किसानों के लिए कम अवघि के फसल ऋण पर बैंकों के लिए ब्‍याज अनुदान को मंजूरी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वर्ष 2017-18  के लिए किसानों के ब्याज हेतु अनुदान योजना (आईएसएस) को अपनी मंजूरी दे दी है।  इससे किसानों को केवल 4% वार्षिक ब्याज दर पर 1 वर्ष के भीतर भुगतानयोग्य अधिकतम 3  लाख रुपये तक की लघुकालिक फसल ