CURRENT AFFAIRS 20 November 2018

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1.गवाह संरक्षण योजना के अमल को तैयार सुप्रीम कोर्ट

  • शीर्ष न्यायालय ने सोमवार को कहा कि वह जल्द ही राज्यों को गवाह संरक्षण योजना का मसौदा लागू करने का निर्देश देगा। बता दें कि केंद्र ने राष्ट्रीय न्यायिक सेवाएं प्राधिकरण के साथ विचार-विमर्श के बाद इसे तैयार किया है।
  • इस योजना में धमकी और खतरे के अनुमान के आधार पर गवाहों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। राज्यों को शीघ्र ही इस पर अमल शुरू कर देना चाहिए। केंद्र ने इस साल अप्रैल में कोर्ट को सूचित किया था कि उसने गवाह संरक्षण योजना का मसौदा तैयार किया था और इस पर राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों से विचार मांगे गए हैं।पिछले साल नवंबर में कोर्ट ने सरकार से जानना चाहा था कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी कानून में स्पष्ट प्रावधान के बावजूद देश में अभी तक गवाहों की सुरक्षा के लिए किसी योजना का मसौदा क्यों नहीं तैयार किया गया? कोर्ट का कहना था कि कम से कम संवेदनशील मामलों के गवाहों के लिए गवाह संरक्षण योजना लागू की जा सकती है और इस संबंध में गृह मंत्रलय विस्तृत योजना तैयार कर सकता है।

USE IN PAPER 2-JUDICIAL SYSTEM,SOCIAL JUSTICE

2. सीएसई को मिलेगा इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार

  • पर्यावरण शिक्षा एवं संरक्षण के क्षेत्र में विशेष योगदान के लिए इस साल का इंदिरा गांधी शांति, निरस्त्रीकरण एवं विकास पुरस्कार नई दिल्ली की संस्था सेंटर फार साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) को दिया जाएगा।यह सम्मान जलवायु परिवर्तन, असमान विकास व पर्यावरणीय गिरावट के कारण आने वाले खतरों को मान्यता भी प्रदान करता है।

PRELIMINARY

3. चीन की सीमा पर सड़कों और इमारतों का जाल बिछाने की तैयारी में भारत

  • चीन की चाल पर नजर रखने के लिए भारत उससे लगती सीमाओं पर सड़कों और सामरिक भवनों का जाल बिछाएगा। अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में 25 हजार करोड़ रुपये की लागत से चीन से लगी सीमाओं पर सामरिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण 19 सड़कों और 29 एकीकृत भवनों का निर्माण कराया जाएगा। गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचएलईसी) ने इस पर मुहर लगाई है। अब इसे जल्द ही सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीएस) के सामने रखा जाएगा।

USE IN PAPER 2-IR ,INTERNAL SECURITY

4. ओबीसी की पिछड़ी जातियों के वर्गीकरण में लगेगा और वक्त

  • आरक्षण के बाद भी इसके लाभ से वंचित ओबीसी की पिछड़ी जातियों को आगे बढ़ाने की सरकार की मंशा में थोड़ा और वक्त लगेगा। संभव है कि यह मामला अब नई सरकार के कार्यकाल तक खिंचेगा। ऐसी आशंका इसलिए भी है क्योंकि इसके उप-वर्गीकरण को लेकर गठित आयोग ने इस काम को पूरा करने के लिए 30 मई, 2019 तक के विस्तार की मांग की है। हालांकि सरकार ने अभी स्वीकृति नहीं दी है, लेकिन आयोग के 30 नवंबर को खत्म हो रहे मौजूदा कार्यकाल को देखते हुए जल्द ही कोई फैसला लेना होगा।
  • मालूम हो कि आरक्षण के बाद भी विकास की दौड़ में ओबीसी की पिछड़ी रह गई जातियों का पता लगाने और उनका वर्गीकरण तैयार करने को लेकर सरकार ने अगस्त 2017 में इस आयोग का गठन किया था।

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5. जनता के 450 सुझावों को घोषणा पत्रों में मिली जगह

             USE IN DEMOCRACY

6. 62 करोड़ के फर्जी बिल बनाकर 11 करोड़ रुपये का क्रेडिट लिया

  • हरियाणा के रोहतक जिले में कागजों में संचालित ओम इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी का बड़ा फर्जीवाड़ा पकड़ में आया है। माल सेवा कर (जीएसटी) आयुक्त कार्यालय को शिकायत मिली कि शहर की जनता कॉलोनी सिविल लाइन कॉलोनी से ही नौ से अधिक राज्यों में करोड़ों का कारोबार किया जा रहा है। इनमें तेलंगाना, हैदराबाद, उत्तर प्रदेश के आगरा, लखनऊ, हरियाणा के भिवानी, रोहतक, जींद, राजस्थान के जयपुर, गुजरात, मध्य प्रदेश के इंदौर, दिल्ली, महाराष्ट्र शामिल हैं। संबंधित राज्यों के जीएसटी आयुक्तों को पत्र भेजकर सहयोग मांगा है
  • जांच में पता चला कि अक्टूबर 2017 से मई 2018 तक विभिन्न राज्यों में 62 करोड़ के करीब 1000 फर्जी बिल बनाए गए है। 18 फीसद के हिसाब से करीब 11 करोड़ का इनपुट क्रेडिट(आइटीसी) वसूला गया है, जबकि न कोई माल खरीदा और न ही बेचा गया। माल भी तैयार नहीं हुआ। कागजों में कंपनी के कार्यालय व गोदाम का जो पता दिया गया, वहां कंपनी के डायरेक्टर के घर मिले।

USE IN PAPER 2-GOVERNANCE,GST IMPLEMENTATION

7. देश के पहले टॉयलेट ब्यूटी कांटेस्ट में पांच इज्जतघर बने नजीर

  • विश्व शौचालय दिवस पर देश में पहली बार टॉयलेट ब्यूटी कांटेस्ट का आयोजन कर झुमके और सुर्मे वाली बरेली ने नया इतिहास रच दिया। जब प्रतियोगिता के पांच सर्वश्रेष्ठ इज्जतघर की घोषणा की तो उनके लाभार्थी फूले नहीं समाए। गाजे बाजे के साथ अफसरों ने उनको सम्मानित किया। इन स्वर्णिम पलों का गवाह बना भोजीपुरा ब्लॉक का सागलपुर गांव। अधिकारियों का दावा है कि विजेताओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों भी सम्मानित करने का प्रयास किया जाएगा।

