अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के हब्बल स्पेस टेलीस्कोप की मदद से जीवन की संभावना वाले दो ग्रहों का पता लगाया गया है।
इनका आकार तकरीबन पृथ्वी जितना ही है।1खगोल वैज्ञानिकों ने इसे ट्रैपिस्ट-1बी और ट्रैपिस्ट-1सी का नाम दिया है।
ये दोनों पृथ्वी से 40 प्रकाश वर्ष दूर हैं।
जीवन की संभावना के कारण : … Read More
★पांच साल पहले फ्लोरिडा के केप केनवेराल से प्रक्षेपित नासा के मानवरहित अंतरिक्षयान जूनो ने पहुंचने से पहले 2.7 अरब किलोमीटर का सफर तय किया है।
★नासा का सौर-ऊर्जा से संचालित अंतरिक्षयान जूनो पृथ्वी से प्रक्षेपण के पांच साल बाद (5 जुलाई) को बृहस्पति की कक्षा में प्रवेश कर गया।
★इस उपलब्धि को ग्रहों… Read More
अंतरिक्ष यान जूनो को बृहस्पति की कक्षा में स्थापित किया जाना है. अभियान का मकसद सौरमंडल के निर्माण के बारे में साक्ष्य जुटाना है
जूनो बृहस्पति के कोर का पता लगाने के लिए उसके चुंबकीय और गुरुत्वीय क्षेत्रों का नक्शा खींचेगा. साथ ही यह ग्रह की बनावट, तापमान और बादलों को भी मापेगा और पता लगाएगा कि… Read More
- देश में बने पहले लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LAC) तेजस को एयरफोर्स में शामिल कर लिया गया। फाइटर को IAF में शामिल करने के लिए बाकायदा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा की गई। फिलहाल 2 तेजस फाइटर एयरफोर्स के बेड़े में शामिल हुए हैं। 1983 में एलसीए (लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई थी।… Read More
- भारत का पहला एकीकृत रक्षा संचार नेटवर्क शुरू किया गया जिसकी मदद से थलसेना, वायु सेना, नौसेना और विशेष बल कमान शीघ्र निर्णय लेने की प्रक्रिया के लिए परिस्थिति के अनुसार जानकारी साझा करेंगे।
- सामरिक एवं अत्यंत सुरक्षित रक्षा संचार नेटवर्क (डीसीएन) की पहुंच लद्दाख से लेकर पूर्वोत्तर और द्वीप… Read More
हाल ही की खबरों में
इसरो ने श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से पोलर सैटेलाइट लांच वीकल की सहायता से सत्रह विदेशी उपग्रहों सहित कुल बीस उपग्रह एक साथ प्रक्षेपित कर बड़ी कामयाबी हासिल की है।
इस बार बीस उपग्रहों को एक साथ प्रक्षेपित करके इसरो ने नया रिकार्ड बनाया।
इन उपग्रहों में अमेरिका,… Read More
=>ब्रेन इमेजिंग तकनीक
- सीटी स्कैन, एमआरआई, पीईटी, एसपीईसीटी आदि ब्रेन इमेजिंग तकनीक हैं, जिनके जरिए सेरेब्रल ब्लड फ्लो, मेटाबॉलिज्म का पता लगाया जाता है, जबकि क्यूईईजी के जरिए ब्रेन की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी मापी जाती है। इलेक्ट्रिकल कनेक्टिविटी और फ्लो में गड़बड़ी समस्या की शुरुआत का संकेत… Read More
- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से संबद्ध भारतीय दलहन अनुसंधान केंद्र (आईआईपीआर) कानपुर के विशेषज्ञों ने अरहर की नई किस्म विकसित की है।
- यह अन्य किस्मों की तुलना में दो गुना प्रति हेक्टेयर ज्यादा उत्पादन देगी। मौजूदा समय में उपलब्ध दालों की किस्म 9-10 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन देती है। आईआईपीआर… Read More
