पृथ्वी मातृ को बचाने के लिए भारत की पहल

संयुक्त राष्ट्र 22 अप्रैल को एक विशेष दिवस के रूप में पृथ्वी मातृ दिवस मनाता है। 1970 में10000 लोगों के साथ प्रारंभ किये गये इस दिवस को आज 192 देशों के एक अरब लोग मनाते  हैं। इसका बुनियादी उद्देश्य पृथ्वी की रक्षा और भविष्य में पीढ़ियों के साथ अपने संसाधनों को साझा करने के लिए मनुष्यों को उनके दायित्व के बारे में जागरूक बनाना है।

टाइगर रिज़र्व के बफर क्षेत्र से हटाई जाएंगी मानव बस्तियां

  • बाघों के निवास के नाजुक माने जा रहे क्षेत्रों या उनके रिज़र्व के मुख्य क्षेत्रों (बफर क्षेत्र) में स्थित मानव बस्तियों और वहां रहने वाले आदिवासियों को जल्दी ही दूसरी जगह स्थानांतरित किया जायेगा.
  • राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकार (एनटीसीए) ने सभी 50 टाइगर रिज़र्व को निर्देश दिया है।
  • एनटीसीए ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत आदिवासियों और पहाड़ी गांवों को स्थानांतरित करने की दिशा में कार्य कर रहा है।
  • एनटीसीए ने कहा है कि वन्यजीव निवास क्षेत्रों की अधिसूचना के लिए दिशानिर्देश के अभाव में बाघों के निवास क्षेत्रों में मनुष्यों के निवास का अधिकार लाग

देश में होगा वैकल्पिक ईधन मेथनॉल का व्यापक प्रयोग, दौड़ेंगे रेल इंजन

  • देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जानेवाली भारतीय रेल के एक बड़े हिस्से में आज भी डीजल इंजन चल रहे हैं। इससे पर्यावरण तो प्रदूषित हो ही रहा है, अर्थव्यवस्था पर भी भार पड़ रहा है। डीजल की उपलब्धता के लिए बड़ी रकम खर्च करनी पड़ रही है।
  • ऐसे में निकट भविष्य में मेथनॉल इसका महत्वपूर्ण विकल्प होगा। रेलगाड़ियों के इंजन मेथनॉल से चलेंगे।
  • हाई पावर डीजल इंजन को मेथनॉल से चलनेवाले इंजन में बदल दिया जाएगा। 
  • पड़ोसी मुल्क चीन में ईंधन से चलनेवाले वाहनों में तकनीकी बदलाव कर मेथनॉल से चलने लायक बनाया है। स्वीडन में पानी के जहाज में भी यह तकनीक कारगर साबित हो चुकी है। इसलिए भारत म

महासागरों में प्लास्टिक कचरा

  • संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण प्रोग्राम के मुताबिक, विभिन्न महासागरों में सालाना 80 लाख टन से ज्यादा प्लास्टिक कचरा बहाया जाता है।
  • यह औसतन हर मिनट कचरे का एक ट्रक महासागर में खाली करने जैसा है।
  • इस दर से 2050 में महासागरों में फेंके गए प्लास्टिक कचरे का वजन सभी मछलियों के कुल वजन से भी ज्यादा हो जाएगा।
  • महासागरों में प्लास्टिक कचरा फेंकने के मामले में भारत अग्रणी देशों में है। 

विकास का मौजूदा मॉडल : मानव जीवन और पर्यावरण के लिए कितना बेहतर !

  • विकास के अर्थ बहुआयामी धारणाओं से जुड़ते हैं, लेकिन वर्तमान युग में यह धारणा एक छोटे से दायरे में सिमट कर रह गई है.
  •  विश्व बैंक के अनुसार स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, पानी वगैरह जैसी मूलभूत सुविधाएं समान रूप से नागरिकों को उपलब्ध कराना ही विकास है.
  •  वास्तव में, विकास का उद्देश्य मानव के जीवन स्तर को बेहतर करना ही होता है, लेकिन उसके मूल में प्रकृति का भी साथ होता है क्योंकि हमारा पर्यावरण स्वच्छ रहेगा तभी हमारा स्वास्थ्य भी बेहतर रह सकेगा.