USE IN PAPER 1-SOCIETY 4-ATTITUDE,CASE STUDIES

8. सतलुज के पानी को तसरेगा पाकिस्तान खुशहाल होंगे पंजाब के किसान

  • 1927 में बना था हेडवर्क्‍स
  • राजस्थान की धरती की प्यास बुझाने के लिए बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह ने 1927 में हुसैनीवाला हेडवर्क्‍स से गंग नहर का निर्माण करवाया था। इसे श्रीगंगानगर की जीवन रेखा भी कहा जाता है। हालांकि वर्तमान समय में यह नहर उपेक्षित है। इसका कारण पर्याप्त मात्र में हेडवर्क्‍स से पानी का न मिल पाना बताया जा रहा है। इससे इस नहर की मरम्मत का काम भलीभांति नहीं हो पाया। गंग नहर के साथ ही यहीं से इस्टर्न नहर भी निकलती है जो पंजाब के विभिन्न हिस्सों में पानी की सप्लाई करती है। भारत-पाकिस्तान के मध्य सरहद पर सदानीरा सतलुज दरिया के रास्ते अक्सर तस्करों द्वारा तस्करी की वारदातें अंजाम दी जाती हैं, जिसे रोक पाना भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा था।

USE IN PAPER 1-GEOGRAPHY,IRRIGATION

9. देश की पहली टॉयलेट पार्लियामेंट ने दिया स्वच्छता का संदेश, छह प्रस्ताव हुए पास

  • नीति आयोग के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अमिताभ कांत ने कहा कि हमारे देश की आर्थिक स्थिति अच्छी है। देश 7.5 फीसद की दर से तरक्की कर रहा है। पिछली तिमाही में वृद्धि दर 8.2 फीसद रही। कृषि, उद्योग और सेवा इन तीनों क्षेत्र में हमने काफी तरक्की की है। भारत दुनिया का सबसे तेजी से विकास करने वाले देश बन गया है। आगे भी बहुत संभावनाएं हैं। विश्व शौचालय दिवस के मौके पर इस गांव में टॉयलेट पार्लियामेंट (शौचालय संसद) का आयोजन किया गया।हमारी विश्व में 142वीं रैंक थी, अब हम 77वें स्थान पर गए हैं।

USE IN PAPER 2-GOVERNANCE 4-ETHICS,CASE STUDIES

10. गंगा विधेयक का मसौदा सार्वजनिक करने की उठी मांग

  • गंगा नदी के लिए कानून बनाने की सरकार की तैयारियों के बीच गंगा महासभा ने इस विधेयक का मसौदा सार्वजनिक करने की मांग की है। महासभा का कहना है कि विधेयक के प्रावधान गंगा के व्यावसायिक उपयोग के बजाय भारतवासियों की आस्था और गंगा की विशिष्टता को ध्यान में रख कर तैयार किए जाएं।
  • गंगा पर विशेष कानून बनाने के लिए 11 दिसंबर से शुरू हो रहे संसद के शीत सत्र में विधेयक पेश किया जा सकता है। सरस्वती ने कहा कि राज्यों और केंद्र के बीच गंगा पर अधिकार और व्यावसायिक दोहन को लेकर खींचतान है। इसे दूर करने के लिए केंद्र कानूनी प्रावधान करे। गंगा कानून के तहत जो भी निकाय बनें उन्हें पूरी तरह सरकारी अधिकारियों के नियंत्रण में न रखा जाए।

USE IN PAPER 2-GOVERNANCE,3-ENVIRONMENT

11. देश में आंकड़ों के संकलन का तरीका बदला जाए

  • केंद्रीय सूचना आयोग (सीआइसी) ने देश के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया है कि आंकड़ों के संकलन के तरीके में बदलाव किया जाए। खासतौर पर जन्म और मृत्यु की जानकारी दर्ज करने का तरीका बदला जाए। सूचना आयुक्त यशोवर्धन आजाद ने इस बाबत रजिस्ट्रार जनरल के लिए आदेश जारी किया है।
  • केंद्रीय सूचना आयोग ने कहा, मृत्यु के आंकड़े एकत्रित करने का काम मुश्किल है। इसमें मौत होने के कारण की जानकारी भी देनी होती है। ऐसे में उसकी प्राथमिक स्तर पर तहकीकात भी करनी होती है। ऐसा ही जन्म के मामले में होता है। इस मामले में भी घरों में होने वाले जन्म का आंकड़ा जुटाना चुनौती होती है। आंकड़ों में मृतक की उम्र और मृत्यु के कारण की जानकारी आवश्यक है।

USE IN PAPER 2-GOVERNANCE

12. कर चोरी रोकने के लिए ई-वे बिल को फास्टैग से जोड़ने की तैयारी

  • जीएसटी की चोरी रोकने और माल की आवाजाही तेज करने के लिए राजस्व विभाग ई-वे बिल के साथ फास्टैग और डीएमआइसीडीसी के लॉजिस्टिक डाटा बैंक यानी एलडीबी प्रोग्राम से जोड़ने की योजना बना रहा है।

USE IN PAPER 2-GST IMPLEMENTATION,3-TAXATION

13.ओपेक के हाथ से फिसल रहा कच्चे तेल का बाजार

  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत तय करने में पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन ओपेक की भूमिका लगभग खत्म हो गई है। अब इस मामले में अमेरिका, सऊदी अरब और रूस की बड़ी भूमिका उभरकर सामने आ रही है। एक तरफ ओपेक साझा भूमिका को लेकर उलझन में है और दूसरी तरफ कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति पर अमेरिका, रूस और सऊदी अरब का दबदबा बढ़ता जा रहा है।
  • हालात बदलने की वजह : अमेरिका, रूस और सऊदी अरब मिलकर ओपेक के 15 सदस्य देशों के बराबर कच्चे तेल का उत्पादन करते हैं। फिलहाल ये तीनों देश रिकॉर्ड पैमाने पर कच्चे तेल का उत्पादन कर रहे हैं। इनमें से हर देश अगले साल उत्पादन में बढ़ोतरी कर सकता है।

