- भारत 2015 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) हासिल करने में चीन को पछाड़ कर शीर्ष स्थान पर
- भारत ने वर्ष 2015-16 में 63 अरब डॉलर मूल्य की 697 एफडीआई परियोजनाएं हासिल कीं, जो 2014-15 के एफडीआई के मुकाबले 55 फीसदी ज्यादा है।
- इसमें 98 फीसदी एफडीआई ऑटोमैटिक रूट से आया, यानी इसके लिए विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड की मंजूरी नहीं लेनी पड़ी।
- एफडीआई में सबसे उल्लेखनीय अक्षय ऊर्जा क्षेत्र रहा, जिसमें करीब 11.8 अरब डॉलर का निवेश भारत आया।
- एफडीआई परियोजनाओं के हिसाब से भारत ने आठ फीसदी की वृद्धि हासिल की।
- शीर्ष छह देश
1. भारत : 63 अरब डॉलर
2. अमेरिका : 59.6 अरब डॉलर
3. चीन : 56.6 अरब डॉलर
4. इंडोनेशिया : 38.5 अरब डॉलर
5. मैक्सिको : 24.3 अरब डॉलर
6. ब्राजील : 17.3 अरब डॉलर
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश
सामान्य शब्दों में किसी एक देश की कंपनी का दूसरे देश में किया गया निवेश प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी एफडीआई कहलाता है। ऐसे निवेश से निवेशकों को दूसरे देश की उस कंपनी के प्रबंधन में कुछ हिस्सा हासिल हो जाता है जिसमें उसका पैसा लगता है
एफडीआई के फायदे
- निवेशक को यह नए बाजार में प्रवेश करने और मुनाफा कमाने का मौका देता है। विदेशी निवेशकों को टैक्स छूट, आसान नियमों, लोन पर कम ब्याज दरों आकर्षित करती है ।
- घरेलू अर्थव्यवस्था में नई पूंजी, नई प्रौद्योगिकी आती है और रोजगार के मौके बढ़ते हैं
- यह नई तकनीकी और उन्नत व विकसित कार्पोरेट practices घरेलू बाज़ार में लाता है
एफडीआई और एफआईआई निवेश में अंतर
एफडीआई में किसी विदेशी कंपनी द्वारा देश में प्रत्यक्ष निवेश होता है जबकि एफआईआई यानी विदेशी संस्थागत निवेशक शेयरों, म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं। एफआईआई पार्टिसिपेटरी नोट, सरकारी प्रतिभूतियों, कमर्शियल पेपर वगैरह को निवेश माध्यम बनाते हैं। ज्यादातर एफडीआई की प्रकृति स्थायी होती है लेकिन बाजार में उथल-पुथल की स्थिति बनने पर एफआईआई जल्दी से बिकवाली कर निकल जाते हैं।