ई-कचरा और उससे जुड़े हुए खतरे बढ़ाती हुई इलेक्ट्रॉनिक्स वस्तुएं

  • अभी भारत में एक अरब से ज्यादा मोबाइल ग्राहक हैं. मोबाइल सेवाएं शुरू होने के 20 साल बाद भारत ने एक आंकड़ा पिछले साल जनवरी में पार किया था. हालांकि पड़ोसी चीन यह करिश्मा 2012 में ही कर चुका है, पर दुनिया में फिलहाल चीन और भारत ही दो ऐसे देश हैं, जहां एक अरब से ज्यादा लोग मोबाइल फोन से जुड़े हैं.

प्रदूषण हर साल पांच साल से छोटे 17 लाख बच्चों की जान ले रहा है : डब्ल्यूएचओ

Ø  प्रदूषण के चलते हर साल दुनिया में पांच साल से कम उम्र के 17 लाख बच्चों की मौत हो जाती है. यह आंकड़ा इस आयु वर्ग में हर साल होने वाली मौतों का करीब एक चौथाई है. 

Ø   दो रिपोर्टों में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने यह बात कही है कि प्रदूषित हवा और पानी, साफ-सफाई की कमी और प्रतिकूल माहौल में रहने के चलते बड़ी संख्या में बच्चों की मौत हो रही है

परियोजनाओं को मंजूरी देने के दौरान इसके पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों की अनदेखी: CAG

Ø  नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (सीएजी) ने परियोजनाओं को पर्यावरण मंजूरी देने में कई खामियां पाई हैं.

Ø  संसद में पेश सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि पर्यावरण मंजूरी दिए जाने से पूर्व इन परियोजनाओं के प्रभावों का सही मूल्यांकन नहीं किया जा रहा है.

Ø  साथ ही पर्यावरण मंत्रालय परियोजना को जिन शर्तों के आधार पर मंजूरी देता है, कंपनियां उनका भी पालन नहीं करती. रिपोर्ट में सरकार की ओर से परियोजनाओं की निगरानी के लिए पुख्ता तंत्र नहीं होने की भी बात कही है.

भारत में अम्लीय वर्षा (Acid Rain) : पिछले 10 सालों के दौरान बारिश के पानी में एसिड की लगातार बढ़ रही है मात्रा

बारिश का पानी काफी उपयोगी माना जाता है, लेकिन प्रदूषण का असर इस पर भी दिखना शुरू हो गया है। वायुमंडल में बढ़ते प्रदूषण के कारण अब बारिश का पानी भी प्रदूषित हो रहा है और अब कई राज्यों में एसिड रेन के रूप में सामने आ रहा है। एक रिसर्च में यह चौंकाने वाले तथ्‍य सामने आए हैं।

अब देशभर के जानवरों का होगा अपना यूनीक आधार नंबर, उनमें लगाए जाएंगे माइक्रो चिप्स

★ माइक्रो चिप्स के जरिए सभी पर आसानी से नजर रखी जा सकेगी और साथ ही उन्हें शिकारियों से सुरक्षित रखा जा सकेगा।

★देशभर में जिस प्रकार इंसानों को उनका आधार कार्ड के रूप में यूनीक नंबर दिया गया है उसी तरह अब जानवरों का भी आधार कार्ड बनवाया जाएगा।

★ सेंट्रल जू अथॉरिटी द्वारा एक अभियान चलाया जा रहा है जिसमें जानवरों के शरीर में एक माइक्रो चिप लगाई जाएगी। इस चिप को लगाने के बाद कोई कहीं से भी जानवरों के बारे में हर प्रकार की जानकारी ले सकता है।