USE IN PAPER 3-OIL CRISIS,EXPLORATION

14.कंबोडिया में नहीं बनेगा चीन का नौसैनिक अड्डा: हुन सेन

  • पिछले 33 वर्षो से कंबोडिया की सत्ता पर काबिज प्रधानमंत्री हुन सेन ने अमेरिकी चिंताओं को दूर करते हुए कहा है कि कंबोडिया की धरती पर चीन का नौसैनिक अड्डा नहीं बनेगा। हुन सेन का यह बयान बेहद अहम है क्योंकि दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में कंबोडिया को चीन का गहरा दोस्त माना जाता है।
  • अमेरिका की चिंता व्यापारिक लिहाज से बेहद अहम दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर है। दक्षिण चीन सागर के बड़े हिस्से पर चीन अपना हक जताता है और इस क्षेत्र का धीरे-धीरे सैन्यीकरण कर रहा है। दक्षिण चीन सागर पर फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया और ताइवान भी अपना हक जताते हैं।

USE IN PAPER-2-IR,COUNTER CHINA

15.परमाणु समझौते पर बातचीत को ईरान जाएंगे ब्रिटिश विदेश मंत्री

  • ब्रिटेन के विदेश मंत्री जेरेमी हंट परमाणु करार और ईरानी जेलों में बंद ब्रिटिश नागरिकों को रिहा कराने के लिए वार्ता की खातिर पहली बार ईरान का दौरा करेंगे। संयुक्त राष्ट्र परमाणु निगरानी संस्था की पिछले सप्ताह आई ताजा रिपोर्ट के अनुसार, ईरान वैश्विक शक्तियों के साथ अपने परमाणु करार की शतोर्ं का पालन कर रहा है। यह रिपोर्ट ईरान पर अमेरिका के नए सिरे से प्रतिबंध लगाने के कुछ दिन बाद आई है। ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने के उद्देश्य से हुए अंतरराष्ट्रीय समझौते से अलग होने के बाद प्रतिबंध लगाकर तेहरान पर दबाव बढ़ा दिया है।

USE IN PAPER 2-IRAN ISSUE

16. हांगकांग में लोकतंत्र समर्थकों के खिलाफ मुकदमा शुरू

  • चीन के प्रभुत्व वाले हांगकांग में वर्ष 2014 में लोकतंत्र के समर्थन में हुए प्रदर्शनों से जुड़े मामले में सोमवार को यहां मुकदमे की सुनवाई शुरू हो गई। लोकतंत्र समर्थक तीन वरिष्ठ नेताओं ने अपना अपराध कुबूलने से इन्कार कर दिया है। इन लोगों पर दंगा फैलाने और सार्वजनिक काम में बाधा डालने के आरोप हैं। इसके लिए उन्हें सात साल तक की सजा हो सकती है।

USE IN PAPER 2-AGAINST CHINA DEMOCRACY VALUE

17. बैट्री को तेजी से चार्ज करने के लिए नया तरीका ईजाद

  • आज इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स हमारी जिंदगी का जरूरी हिस्सा बन गए हैं। इनके बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। फिर चाहे वो आपका स्मार्टफोन हो या टैबलेट, स्मार्टवॉच हो या ब्लूटूथ हैंड्स फ्री। इन्होंने न केवल हमारे जीवन को पहले से ज्यादा मनोरंजक बनाया है, बल्कि कई कार्यो को बेहद आसान कर दिया है। यही वजह है कि हम इन पर बहुत अधिक निर्भर हो गए हैं, लेकिन इन सभी गैजेट्स के लिए जरूरी है ऊर्जा। यानी अच्छी बैट्री। दुनिया भर के वैज्ञानिक निरंतर प्रयास कर रहे हैं कि ऐसी बैट्री तैयार की जाए, जो कम समय में चार्ज हो और लंबे समय तक चले। इस दिशा में वैज्ञानिकों को एक बड़ी कामयाबी मिली है। वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने ऐसा तरीका तलाश लिया है, जिससे लीथियम बैटियां न केवल जल्दी चार्ज हो सकेंगी, बल्कि लंबे समय तक काम भी करेंगी। इतना ही नहीं, यह वर्तमान में मौजूद बैटियों से अधिक सुरक्षित भी होंगी।
  • इस तरह काम करती है नई विधि : वांग कहते हैं, हम ऐसे पॉलीमर का प्रयोग करना चाहते थे, जो लीथियम धातु से जुड़ सके। इसलिए हमने ऐसा स्पंज तैयार किया। जांच में हमने पाया कि यह मैटेरियल एक छिद्रयुक्त स्पंज की तरह काम करता है, जो न केवल आयन के हस्तांतरण में मदद करता है, बल्कि बैट्री के जल्दी क्षय होने को भी रोकता है।

USE IN PAPER 3-ENERGY,SCIENCE TECH

18. प्रोबायोटिक से मजबूत होंगी हड्डियां

  • प्रोबायोटिक का एक और फायदा सामने आया है। एक अध्ययन में दावा किया गया है कि इसके इस्तेमाल से हड्डियां मजबूत हो सकती हैं। इससे खासतौर पर महिलाओं को ज्यादा लाभ हो सकता है। इस खोज से ऑस्टियोपोरोसिस के लिए नया इलाज विकसित किया जा सकता है। प्रोबायोटिक सप्लीमेंट में गुड बैक्टीरिया का व्यापक इस्तेमाल होता है। ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और उनके टूटने का खतरा बढ़ जाता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, अध्ययन में स्वस्थ चूहों को लैक्टोबैसिलस रैमनोसस जीजी (एलजीजी) बग की खुराक दी गई। इससे प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया होने पर हड्डियों की सघनता में सुधार हुआ। अमेरिका की एमरी यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता रॉबटरे पैसिफिकी ने कहा, ‘इस अध्ययन को अब इंसानों पर आजमाए जाने की जरूरत है। अगर यह सफल होता है तो बुजुर्गो को ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या से बचाने के लिए प्रभावी और सुरक्षित तरीका ईजाद हो सकता है।’

