- स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क रहता है। अगर हमारे युवा मानव संसाधन रुग्ण रहेंगे, कुपोषित रहेंगे, तो दुनिया की अपेक्षाओं पर कैसे खरे उतरेंगे। आज हर परिवार अपनी बचत का एक बड़ा हिस्सा इन गैरजरूरी बीमारियों के इलाज पर खर्च कर देता है। मानसिक और शारीरिक श्रम और परिवार को होने वाली व्यथा का… Read More
- देश में बुजुर्ग व्यक्तियों की संख्या 10 करोड़ हैं। 2030 तक इसके बढ़कर 20 करोड़ होने की संभावना है। मेडिकल साइंस में प्रगति और दवाइयों तक आसानी से उपलब्धता के चलते यह संख्या वक्त गुजरने के साथ बढ़ेगी। हालांकि इसके बावजूद यह नहीं कहा जा सकता कि हमारे देश के वृद्ध स्वस्थ जीवन भी गुजार रहे हैं।
- कई… Read More
~ मानव विकास के इतिहास में महिलाएं पुरुषों जितना ही आवश्यक रही हैं। वास्तव में किसी समाज में महिलाओं की हैसियत, रोजगार और किया जाने वाला काम देश के समग्र विकास के सूचकांक होते हैं।
- राष्ट्रीय गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी के बिना किसी भी राष्ट्र की सामाजिक, आर्थिक या राजनीतिक विकास ठहर जाता… Read More
- किसी ने सच ही कहा है कि जिस तरह पौधरोपण के सही तरीकों द्वारा पादपों को आकार दिया जाता है उसी तरह से इंसान को सही आकार देने का उचित और एकमात्र माध्यम शिक्षा है। किसी भी देश की तरक्की के विभिन्न चरणों में मानव संसाधनों के विकास और उसके सशक्तिकरण में शिक्षा का अहम स्थान है।
- किसी भी शिक्षा प्रणाली… Read More
=> संस्कृति
- जिस देश, संस्कृति और समाज में नारी को शक्ति, ऊर्जा और देवी का रूप माना जाता हो, वहां उसके सशक्तीकरण की बात करना बड़े विरोधाभास से कम नहीं है? यह आज की हकीकत है।
- 'यत्र नार्यस्तु पूज्यते, रमंते तत्र देवता' सूक्ति सबकी जुबान पर है लेकिन क्या इसे अपने मन, कर्म और वचन में हम आत्मसात… Read More
- पिछले दशक में देश में आर्थिक वृद्धि और रोजगार के बीच सीधा संबंध नहीं देखा गया है। देश में तेज आर्थिक वृद्धि तो हुई लेकिन इसके मुकाबले उच्च रोजगार सृजन नहीं हो पाया।
- श्रम मंत्रालय द्वारा इस संबंध में तैयार किए गए एक नोट के मुताबिक पिछले दशक में आर्थिक वृद्धि की वार्षिक दर आठ प्रतिशत रही लेकिन… Read More
