युवाओं की मौलिक सोच को प्रभावित करता इंटरनेट

मुद्दा:

  • विदेश से नियंत्रित सोशल मीडिया भारतीय युवाओं की पहचान, मूल्यों और आत्मसम्मान को तेजी से प्रभावित कर रहा है। दिशानिर्देश की कमी ऐसे युवाओं को जन्म दे रही है, जो साधारण मुद्दों पर भी चर्चा नहीं कर सकते हैं। उनमें मौलिक सोच की क्षमता का अभाव होता जा रहा है और वे गंभीर रूप से सोचने के बजाय भावुक हो जाते हैं। वे आक्रामक और आधारहीन राय को ढाल बनाकर अपनी बौद्धिक दुर्बलता को छिपाते हैं।

भारतीय मानस पर पश्चिमी प्रभाव:

  • ऐतिहासिक कारणों मनोवैज्ञानिक असुरक्षा के कारण भारत अपने आदर्शों का अनुसरण नहीं कर रहा है। इससे भारतीयों का मनोवैज्ञानिक पतन हो रहा है। आधुनिक भारत में धार्मिक और सामाजिक ताना-बाना कमजोर हो गया है, जिससे वह अपनी परम्परा से विमुख हो गया है।
  • भारतीयों ने पश्चिमी आदर्शों का पीछा किया, जिससे हमने अपनी नींव खो दी। भारत अपनी पाश्चात्य महागाथाओं के बीच फंसा है। पश्चिमी उपभोक्तावाद अब भारत की संस्कृति में- विशेषकर युवा और शहरी आबादी में- पूरी तरह से व्याप्त हो गया है।
  • भारतीय तत्काल संतुष्टि और अपने साधनों से बढ़कर जीवन जीने के लिए ऋण के उपयोग जैसे पश्चिमी मूल्यों से प्रभावित हुए हैं, जिनकी एक समय भारतीय समाज में निंदा की जाती थी। पिछली पीढ़ियों के समय में लोगों से अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करने की उम्मीद की जाती थी। इसके विपरीत आज के युवा बिना मेहनत के ही सारी इच्छाएं पूरी करना चाहते हैं।

सोशल मीडिया का परिदृश्य:

  • पारम्परिक स्रोतों, ग्रंथों और संदर्भ-बिंदुओं का विनाश भारतीयों की आत्म-छवि में एक शून्य पैदा करता है, जिससे डिजिटल प्लेटफार्मों को अपने स्वयं के सिद्धांतों को आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म- सुर्खियों में आने के लिए चल रही होड़ में- लोकप्रियता और पहचान का एक आसान मार्ग प्रदान करते हैं।
  • असंख्य फॉलोअर्स होने से पहचान, पुरस्कार और हाई-प्रोफाइल नियुक्तियां मिलती हैं। जनता के पास मजबूत सामाजिक नेटवर्किंग कौशल वाले वाकपटु वक्ताओं और वास्तविक परिवर्तन को प्रभावित करने के लिए कड़ी मेहनत करने वाले लोगों के बीच अंतर करने की क्षमता नहीं बची है।
  • अमेरिकीकरण का डिजिटल रूप सोशल मीडिया पर सक्रिय होकर अपने निजी डाटा को बिग डाटा में मिलाना है- जिससे वैश्विक मंच पर पहुंचने का एहसास होता है। हमने सोशल मीडिया को जरूरत से अधिक महत्व दे दिया है।
  • अंग्रेजों ने भारतीयों का शोषण करते हुए भी उनके कुछ त्योहारों और रीतियों से दिखावटी प्रेम दिखाकर मूल निवासियों का दिल जीत लिया था। ऐसे समाज का अनुचित लाभ उठाना और उसे नियंत्रित करना आसान होता है।
  • पश्चिमी सोच मानती है कि भारतीयों को झूठी भावनात्मक विजय दे दी जाए, तो उनका ध्यान वास्तविक मुद्दों से हट जाएगा। अंग्रेज जब भारतीय राजाओं को हाथी पर बैठाकर बंदूक की सलामी देते थे तब वो मनोवैज्ञानिक नियंत्रण का उपयोग करते थे।
  • अमेरिकियों की नकल भारतीय गलत तरीके से करते हैं- उनके खाने, बात करने और कपड़े पहनने की आदतों की नकल, अभद्र भाषा की नकल; नशीले पदार्थों का सेवन। कई नारीवादी अपनी मुक्ति के मार्ग के रूप में श्वेत नारियों की नकल करते हैं। जबकि अमेरिकियों में कुछ गहरे मूल्य और दृष्टिकोण भी हैं, जैसे आत्म-अनुशासन मजबूत कार्य-संस्कृति।
  • शहरी युवा अमेरिका की नकल करते हैं, वहीं गांव के युवा शहरियों जैसा बनने की इच्छा रखते हैं। शहरी युवा भावी अमेरिकी हैं और गांव के युवा भावी शहरी। प्रवासी श्रमिक अपने शहर के जीवन की कहानियां गांव के दोस्तों को बताते हैं। सोशल मीडिया से पहले के समय में ऐसे प्रभाव धीरे-धीरे पहुंचते थे, लेकिन आज ये बिजली की गति से सब जगह पहुंच जाते हैं।

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