PRELIMINARY

 

          • EDITORIAL

1.बच्चों को हो सुरक्षा का अहसास

  • भारत में 14 नवंबर को देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के जन्मदिन को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है, तो वहीं 20 नवंबर दुनिया भर में यानी विश्व बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। दरअसल 20 नवंबर 1989 को संयुक्त राष्ट्र में बाल अधिकार सम्मेलन को अंगीकार किया गया था और यह तारीख इतिहास में दर्ज हो गई।

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  • बीते 14 नवंबर को भारत में बाल दिवस के मौके पर गूगल ने डूडल के जरिये बच्चों को अंतरिक्ष की खोज करने के लिए प्रेरित किया है। इस डूडल का डिजाइन मुंबई के छात्र पिंगला राहुल ने तैयार किया है। राहुल के इस डिजाइन में डूडल में एक छोटी लड़की टेलीस्कोप से अंतरिक्ष में देख रही है, जहां उसे ग्रह, तारे और सेटेलाइट नजर आ रहे हैं। दरअसल बाल दिवस बच्चों के लिए, बच्चों के द्वारा मनाया जाना वाला एक वार्षिक महत्वपूर्ण आयोजन है और इस बार यूनिसेफ का विश्व बाल दिवस पर थीम ‘गो ब्लू फॉर एवरी चाइल्ड ऑन वल्र्ड चिल्ड्रन्स डे’ है। बाल अधिकारों के लिए काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था यूनिसेफ के लोगो में ब्लू रंग है। गो ब्लू यानी प्रत्येक आदमी बाल अधिकारों के लिए खड़ा हो, बाल अधिकारों को सम्मान दे, उन अधिकारों को अच्छी तरह से अमल में लाने में योगदान दे और उनका अधिक से अधिक प्रसार करे। इस विश्व बाल दिवस पर दुनियाभर में करीब एक अरब लोगों तक पहुंचा जाएगा जो ऐसी दुनिया का निर्माण करेंगे जहां हर बच्चा स्कूल में हो, सुरक्षित हो और अपनी क्षमताओं को पूरा कर सके.

     CHILD RIGHTS IN INDIA

  • भारत में बाल अधिकारों व जरूरतों के अनुकूल जागरुकता को बढ़ाना है। विश्व बाल दिवस का मुख्य संदेश स्कूलों में प्रत्येक लड़के व लड़की के लिए सहायक माहौल बनाना है, उनकी पृष्ठभूमि, लिंग या योग्यता का विचार किए बिना। यूनिसेफ स्कूलों में बच्चों को हिंसा मुक्त माहौल मुहैया कराने को तवज्जो दे रही है। यूनिसेफ इंडिया भारत में इसी विशेष थीम पर फोकस कर रहा है।
  • ध्यान देने वाली बात यह है कि बच्चों ने स्वयं ही इस मुद्दे की पहचान की है। स्कूलों में सहायक माहौल तैयार करने वाले मसलों को उठाने की जरूरत है, साङोदारियों व सहयोग के जरिये भारत के एजेंडे के केंद्र में समग्र रूप से रखने की जरूरत है। यह थीम तीन मुख्य स्तंभ पर टिका हुआ है- पहला गो ब्लू फॉर एवरी चाइल्ड को केंद्र में रखते हुए गतिविधियों में शमिल होना, दूसरा आम जनता को स्कूलों में सहायक वातावरण निर्माण वाली अहम परिचर्चा के साथ जोड़ना और इस पर रोशनी डालना कि वे कैसे आर्थिक रूप से योगदान दे सकते हैं या अन्य किसी तरह से और इस महत्वपूर्ण पहल के समर्थक बन सकते हैं। तीसरा उच्च प्रोफाइल वालों के साथ साङोदारियां बनाना और चैनल्स का प्रभावशाली इस्तेमाल करना। गौरतलब है कि इस बार बाल दिवस का थीम बच्चों को स्कूल में सहायक माहौल, हिंसा मुक्त माहौल प्रदान करना है। सहायक माहौल से तात्पर्य है- जहां हर बच्चा बाल अधिकारों को समङो और बाल अधिकार कन्वेंशन के बारे में जानता हो। मजबूत सहकर्मी सिस्टम हो और शिक्षण औजार व प्रणाली रूचिकर व नवोन्मेषी हो। अध्यापक व बच्चों के बीच सभी मामलों पर खुला संवाद हो। सभी के लिए खेल के अवसर हों। किसी भी प्रकार की हिंसा व दादागिरी के खिलाफ जीरो टोलरेंस हो।दरअसल बच्चों के लिए स्कूलों में सहायक व हिंसा मुक्त माहौल जरूरी है। सीखना वैश्विक शिक्षा व विकास एजेंडा 2030 के केंद्र में है और बच्चों को इसके लिए सहायक, हिंसा मुक्त माहौल की दरकार है। बच्चे सुरक्षित वातावरण में पढ़ें, यह उनके भविष्य के लिए निवेश है और इसके साथ ही शांतपूर्ण व सुरक्षित समाज के लिए भी। स्कूल के माहौल का बच्चों की जिंदगी पर गहरा प्रभाव पड़ता है। उनका व्यवहार और वैल्यू सिस्टम गहरे प्रभावित होता है, कक्षा में दादागिरी और आक्रामक व्यवहार देखने से उनकी जिंदगी के अन्य पहलू प्रभावित हो सकते हैं और वे भी आक्रामक लक्षण दिखा सकते हैं। यदि बच्चे स्कूल में सुरक्षित व संरक्षित महसूस करते हैं तो यह सकारात्मक रूप से उनकी जिंदगी को प्रभावित कर सकता है।

