पीडीएस को खत्म कर देगा डीबीटी

DBT & how affecting PDS
#Prabht_Khabar
Jharakhand & Death
झारखंड में हाल ही में हुई भुखमरी से मौतों से जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) की अहमियत उजागर होती है. राज्य में लाखों परिवार भूख की कगार पर रह रहे हैं और जन पीडीएस उनके लिए जीवन की डोर की तरह है. एक हल्के से झटके से यह डोर टूट सकती है और इनको भुखमरी का सामना करना पड़ सकता है. पिछले साल जब पीडीएस में आधार द्वारा अंगूठे का सत्यापन अनिवार्य किया गया, कई लोगों को भुखमरी से जूझना पड़ा है.
DBT & PDS

Over The Barrel: An energy agenda for 2018 


प्रस्तुत आर्टिकल में हम भारत के वर्तमान ऊर्जा परिदृश्य को देखने के साथ-साथ भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को प्रभावित करने वाले राष्ट्रीय तथा वैश्विक पहलुओं पर चर्चा करेंगे| 
वर्तमान सरकार ऊर्जा संबंधी अपने दो लक्ष्यों को लेकर पूरी तरह समर्पित है- 
    पहले उद्देश्य के अंतर्गत सभी के लिए वहनीय ऊर्जा की उपलब्धता को सुनिश्चित करवाना शामिल है जिसके लिए जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता समय की मांग है| 

आहार में विविधता की जरूरत : कुपोषण की समस्या कम करने के लिए

NFSA could be a game changer to tackle malnutrition problem in India but some focussed reform should be implemented to revive this programme.


#Businesss_Standard
Recent context
प्रधानमंत्री ने देश में कुपोषण की समस्या कम करने के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों की गत 25 नवंबर को समीक्षा की। इसमें अधिकारियों ने पोषण के बारे में जागरूकता पैदा करने में मददगार विभिन्न सामाजिक योजनाओं पर जोर दिया। लेकिन एक बड़ा कार्यक्रम है जो इस दिशा में अहम भूमिका निभा सकता है। वह है राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून (एनएफएसए)।

रोजगार पैदा करने के लिए तेज करनी होगी वृद्धि

Need to focus on growth to have meaningful and descent employment


#Businee_Standard
भारत के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना विकास की सबसे बड़ी चुनौती माना जाता है। यह राजनीतिक हलकों में भी विवाद का एक प्रमुख कारण है। आंकड़ेबाज रोजगार पर नोटबंदी के असर को लेकर तर्क-वितर्क कर रहे हैं। लेकिन ये तर्क-वितर्क बेकार हैं क्योंकि रोजगार के आंकड़ों की हमारी प्रणाली वे बारीक सूचनाएं मुहैया नहीं कराती है, जो अल्पकालिक रुझानों को उनकी वजहों से जोडऩे के लिए जरूरी हैं।


No real change in Employment data

क्यों विशेष अदालतों के जरिए अपराधियों को राजनीति से दूर करना उतना आसान नहीं है जितना दिखता है

Union government’s decision to set up 12 special courts to expeditiously try cases against 1,581 lawmakers complements the 2013 Supreme Court judgment that quashed a discriminatory statutory provision, allowing convicted MPs/MLAs to stave off disqualification by securing a stay order from a higher court. Though a few netas were convicted and disqualified after that judgment, realisation dawned that other stages of the criminal justice delivery process like investigation, framing of charges and trial had to move faster to secure convictions

अंतरजातीय शादियों में बढ़ोतरी: क्यों मुख्यधारा की राजनीति के चाहे बिना नहीं हो सकती


Recent context
बाबा साहेब अंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार ने अंतरजातीय शादियों को आर्थिक प्रोत्साहन देने वाली योजना में पांच लाख रुपये की सालाना आय की सीमा खत्म करने का फैसला किया है. 
What was the Scheme
    ‘डॉक्टर अंबेडकर स्कीम फॉर सोशल इंटिग्रेशन थ्रू इंटर कास्ट मैरिज’ नाम की इस योजना के तहत उन दंपतियों को ढाई लाख रुपये दिए जाते हैं जिनमें से कोई एक दलित समुदाय का हो.