दिल्ली में BS-6 ईंधन अब अप्रैल 2018 से ही बिकेंगे


स्मॉग और प्रदूषण की समस्या से बेहाल दिल्ली को उबारने के लिए केंद्र सरकार ने BS-6 ईंधन को तय समय से दो साल पहले ही बिक्री के लिए बाजार में उतारने का फैसला किया है.
    सरकार के अनुसार अब दिल्ली में अप्रैल 2020 के बजाय अप्रैल 2018 से ही बीएस-6 ईंधन बेचे जाएंगे.
    इसके एक साल बाद अप्रैल 2019 से इन्हें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र यानी एनसीआर इलाके के लिए अनिवार्य कर दिया जाएगा. हालांकि यह बदलाव केवल ईंधन के लिए हुआ है, वाहनों के इंजन के लिए नहीं.

जर्मनवॉच  नामक संस्था के change performance index में इस बार भारत की रैकिंग में काफी सुधार

 

पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर काम करने वाली जर्मन संस्था जर्मनवॉच के सर्वेक्षण के अनुसार ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को घटाने के मामले में भारत की रैंकिंग पिछले साल के मुकाबले छह स्थान सुधर गई है.

दिल्ली में क्यों छाई है जहरीली धुंध, जानें वजह और उपाय

Delhi is under grip of pollution and this

- दिल्ली में जहरीली धुंध छा गई है. इससे हर कोई परेशान है. धुंध की वजह से लोगों का बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है. धुंध के चलते दिल्ली-एनसीआर में मेडिकल इमरजेंसी जैसे हालात बनने लगे हैं. जानें ये जहरीली धुंध क्यों छाई है और इससे बचने के क्या उपाय हैं.

ग्रीनहाउस गैसों के आकलन में कार्बन डाईऑक्साइड के स्तर को लेकर चिंताजनक तस्वीर

 

ग्लोबल वार्मिंग के लिए जिम्मेदार ग्रीनहाउस गैसों के आकलन में कार्बन डाईऑक्साइड के स्तर को लेकर चिंताजनक तस्वीर सामने आई है.

 पूरे विश्व में प्रदूषण से होने वाली असामायिक मृत्यु के संदर्भ में भारत पहले स्थान

According to a report by The Lancet Commission on pollution and health With 2.51 million deaths in 2015, India has been ranked No. 1 in pollution related deaths,
    प्रतिष्ठित जर्नल लैंसेट के ताजा अंक में प्रकाशित एक अध्ययन में बताया गया है कि वर्ष 2015 के दौरान पूरे विश्व में 90 लाख से अधिक व्यक्तियों की असामयिक मृत्यु केवल प्रदूषण के कारण हुई, 

शहर की समस्या और ग्रामीण विकास

प्रत्येक व्यक्ति न केवल एक परिवार से अपितु समुदाय से भी संबंध रखता है। समुदाय की दो विशेषता मानी गई है एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र एवं इसके सदस्यों के बीच ' हम की भावना ' गाँव और शहर समुदाय के दो रूप हैं। समुदाय के सदस्य सामान्य रूप से इसमें स्थायी रूप से निवास करते है।समुदाय का भाव अपने पास-पड़ोस से आरम्भ होकर कुछ अंश तक 'हम-भावना' से सामाजिक वर्ग तक फैलता है। किसी भी संस्कृति की पूर्ण अभिव्यक्ति समुदायों के अंतर्गत ही होती है।