IN SCHOOL

  • स्कूल बच्चे का दूसरा घर माना जाता है जहां वह अपने दिन का एक बड़ा समय गुजरता है, स्कूलों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे बच्चों को सुरक्षित होने का अहसास कराएं। स्कूलों में बच्चों के खिलाफ होने वाली हिंसा की सामाजिक व आर्थिक कीमत भी चुकानी पड़ती है। स्कूल में होने वाली हिंसा बच्चों की जिंदगी को कैसे-कैसे प्रभावित करती है, इसके मद्देनजर भारत समेत दुनिया भर में बाल दिवस का थीम बच्चों को स्कूल में सहायक माहौल प्रदान करना है। भारत में बाल दिवस के मौके पर 14 नवंबर को यूनिसेफ और नीति आयोग ने मिलकर यंग चैंपियंस के साथ एक कार्यक्रम का आयोजन किया। इस विश्व बाल दिवस पर निजी सेक्टर्स से कॉरपोरेट मुखिया बच्चों के वास्ते सहायक वातावरण को मजबूती देने में अपनी-अपनी भूमिका पर बात करेंगे और भारत के बच्चों के हितों के प्रति प्रतिबद्धता के बारे में बताएंगे।

2.अमेरिका-चीन कारोबारी जंग और भारत के लिए अवसर

        CHINA VS USA

  • अमेरिका और चीन के बीच छिड़े व्यापारिक युद्ध के दो पहलू हैं। पहले का संबंध वस्तु व्यापार से है जहां अमेरिका को लगातार महत्त्वपूर्ण कमी से जूझना पड़ रहा है। इस क्षेत्र में कुछ प्रगति हो सकती है अगर चीन अमेरिका को शांत करने के लिए कुछ बड़ी खरीद करे। वह अमेरिका में बने नागरिक उड्डयन विमान, सोयाबीन और गेहूं जैसी कृषि जिंस तथा महंगे उपभोक्ता उपकरणों की खरीदारी कर सकता है। अतीत में ऐसा हो चुका है लेकिन तब भी व्यापारिक तनाव अस्थायी रूप से ही कम हुआ था। अभी हाल ही में चीन ने शांघाई में एक महत्त्वाकांक्षी आयात मेले की शुरुआत की। वहां शी चिनफिंग ने स्वयं मुक्त व्यापार को लेकर चीन की प्रतिबद्धता के बारे में बात की। हालांकि उन्होंने कहा कि अगले 15 वर्ष में चीन का इरादा अमेरिका से 30 लाख करोड़ डालर के वस्तु आयात और 1,000 करोड़ डॉलर के सेवा आयात का है। ये आंकड़े बहुत विशिष्ट हैं लेकिन ऐसा लगता नहीं कि चीन के अधिकांश कारोबारी साझेदारी इनसे प्रभावित होंगे।

         IPR AND TRADE WAR

  • दूसरी बात, बौद्धिक संपदा और औद्योगिक नीति से जुड़े मसले भी हैं जहां चीन अमेरिका की मांग का प्रतिरोध करेगा। उदाहरण के लिए मेड इन चाइना 2025 नामक पहल का मकसद कृत्रिम मेधा, क्वांटम कंप्यूटिंग, इलेक्ट्रिक वाहन और एडवांस रोबोटिक्स में चीन का दबदबा कायम करना है। इसमें सरकारी सहयोग वाली निजी और सरकारी कंपनियों की सहायता ली जाएगी। ऐसा लगता नहीं कि यह विषय चीन-अमेरिका की कारोबारी बातचीत के एजेंडे में शामिल होगी। इस विषय को लेकर अमेरिका का दबाव चीन को और अधिक प्रतिबद्ध कर रहा है। तकनीकी स्तर पर आत्मनिर्भर होने और अमेरिकी तथा पश्चिमी देशों द्वारा इस सिलसिले में कड़ाई करने के बाद चीन में घरेलू नवाचार की मांग तेजी से उठ रही है। चीन यह घोषणा भी कर सकता है कि वह पश्चिमी कंपनियों की बाजार पहुंच के लिए तकनीकी हस्तांतरण की शर्त नहीं रखेगा लेकिन बौद्धिक संपदा चोरी से जुड़ी पश्चिम की चिंताएं इतनी आसानी से समाप्त नहीं होने वाली हैं। ऐसे में इस महीने के अंत में जब जी-20 शिखर बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग मिलेंगे तो व्यापारिक मोर्चे पर अस्थायी शांति स्थापना देखने को मिल सकती है। परंतु मूलभूत जटिलताएं बरकरार रहेंगी।

         TRADE WAR & WTO

  • अमेरिका, जापान और यूरोपीय संघ ने हाल ही में विश्व व्यापार संगठन में सुधार को लेकर साझा पहल पर सहमति जताई है ताकि बाजार में विसंगति पैदा करने वाली गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। यह विसंगति सब्सिडी या सरकारी उपक्रमों को बढ़ावा देकर पैदा की जाती है। इसके लिए कई उपाय अपनाने की बात कही गई है। जानकारी छिपाने और अनुपालन न करने वालों पर जुर्माने का प्रस्ताव है। बौद्घिक संपदा से जुड़े मसलों को लेकर अधिक सख्त नियम बनाए जा रहे हैं, बाजार पहुंच के बदले तकनीकी जानकारी की मांग खत्म की जा रही है। सरकारी उपक्रमों की भी अब गहरी पड़ताल होगी। कुलमिलाकर नीतिगत और प्रक्रियात्मक पारदर्शिता में इजाफा होगा। स्पष्ट है कि यह पूरी कवायद चीन के खिलाफ जाएगी और इस बात की भी संभावना बहुत कम है कि निकट भविष्य में चीन को उसकी मांग के मुताबिक बाजार अर्थव्यवस्था का दर्जा दिया जाएगा।

 

