2050 तक समुद्र में मछलियों से ज्यादा होगा प्लास्टिक कचरा : रिपोर्ट

प्लास्टिक कचरे को रीसाइकिल करने की नई योजना का भारत समेत 40 से ज्यादा देशों के उद्योगपतियों ने समर्थन किया है।

दरअसल, डर इस बात का सता रहा है कि अगर तुरंत कदम नहीं उठाए गए तो 2050 तक समुद्र में मछलियों से ज्यादा प्लास्टिक हो जाएगी।

इस योजना का उद्देश्य पैकेजिंग में इस्तेमाल हो रही कुल प्लास्टिक की रीसाइक्लिंग को मौजूदा 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 70 प्रतिशत करना है।

इस योजना को एक रिपोर्ट की शक्ल में विश्व आर्थिक मंच (डब्लूईएफ) और एलन मैकआर्थर फाउंडेशन ने प्रस्तुत किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 20 प्रतिशत प्लास्टिक पैकेजिंग को फिर से इस्तेमाल किया जा सकता है।

क़ानून से नहीं बल्कि विकल्प खोजने से ही मिलेगी पोलीथिन से मुक्ति

हर एक कोई यह मानता है कि पॉलीथिन बहुत नुकसान कर रही है, लेकिन उसका मोह ऐसा है कि किसी न किसी बहाने से उसे छोड़ नहीं पा रहा है। देश भर के नगर निगमों के बजट का बड़ा हिस्सा सीवर व नालों की सफाई में जाता है और परिणाम शून्य ही रहते हैं। इसका बड़ा कारण पूरे मल-जल प्रणाली में पॉलीथिन का अंबार होना है।

सेहत और पर्यावरण  पर असर

जल संरक्षण : अनुपम मिश्र की बयान से

यदि अधिकांश भारतीयों के भाग्य का फैसला अभी भी मॉनसून की मेहरबानी पर ही निर्भर करता है तो काफी हद तक इसकी वजह यह भी है कि हमने जल संरक्षण के पंरपरागत तौरतरीकों को भुला दिया है।

जलवायु परिवर्तन से कृषि पर असर

किसानों की आय को दोगुना करने और खाद्य सुरक्षा की राह में जलवायु परिवर्तन सबसे बड़ा रोड़ा बनकर खड़ा हो गया है, जिसका असर साल दर साल दिखाई देने लगा है। खेती के विभिन्न आयामों को पुख्ता बनाने की दिशा में जलवायु परिवर्तन के चलते बढ़ते तापमान से सबसे अधिक खतरा है|

जैव विविधता को सुरक्षित रखने के लिए भारत की तरफ से कदम

भारत उन कुछ देशों में शामिल है, जिनने समय रहते कृषि-जैव विविधता के महत्त्व को समझा है और पर्याप्त पहले ही उपचार उपायों की शुरुआत की है। कृषि-जैव विविधता के संरक्षण के काम में लगे संस्थानों के अलावा भारतीय किसानों ने भी खाद्यान्न और अन्य फसलों की परंपरा संरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाई है। उदाहरण के तौर पर

सार्वजनिक स्थल पर कचरा फेंकने वालों पर 10 हजार रुपये जुर्माना

क्यों खबरों में

नेशनल ग्रीन टिब्यूनल (एनजीटी) ने सार्वजनिक स्थल पर कचरा फेंकने वालों पर 10 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान किया है

क्या कहा NGT ने :

माइक्रोबीड्स या माइक्रो प्लास्टिक

Why in news:

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सौंदर्य प्रसाधनों और शारीरिक देखभाल के उत्पादों में इस्तेमाल किए जाने वाले माइक्रो प्लास्टिक के प्रयोग पर प्रतिबंध की मांग करने वाली याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा है। याचिका में कहा गया है कि माइक्रो प्लास्टिक का इस्तेमाल जलीय जीवन और पर्यावरण के लिए खतरनाक है।

Where are they used: