जल्लीकट्टू के बचाव में कंहा तक उचित है देसी नस्लों के संरक्षण की दलील

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चेन्नई के मरीना बीच पर बैलों से जुड़े पारंपरिक खेल जल्लीकट्टू पर लगे प्रतिबंध को हटाने को लेकर विरोध प्रदर्शन चला। अब यह शांत हो चुका है|

क्या प्रतीकात्मक रीतियों के साथ हमें बने रहना चाहिए

भारी मात्रा में फैले तेल की वजह से समुद्री जीवों पर संकट

खबरों में

तमिलनाडु के एन्नोर के पास कामराजार समुद्र तट के निकट पिछले दिनों दो मालवाहक जहाजों की टक्कर के बाद तेल रिसाव| एक जलपोत में पेट्रोलियम तेल भरा था और दूसरा एलपीजी गैस उतार कर वापसी के रास्ते में था।

प्रभाव 

वन्यजीवों पर मंडराता संकट

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हाल ही खबरों में

हाल ही में उत्तर प्रदेश के अमेठी में एसटीएफ ने पुलिस व वन विभाग की टीम के साथ मिल कर एक ट्रक से तस्करी के लिए जा रहे 4.40 टन कछुओं को पकड़ा। देश में अब तक कछुओं की तस्करी का यह सबसे बड़ा मामला बताया जा रहा है। बरामद कछुओं की कीमत दो करोड़ से भी अधिक बताई जा रही है। दरअसल, कछुओं की लगभग दो सौ प्रजातियां होती हैं लेकिन हमारे देश में पचपन प्रजातियां ही पाई जाती हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण ही है कि आज वन्यजीवों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

2050 तक समुद्र में मछलियों से ज्यादा होगा प्लास्टिक कचरा : रिपोर्ट

प्लास्टिक कचरे को रीसाइकिल करने की नई योजना का भारत समेत 40 से ज्यादा देशों के उद्योगपतियों ने समर्थन किया है।

दरअसल, डर इस बात का सता रहा है कि अगर तुरंत कदम नहीं उठाए गए तो 2050 तक समुद्र में मछलियों से ज्यादा प्लास्टिक हो जाएगी।

इस योजना का उद्देश्य पैकेजिंग में इस्तेमाल हो रही कुल प्लास्टिक की रीसाइक्लिंग को मौजूदा 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 70 प्रतिशत करना है।

इस योजना को एक रिपोर्ट की शक्ल में विश्व आर्थिक मंच (डब्लूईएफ) और एलन मैकआर्थर फाउंडेशन ने प्रस्तुत किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 20 प्रतिशत प्लास्टिक पैकेजिंग को फिर से इस्तेमाल किया जा सकता है।

क़ानून से नहीं बल्कि विकल्प खोजने से ही मिलेगी पोलीथिन से मुक्ति

हर एक कोई यह मानता है कि पॉलीथिन बहुत नुकसान कर रही है, लेकिन उसका मोह ऐसा है कि किसी न किसी बहाने से उसे छोड़ नहीं पा रहा है। देश भर के नगर निगमों के बजट का बड़ा हिस्सा सीवर व नालों की सफाई में जाता है और परिणाम शून्य ही रहते हैं। इसका बड़ा कारण पूरे मल-जल प्रणाली में पॉलीथिन का अंबार होना है।

सेहत और पर्यावरण  पर असर

जल संरक्षण : अनुपम मिश्र की बयान से

यदि अधिकांश भारतीयों के भाग्य का फैसला अभी भी मॉनसून की मेहरबानी पर ही निर्भर करता है तो काफी हद तक इसकी वजह यह भी है कि हमने जल संरक्षण के पंरपरागत तौरतरीकों को भुला दिया है।

जलवायु परिवर्तन से कृषि पर असर

किसानों की आय को दोगुना करने और खाद्य सुरक्षा की राह में जलवायु परिवर्तन सबसे बड़ा रोड़ा बनकर खड़ा हो गया है, जिसका असर साल दर साल दिखाई देने लगा है। खेती के विभिन्न आयामों को पुख्ता बनाने की दिशा में जलवायु परिवर्तन के चलते बढ़ते तापमान से सबसे अधिक खतरा है|