  • बौद्घिक संपदा के मसले से सुरक्षा का पहलू जुड़ा हुआ है और ऐसे में लगता नहीं कि इस विषय पर भी कोई समझौता हो पाएगा। हाल ही में आई एक रिपोर्ट में कहा गया था कि चीन ने असैन्य-सैन्य एकीकरण में उस बौद्घिक संपदा की मदद ली है जो उसने पश्चिमी कंपनियों से प्राप्त की। इसका इस्तेमाल रक्षा क्षेत्र में किया जा रहा है। चीन अमेरिका में सिलिकन वैली के अलावा ब्रिटेन और जर्मनी में कई स्टार्टअप में निवेश कर रहा है। इससे उसे उत्कृष्ट तकनीक प्राप्त हो रही है जिसका इस्तेमाल वह अपने असैन्य और रक्षा क्षेत्र में कर रहा है। आने वाले महीनों में यह गुंजाइश बहुत सीमित हो जाएगी। इसी रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अभी अकेले अमेरिका में 25,000 चीनी आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी में उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं और वे असैन्य और सैन्य दोनों तरह के उद्योगों में गुणवत्ता वाले कार्मिकों के रूप में शामिल होंगे। अमेरिका ने अभी हाल ही में अपने करीबी सहयोगी इजरायल से कहा है कि वह चीनी कंपनियों को उच्च गुणवत्ता वाली चीजें न बेचे।

 

  • अतीत में यह दलील दी जाती रही है कि पूंजी और तकनीकी क्षमताओं के साथ चीन के आर्थिक विकास की मदद करने और पश्चिमी बाजारों की पहुंच प्रदान करने से चीन को उच्च समृद्घि के पूर्वी एशियाई चक्र के समकक्ष ले जाने में मदद मिलेगी। इससे बाजार में खुलापन आएगा और वहां की राजनीति और अधिक लोकतांत्रिक होगी। पश्चिम और चीन के बीच की गहन आर्थिक परस्पर निर्भरता के चलते उनके बीच सैन्य प्रतिस्पर्धा के भी सीमित होने की उम्मीद की गई थी। शी चिनफिंग के चीन का निर्विवाद नेता बनने के साथ ही ये उम्मीदें झूठी साबित हुईं। व्यापार, अमेरिका और चीन के बीच सुरक्षा प्रतिस्पर्धा का उपकरण बन गया।

          GLOBAL EFFECT

  • सवाल यह है कि मौजूदा व्यापारिक जंग, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या असर डाल सकती है? इसमें दो राय नहीं कि अगर मौजूदा व्यापारिक और निवेश संबंधी प्रवाह प्रभावित हुआ तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर होगा। चीन दक्षिण पूर्वी एशिया के कई देशों के उत्पाद की असेंबली का अंतिम सिरा है। ये उत्पाद अमेरिका, यूरोप तथा जापान जाते हैं। अगर इन बाजारों में चीन की पहुंच प्रभावित हुई तो इसका असर इस आपूर्ति शृंखला पर भी होगा। ऐसे में चीन के हिस्से का काम वियतनाम या इंडानेशिया जैसे अन्य देशों में जा सकता है। चीन खुद पश्चिमी देशों के अवरोध से बचने के लिए दूसरे देशों में फैक्टरियां लगा सकता है। वाहन कलपुर्जे और औषधि को छोड़ दें तो भारत इसमें शामिल नहीं है। परंतु भारत के लिए यह अवसर हो सकता है कि वह खुद को इस आपूर्ति शृंखला से जोड़े। हमें क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी के जरिये इस लक्ष्य को हासिल करने का प्रयास करना चाहिए।

 

  • बदलता वैश्विक आर्थिक और व्यापारिक परिदृश्य निस्संदेह चीन को मजबूर करेगा कि वह अपनी व्यापारिक और निवेश संबंधी नीतियों की समीक्षा करे। उसे व्यापारिक युद्घ से निपटने के तरीके निकालने होंगे ताकि वृद्घि बरकरार रहे। इस लिहाज से देखें तो भारत एक आकर्षक आर्थिक साझेदार साबित हो सकता है। बेहतर होगा हम अपने मतभेद दूर कर चीन के साथ गंभीर बातचीत शुरू करें और साझा उत्पादकता वाली व्यापार और निवेश साझेदारी की शुरुआत करें। क्या पता यह दोनों के लिए लाभप्रद साबित हो।

3.सूक्ष्म पोषक तत्वों को लोगों तक पहुंचाने की बड़ी लड़ाई

  • खाद्य पदार्थों में अनिवार्य रूप से माइक्रोन्यूट्रिएंट मिलाकर पोषण और जन स्वास्थ्य को काफी सुधारा जा सकता है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन भी मानता है कि खाद्य पदार्थों में अतिरिक्त पोषक तत्वों को मिलाना बहुत किफायती तरीका है।

DAILY LIFE & HEALTH

 

