सारी दुनिया के लिए समस्या बना कूड़ा स्वीडन के लिए इतना कीमती क्यों हो गया है?

सन्दर्भ:- कचड़ा प्रबंधन और बायो ऊर्जा के रूप में मीथेन का प्रयोग। (स्वीडन को इन दिनों दूसरे देशों से कूड़ा आयात करना पड़ रहा है)

 

 एक तरफ भारत है जहां कूड़े को निपटाना एक बड़ी समस्या बना हुआ है तो दूसरी तरफ दुनिया में एक देश ऐसा भी है जो कूड़े के लिए तरस रहा है. खबर आई है कि यूरोप के उत्तरी कोने में स्थित स्वीडन को इन दिनों बाकी देशों से कूड़ा मंगाना पड़ रहा है.

बाघों की मृत्यु दर और उनके अस्तित्व पर बढ़ता खतरा

देश में बाघों की संख्या एक बार फिर खतरनाक तेजी से कम होने लगी है। नैशनल टाइगर कंजरवेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनटीसीए) के आंकड़ों के अनुसार इस साल देश भर में अभी तक 78 बाघ मर चुके हैं। यह संख्या पिछले 15 सालों में सबसे ज्यादा है।

सड़कों से हटें बंद पड़े पुराने वाहन : NGT

नेशनल ग्रीन टिब्यूनल (एनजीटी) ने दिल्ली पुलिस व सिविक एजेंसियों को दिया यह निर्देश की  राजधानी में वर्षो पुराने ऐसे वाहन जो अब बंद पड़े हैं, लोग जिनका इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, उन्हें सड़कों से हटाया जाए।

क्या कहा पीठ ने :

जातीय संघर्ष में परिवर्तित होता जल संकट

पानी हजारों सालों से विभिन्न समाजों की अनिवार्य आवश्यकता रहा है। भारत में पिछले दो दशकों में यह बहुत विचित्र रूप में सामने आई है।

मानव जानवर संघर्ष

सन्दर्भ :

घटना गुड़गांव के सोहना कस्बे से सटे मंडावर गांव में जब ग्रामीण लोगो ने मिलकर एक तेंदुए को मार डाला | यह एक नहीं बल्कि इसी तरह के अन्य संघर्षो में से एक है

क्यों तेंदुए बाहर आ रहे है :

ज़हरीली हवा से भारत में मरने वालों की संख्या चीन से ज्यादा हुई: रिपोर्ट

ग्लोबल बर्डन ऑफ डिज़ीज़ (जीबीडी) के मुताबिक पिछले साल वायू प्रदूषण ने भारत में मरने वालों की संख्या चीन से ज़्यादा हो गई. 

What is this report all about:ग्लोबल बर्डन ऑफ डिज़ीज़ (जीबीडी) एक क्षेत्रीय और वैश्विक शोध कार्यक्रम है जो गंभीर बीमारियों, चोटों और जोखिम कारकों से होने वाले मौत और विकलांगता का आकलन करता है।

Key findings:

2017 के जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक में भारत 20वें नंबर पर

वर्ष 2017 के जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक (सीसीपीआई) में भारत को इस साल 20वां स्थान मिला है. सीसीपीआई सूचकांक में भारत की इस रैंकिंग को सकारात्मक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है.

साफ़ पर्यावरण और हवा के लिए गंभीर प्रयासों की जरुरत

साल 2014-15 की सर्दियों के करीब 34 फीसदी दिनों में वायु प्रदूषण गंभीर स्तर तक पहुंच गया था। सरकार के अपने सूचकांकों के मुताबिक इस तरह की स्थिति न केवल कमजोर बल्कि सभी लोगों के स्वास्थ्य के लिहाज से चुनौतीपूर्ण है। उसके अगले साल की सर्दियों में तो करीब 68 फीसदी दिनों में वायु प्रदूषण गंभीर स्तर पर था। साल 2016-17 की सर्दियों की तो अभी शुरुआत ही हुई है और हमें कई दिनों तक छाई रही धुंध के रूप में वायु प्रदूषण की गंभीरता का आभास बखूबी हो चुका है।

कदम उठाने की जरुरत

पुआल के इस्तेमाल से मिलेगी धुंध से निजात

पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के अलावा पाकिस्तान के पश्चिमी पंजाब के कुछ इलाकों की पुआल आधारित खेती प्रणाली का दिल्ली के प्रदुषण  से नजदीकी नाता है|

समय के साथ विकराल होती पुआल की समस्या :