प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का एक आंकलन

  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना यानी पीएमएफबीवाई ने असर दिखाना शुरू कर दिया है।
  • सरकार की इस योजना से खरीफ 2016 में फसल बीमा कराने वाले किसानों की संख्या 20 प्रतिशत बढ़ी है।
  • यही नहीं, समय पूरा होने से पहले ही बड़ी संख्या में किसानों को बीमा की राशि तात्कालिक राहत के तौर पर मिलने लगी है।
  • उत्तर प्रदेश है में खरीफ मौसम में बाढ़ या अत्यधिक वर्षा होने के चलते फसल नुकसान होने पर 71,679 किसानों को बीमा दावा की राशि मिली है। खास बा

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा 2017 में उठाए गए महत्वपूर्ण कदम

केंद्रीय कृषि एंव किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा पिछले 30 महीनों में उठाए गए महत्वपूर्ण कदम निम्नलिखित हैं :-

 1. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना:

2.स्वायल हैल्थ कार्ड:

3.  परंपरागत कृषि विकास योजना: जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए 

जलवायु परिवर्तन से कृषि पर असर

किसानों की आय को दोगुना करने और खाद्य सुरक्षा की राह में जलवायु परिवर्तन सबसे बड़ा रोड़ा बनकर खड़ा हो गया है, जिसका असर साल दर साल दिखाई देने लगा है। खेती के विभिन्न आयामों को पुख्ता बनाने की दिशा में जलवायु परिवर्तन के चलते बढ़ते तापमान से सबसे अधिक खतरा है|

कैसे जड़ी बूटियाँ हो सकती है छोटे किसानो के समावेशी विकास में सहायक

देश में औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती छोटे किसानों के लिए क्रांतिकारी कदम हो सकती है। इससे उन किसानों की अतिरिक्त आमदनी हो सकती है जो खासकर असिंचित और खराब गुणवत्ता वाली जमीन पर खेती करते हैं। इनमें से अधिकांश पौधों का इस्तेमाल परंपरागत और निर्धारित औषधि, प्रसाधन सामग्री और इत्र बनाने में होता है।

परिवर्तनशील जलवायु के तहत एक चुनौती के रूप में उभर रहे जैविक दबाव

जैविक दवाब का अर्थ है ऐसे रोग, कीट- नाशीजीव और खरपतवार जो की जीवों (पौधे पशु और मनुष्य) के सामान्य विकास को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करते है।

खाद्य प्रबंधन की बदइंतजामी और व्यर्थ जाते फल और सब्जिया

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) की एक अध्ययन रिपोर्ट के अनुfood wasteसार खाद्य प्रबंधन की बदइंतजामी के चलते खेत से खलिहान और यहां से उपभोक्ताओं तक पहुंचने के पहले ही लगभग एक लाख करोड़ रुपये मूल्य के फल, सब्जियां और अन्य खाद्य वस्तुएं हर साल सड़कर नष्ट हो जाती हैं

Detail

राष्ट्रीय बोवाइन उत्पादकता मिशन

  • देश मे पहली बार राष्ट्रीय बोवाइन उत्पादकता मिशन के अंतर्गत ई पशुधन हाट पोर्टल स्थापित किया गया है। यह पोर्टल देशी नस्लों के लिए प्रजनकों और किसानों को जोड़ने मे एक महतवापूर्ण भूमिका निभाएगा।
  • इस पोर्टल के द्वारा किसानो को देशी नस्लों की नस्ल वार सूचना प्राप्त होगी।
  •  इससे किसान एवं प्रजनक देशी नस्ल की गाय एवं भैंसो को खरीद एवं बेच सकेंगे।
  • देश मे उपलब्ध जर्मप्लाज्म की सारी सूचना पोर्टल पर अपलोड कर दी गयी है। जिससे किसान इसका तुरंत लाभ उठा सके।
  • इस तरह का पोर्टल विकसित डेयरी देशों मे भी उपलब्ध नहीं है। इ

स्वयं सहायता समूह महिलाओं के सशक्तिकरण का माध्यम

स्वयं सहायता समूह महिलाओं के सशक्तिकरण का माध्यम बन गए हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्र में यह महिलाओं को सशक्त और आर्थिक रूप से सृमद्ध बनाने के लिए एक कारगार माध्यम है।

What is self help group (क्या  है स्वयं सहायता समूह ):