  • जो लोग अपने खान-पान को लेकर खास सतर्क रहते हैं, वे भी ‘माइक्रोन्यूट्रिएंट डिफिशिएंसी' यानी शरीर के सामान्य ग्रोथ के लिए जरूरी विटामिन, मिनरल जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी का शिकार हो सकते हैं। यानी यह बीमारी आर्थिक हालात, लिंग और उम्र नहीं देखती। चूंकि शरीर पर इन पोषक तत्वों में कमी के लक्षण तब तक नहीं उभरते, जब तक कि वे बहुत ज्यादा कम न हो जाएं, इसीलिए अमूमन इसका इलाज तब शुरू होता है, जब स्थिति बिगड़ चुकी होती है और नुकसान तयशुदा लगने लगता है। दुनिया भर में कुल बीमारी की 7.3 फीसदी की वजह ‘माइक्रोन्यूट्रिएंट डिफिशिएंसी' है। इसके तीन सामान्य रूप हैं- आयरन, विटामिन-ए और आयोडीन की कमी। इनसे दुनिया का हर तीन में से एक शख्स जूझ रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, ‘फूड फोर्टिफिकेशन' यानी अतिरिक्त पोषक पदार्थों को मिलाना जन-स्वास्थ्य की दिशा में काफी किफायती व प्रभावशाली हस्तक्षेप है, जिसे मौजूदा प्रौद्योगिकी और वितरण प्रणाली से लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।.
  • बावजूद इसके भारत में छह माह से लेकर 23 महीने तक के 100 में से दस बच्चे को भी पर्याप्त आहार नहीं मिल पा रहा। यह आंकड़ा राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण- 4 (2015-16) का है। इस मामले में शहर और गांवों का अंतर नाममात्र का है। महज 11.6 फीसदी शहरी बच्चों को पर्याप्त आहार (जिसमें दूध को छोड़कर चार या इससे अधिक खाद्य समूह शामिल हैं) मिल पाता है, जबकि ग्रामीण बच्चों की संख्या सिर्फ 8.8 फीसदी है। इतना ही नहीं, देश में पांच वर्ष से कम उम्र के तीन में से एक बच्चे का वजन कम है, जिसमें 29 फीसदी शहरी बच्चे भी शामिल हैं। यहां करीब 70 फीसदी किशोर लड़कियां खून की कमी यानी एनीमिया से जूझ रही हैं और लगभग 50 फीसदी कम वजन की हैं। भारत ही वह देश है, जहां दुनिया में सबसे अधिक ‘स्टंटेड' यानी नाटे कद के बच्चे मिलते हैं। यहां कुपोषण की वजह से पांच वर्ष से कम उम्र के हर पांच में से दो बच्चे इसका शिकार हैं। इस कारण बच्चों की मानसिक और सीखने की क्षमता तो कम हो ही जाती है, वर्तमान में उनमें संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है और भविष्य में डायबिटीज, हाई बीपी और मोटापा जैसे रोग होने का जोखिम कहीं ज्यादा होता है। भारत में दूध को विटामिन डी के साथ, गेहूं के आटे व चावल को आयरन, विटामिन बी12 और फोलिक एसिड के साथ, दूध व खाद्य तेल को विटामिन ए व डी के साथ और नमक को आयरन के साथ मिलाकर बाजार में बेचा जाता है। नमक को आयोडीन व आयरन के साथ ‘डबल फोर्टिफाइड' भी किया जाता है। नए मानकों के तहत अब आटा, मैदा, चावल, नमक, वनस्पति तेल और दूध के अतिरिक्त पोषक तत्वों की न्यूनतम व अधिकतम सीमा बताई जाने लगी गई है। अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि ‘फोर्टिफाइड' खाद्य पदार्थों की पहचान के लिए उन पर ‘+एफ' लिखा होना चाहिए। चूंकि प्रोसेस्ड फूड (प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों) को ही सुदृढ़ किया जा सकता है, इसीलिए भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी एफएसएसएआई, टाटा ट्रस्ट्स इंडिया न्यूट्रिशन इनिशिएटिव के साथ निजी खाद्य कारोबार पर गंभीरता से काम कर रहा है, ताकि इसकी पहुंच बढ़ सके।.

POLICY

  • अपने देश में 2017 के बाद से एकीकृत बाल विकास योजनाओं (आईसीडीएस) और मिड डे मील प्रोग्राम में ‘फोर्टिफाइड' आटा, तेल और ‘डबल फोर्टिफाइड' नमक का इस्तेमाल किया जा रहा है। फिलहाल 15 राज्य व तीन केंद्रशासित क्षेत्रों में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत ‘फोर्टिफाइड' खाद्य पदार्थ बांटे जा रहे हैं। एफएसएसएआई के मुताबिक, तय मानकों को अपनाने के बाद अभी 62 अग्रणी प्रसंस्कृत खाद्य-पदार्थ निर्माता कंपनियां सभी पांचों ‘फोर्टिफाइड' खाद्य पदार्थों के 110 ब्रांड बेच रही हैं। हालांकि लगभग 47 फीसदी पैकेटबंद खाद्य तेल और 21 फीसदी दूध ‘फोर्टिफाइड' हैं, बावजूद इसके अभी इस दिशा में काफी कुछ किया जाना शेष है। मसलन, राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड 2016 से अपने सभी दूध को विटामिन ए और डी के साथ मिलाकर बेच रहा है, हालांकि दूध बेचने वाले सभी उद्योग ऐसा नहीं कर रहे।.

4.पंजाब में क्या इतिहास फिर अपने को दोहराने जा रहा है?

           HISTORY

  • आतंकवादी खूंरेजी के उन काले दशकों की शुरुआत निरंकारियों के खिलाफ आंदोलनों और हिंसा से हुई और यह अपने निर्णायक दौर में 1980 में निरंकारी प्रमुख बाबा गुरुबचन सिंह की हत्या के बाद ही दाखिल हुई थी। एक बार फिर 18 नवंबर को अमृतसर के ग्रामीण इलाके में निरंकारी गुरुद्वारे पर हमला हुआ है। निरंकारियों को निशाना बनाकर धार्मिक भावनाएं आसानी से भड़काई जा सकती हैं, क्योंकि मुख्यधारा के सिखों से वे कुछ भिन्न हैं। इसी भिन्नता का उपयोग भिंडरांवाले ने अस्सी के दशक में पृथकतावादी खालिस्तान आंदोलन की जड़ें मजबूत करने के लिए किया था। निरंकारियों के धर्मस्थल पूरे देश में फैले हुए हैं, जहां नियमित रूप से उनके छोटे-बड़े जमावड़े होते रहते हैं। आमतौर से इनमें सुरक्षा के लिए संगठन के ही निहत्थे स्वयंसेवक नियुक्त होते हैं, अंत: ये हमेशा हमले के आसान लक्ष्य हो सकते हैं। पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने इसके आतंकी वारदात होने की पुष्टि कर दी है। तफ्तीश से ही स्पष्ट होगा कि इसमें किस आतंकी संगठन का हाथ है, पर इतना तो तय हो गया है कि पंजाब को फिर से आतंकवाद की अंधी भूल-भुलैया में धकेलने की कोशिश की जा रही है। .

