूप में उनका दूसरा जन्म हुआ. और एक और… Read More
हर पिता के भीतर एक नेहरू हो सकते हैं और हर बेटी में एक इंदिरा, बशर्ते कि वे आपस में दोस्त हों
14 नवंबर, 1969 को अपने पिता के 80वें जन्मदिन पर किसी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में इंदिरा ने कहा था- ‘जवाहरलाल नेहरू को मैं एक पिता और एक नेता के साथ-साथ एक दोस्त के रूप में भी जानती थी.’ किसी भी… Read More
