केंद्र सरकार ने रिलायंस को डेढ़ अरब डॉलर के जुर्माने का नोटिस भेजा

संदर्भ:- ओएनजीसी ने आरोप लगाया था कि रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) ने उसके गैस ब्लॉक से 11.12 अरब क्यूबिक मीटर गैस निकाल ली

- कृष्णा-गोदावरी बेसिन में ओएनजीसी के ब्लॉक से गैस चोरी के मामले में केंद्र ने रुख सख्त कर लिया है. रॉयटर्स के मुताबिक शुक्रवार को पेट्रोलियम मंत्रालय ने रिलायंस इंडस्ट्रीज और उसके विदेशी साझेदारों (ब्रिटिश पेट्रोलियम और निको रिसोर्स) को 1.55 अरब डॉलर के जुर्माने का नोटिस जारी किया है.

★यह मामला कृष्णा गोदावरी यानी केजी बेसिन में एक दूसरे से लगते इन कंपनियों के दो गैस ब्लॉकों से जुड़ा हुआ है. ओएनजीसी ने पहली बार जुलाई 2013 में यह मामला उठाया था. 
★उसका आरोप था कि रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने अवैध तरीके से उसकी गैस निकाल ली. ओएनजीसी के मुताबिक रिलायंस ने जानबूझकर दोनों ब्लॉकों की साझा सीमा पर ड्रिलिंग की जिसके चलते उसके गैस ब्लॉक से 11.12 अरब क्यूबिक मीटर गैस आरआईएल के ब्लॉक में चली गई जिसकी कीमत करीब 30 हजार करोड़ रु बैठती है. उसने डीजीएच को चिट्ठी लिखकर इस बारे में स्पष्ट सबूत होने की बात भी कही थी. रिलायंस ने शुरुआत में इस आरोप को मानने से इंकार कर दिया था.

★सरकार ने इसकी जांच के लिए दिल्ली हाईकोर्ट के रिटायर चीफ जस्टिस एपी शाह की अध्यक्षता में एक समिति बनाई थी. इसने बीते अक्टूबर की शुरुआत में अपनी रिपोर्ट दी थी. 
★समिति ने इस मामले में चर्चित अंतर्राष्ट्रीय सलाहकार फर्म डिगॉलियर एंड मैकनॉटन (डीएंडएम) की रिपोर्ट के निष्कर्षों को सही ठहराया था. 
★इन निष्कर्षों में भी ओएनजीसी के ब्लॉक से 11.12 अरब क्यूबिक मीटर गैस आरआईएल के ब्लॉक में जाने की बात कही गई थी. इस गैस की निकासी एक अप्रैल 2009 से लेकर 31 मार्च 2015 के बीच हुई थी. डीएंडएम ने यह रिपोर्ट दिसंबर 2015 में पेट्रोलियम मंत्रालय के तहत आने वाले हाइड्रोकॉर्बंस महानिदेशालय (डीजीएच) को दी थी.

★हाइड्रोकॉर्बन महानिदेशालय (डीजीएच) ने पिछले महीने जुर्माने पर अपनी सिफारिशें मंत्रालय को सौंपी थीं.  डीजीएच ने जुर्माने का आकलन करते समय रिलायंस के पूंजी और संचालन खर्च को ध्यान रखा है. 
★शाह समिति ने कहा था कि जुर्माना कितना हो, यह फैसला सरकार को करना चाहिए, जिसका सिद्धांत है कि इस गैस निकासी से रिलायंस को जितना लाभ हुआ है, वह केंद्र सरकार को वापस मिले. ओएनजीसी का कहना था कि रिलायंस द्वारा निकाली गई गैस की बाजार कीमत के आधार पर जुर्माना तय होना चाहिए. उधर, रिलायंस की दलील थी कि उसे गैस की कीमत में से पूंजी और संचालन खर्च पाने का हक है.

 

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