 

  • धार्मिक प्रतीकों को उभारकर अलग पहचान का आंदोलन खड़ा करना तो आसान है, पर राज्य के समर्थन के बिना इसे लंबे समय तक चला पाना मुश्किल होता है। खालिस्तान आंदोलन के जनक को भी राज्य के विभिन्न अंगों द्वारा प्रारंभ में खुला, फिर ढका समर्थन और बाद में असहाय किस्म का प्रतिरोध मिला। नतीजतन अपने बनाए भस्मासुर को नष्ट करने के लिए भारतीय राज्य को ऑपरेशन ब्लू स्टार जैसी भयानक कार्रवाई करनी पड़ी और उसके दु:स्वप्नों से हम आज तक उबर नहीं पाए हैं। सौभाग्य से अभी तक राज्य के किसी अंग या राजनीतिक दल द्वारा हाल के समय-समय पर खालिस्तानी आंदोलन को खड़ा करने के किसी प्रयास को समर्थन मिलने का कोई सुबूत नहीं है, फिर भी संवेदनशीलता और निरंतर सतर्कता की जरूरत है। गंभीर भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे और जनता द्वारा पूरी तरह नकार दिए गए अकालियों की फिलहाल वापसी के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में, आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि वे एक बार फिर चरमपंथियों के आगे समर्पण कर दें और उनकी बैसाखी पकड़ वैतरणी पार करने की कोशिश करें। पिछली बार उनका शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) पर नियंत्रण था और बिना किसी गंभीर प्रतिरोध के सिखों के पवित्रतम स्थल स्वर्ण मंदिर पर खालिस्तानियों का कब्जा हो गया था। अब भी एसजीपीसी पर अकालियों का ही नियंत्रण है और उम्मीद करनी चाहिए कि वे पिछली गलती से सीखेंगे और अपने तात्कालिक स्वार्थ साधने के लिए चरमपंथियों को तश्तरी में रखकर गुरुद्वारे नहीं सौंपेंगे। .

 

  • जनता की याददाश्त कमजोर होती है, पर उम्मीद की जानी चाहिए कि सरकार खालिस्तानी हिंसा से निपटते समय की गई पिछली गलतियों को नहीं भूली होगी। तब सरकार ने सही समय पर फैसला न कर पाने की अपनी आदत के कारण स्थितियों को बिगड़ने का मौका दिया था। अंतिम मौका 1983 में मिला, जब स्वर्ण मंदिर के बाहर डीआईजी अटवाल की हत्या से उबाल खाई पंजाब पुलिस को सरकार ने गुरुद्वारे में घुसकर कार्रवाई करने से रोक दिया और एक ही वर्ष में वहां फौज भेजनी पड़ी। खालिस्तानियों को अब भी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की मदद हासिल होगी, मगर इस बार सीमा पर तारबंदी और बेहतर नियंत्रण के कारण उसका काम मुश्किल हो गया है। इसका भी कानून का पालन कराने वाली एजेेंसियों को लाभ होगा।.
  • पंजाब के पिछले अनुभवों के साथ हमें पाकिस्तान के अनुभवों से भी सबक लेना चाहिए, जहां धार्मिक कट्टरपंथियों के सामने राज्य द्वारा नियमित रूप से समर्पण करते-करते अब एक ऐसी स्थिति आ गई है, जब वे गाहे-बगाहे पूरी राज्य मशीनरी को ठप करने लगे हैं। पिछले दिनों 72 घंटों तक बंद रहने के बाद पाकिस्तान में जिंदगी बमुश्किल लंगड़ाती हुई सामान्य हो पाई। 31 अक्तूबर की दोपहर सुप्रीम कोर्ट ने विवादास्पद ईश निंदा कानून के तहत पिछले नौ वर्षों से फांसी का इंतजार कर रही ईसाई महिला आसिया बीबी को रिहा कर दिया और जैसी कि आशंका थी, इस्लामी कट्टरपंथियों ने पूरे पाकिस्तान को बंधक बना लिया। इस मुकदमे के दौरान अदालत में जो सवाल-जवाब हुए, उनसे पूरी उम्मीद थी कि आसिया रिहा हो जाएगी और तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान जैसी कट्टरपंथी जमातों ने अपने इरादे पहले से ही साफ कर दिए थे। उन्होंने सुनवाई करने वाले तीनों जजों को खुलेआम चेतावनी देनी शुरू कर दी थी कि आसिया को रिहा करने पर उन्हें खामियाजा भुगतना पड़ेगा और फैसला आते ही उन्होंने पूरे देश को बंधक बना दिया।.
  • बंद के दौरान तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान के नेताओं ने टीवी पर प्रसारित हो रहे भाषणों में कहा था कि फैसला सुनाने वाले जज वाजिबुल कत्ल या हत्या किए जाने योग्य हैं। उन्होंने सेनाध्यक्ष जनरल बाजवा के सहयोगियों से भी उन्हें मार डालने की अपील की। पहले तो प्रधानमंत्री इमरान खान ने उन्हें देख लेने की धमकी दी और बाद में पूरी तरह समर्पण करते हुए उनके साथ समझौता कर लिया। नेशनल असेंबली में विरोधी पक्ष के एक सदस्य ने व्यंग्य करते हुए उनकी इस दुर्दशा को दैवीय न्याय कहा। आखिर पिछले साल तहरीक-ए-लब्बैक के ऐसे ही आंदोलन को इमरान का खुला समर्थन हासिल था, जनरल बाजवा की तरफ से आंदोलनकारियों को नोट बांटते फौजी अफसरों के विजुअल वायरल हुए थे। सरकारी समर्पण का नतीजा है कि रिहाई के बावजूद आसिया बीबी की जान बचाने के लिए कनाडा में शरण लेने की कोशिश अब तक सफल नहीं हो सकी है। .
  • यह एक उदाहरण ही इस समझ को मजबूत करने के लिए काफी होगा कि धार्मिक कट्टरपंथी बहुत दिनों तक अपने आकाओं के नियंत्रण में नहीं रहते। पंजाब में भी शुरू में अकालियों के मुकाबले जिन लोगों ने भिंडरांवाले को खड़ा किया था, जल्द ही वह उनके काबू से बाहर हो गया। इस बार हमें पुरानी गलती से बचना चाहिए। न सिर्फ पंजाब में, बल्कि देश के दूसरे हिस्सों में धार्मिक आंदोलनों से निपटते समय भी सरकार को पाकिस्तानी अनुभव से सीखना चाहिए। .

 

 

 

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