हिंदी का भविष्य: साल 2050 तक दुनिया की सबसे शक्तिशाली भाषाओं में से एक होगी हिन्दी

 एक भाषा जिसने हमें और आपको एक सूत्र में बांधा है उसका नाम है हिंदी भाषा। हिंदी भारत के 18 करोड़ लोगों की मातृभाषा है जबकि 30 करोड़ लोग ऐसे हैं जो हिंदी का इस्तेमाल Second Language के तौर पर करते हैं। यानी जो संवाद हम हिंदी में करते हैं..वो भारत के करीब 48 करोड़ लोगों तक सीधे पहुंचता हैं। इतना ही नहीं। दुनिया के करीब 150 देश ऐसे हैं जहां हिंदी भाषी लोग रहते हैं।

विश्व स्तर पर प्रभावशाली भाषा बनकर उभरी है हिन्दी

हिंदी विश्व स्तर पर एक प्रभावशाली भाषा बनकर उभरी है और जितना अधिक हम हिंदी और प्रांतीय भाषाओं का प्रयोग शिक्षा, ज्ञान विज्ञान, प्रौद्योगिकी आदि में करेंगे, उतनी ही तेज गति से भारत का विकास होगा। 
★ भारत की संविधान सभा ने 14 सितंबर 1949 को भारत की राजभाषा के रूप में हिंदी को स्वीकार किया था। हिंदी जन साधारण द्वारा बोली जाने वाली एक सरल भाषा है। हिंदी पुरातन भी है और आधुनिक भी। इसी विशेषता के कारण हिंदी को भारत की राजभाषा का सम्मान प्राप्त है।

हिंदी की वर्तमान स्तिथि; हिंदी विकास में कैसा हो मेरा और आपका योगदान - भाषाई द्वन्द

आज #हिंदी_दिवस है। 14 सितंबर को हिंदी दिवस घोषित करने के पीछे यही एक मात्र कारण नहीं था कि आज के दिन ही भारतीय संविधान सभा द्वारा हिंदी को राज्य की भाषा के रूप में स्वीकार किया गया वरन् बृहत दृष्टिकोण से हिंदी भारतीय संस्कृति को समृद्ध बनाने वाली अमृत बून्द है, जो सदियों से भारतीयता को एक सूत्र में पिरोये है। अगर हम में आज भी राष्ट्रीयता और भारतीयता के अंश है तो इसके पीछे की महत्वपूर्ण वजह हमारी मातृभाषा है। 

भारत में परमाणु ऊर्जा और भारत के परमाणु प्लांटों की सुरक्षा की चुनौतियाँ

भारत के बेहद सुरक्षित परमाणु प्रतिष्ठान में माहौल में भिन्नता है। दक्षिण भारत स्थित परमाणु प्रतिष्ठान में जहां खुशी का माहौल है, वहीं पश्चिमी भारत स्थित प्रतिष्ठान का माहौल चिंता वाला है।

- भारत के अंतिम छोर यानी कन्याकुमारी के पास ही स्थित भारत के सबसे बड़े परमाणु उर्जा पार्क कुडनकुलम का संचालन शुरू हो चुका है। 1,000 मेगावाट के दो परमाणु रिएक्टरों में पहली बार परमाणु विखंडन की अभिक्रिया हो रही है। पहली इकाई ने वर्ष 2013 में बिजली की आपूर्ति शुरू कर दी थी और दूसरी इकाई इस सप्ताह सक्रिय हो गई। यह इकाई कुछ ही सप्ताह में ग्रिड को बिजली की आपूर्ति शुरू कर देगी।

पर्यावरण संरक्षण हेतु सार्थक प्रयास की जरुरत

आजकल पर्यावरण संरक्षण का सवाल सबसे अहम् है। इसका मानव जीवन से सीधा सम्बंध है। न तो इसका नाम नया है और न ही इसकी अवधारणा नयी है। यदि इसके शाब्दिक अर्थ के बारे में विचार करें तो पाते हैं कि एक विषेष आवरण जिसे दूसरे अर्थों में हम प्रकृति का आवरण भी कह सकते हैं। वास्तविक अर्थों में यह एक रक्षा कवच है। 

बिना सेहत आर्थिक तरक्की बेमानी

SDG को पूर्ण के लिए क्या आवश्यक

  • 2030 तक एसडीजी-3.1 नामक कार्यक्रम का उद्देश्य जननी मृत्यु दर में काफी कमी लाते हुए इसे प्रति 1 लाख पर 70 की मृत्यु दर तक लाने का है।
  • इसके अलावा एसडीजी-2.1 कार्यक्रम का ध्येय भी उस साल तक सभी तरह के कुपोषण को खत्म करने का है। इन लक्ष्यों की पूर्ति के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को स्वास्थ्य-आधारभूत ढांचे और स्वास्थ्य-सेवाओं में बड़े पैमाने पर प्रयास करके इनका स्तर ऊंचा करने की जरूरत है।

क्या मात्र आर्थिक तरक्की से स्वास्थ्य सुधरेगा

मजदूरों का एक दिन :मजदूर दिवस

 एक मई को दुनिया के ज्यादातर देशों ने मेहनतकशों के नाम समर्पित कर रखा है. इसे मई दिवस, मे डे, मजदूर दिवस तमाम नामों से जाना जाता है. भारत में पहली बार एक मई 1923 को मई दिवस मनाया गया था. तब हिंदुस्तान किसान पार्टी ने मद्रास में इसे मनाया था.

- आज दनिया के 80 से ज्यादा देश मई दिवस के दिन राष्ट्रीय छुट्टी रखते हैं. कुछ देशों में इसे अलग-अलग तारीखों को भी मनाया जाता है.

=>मजदूर दिवस का अतीत :-

धार्मिक स्थलों पर हादसों को कैसे रोका जाए

धार्मिक स्थलों पर दुर्घटनाओं की वजह- बढ़ती भीड़, कानून की अवहेलना और कुप्रबंधन है। धार्मिक स्थलों में अतिशबाजी पर प्रतिबंध के साथ ही सुरक्षा, जांच व उपचार की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए।

सड़क दुर्घटना व सड़क सुरक्षा

  • सड़क दुर्घटनाओं में हताहत होने वालों की बढ़ती संख्या हमारे सामने बेहद गंभीर रूप में खड़ी है
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2009 में सड़क सुरक्षा पर अपनी पहली वैश्विक स्थिति रिपोर्ट में सड़क दुर्घटनाओं की दुनियाभर में “सबसे बड़े कातिल” के रूप में पहचान की। रिपोर्ट में कहा गया है कि हर साल दुनियाभर में सड़क हादसों में 1.2 मिलियन लोगों की मृत्यु हो जाती है और 50 मिलियन लोग इससे प्रभावित होत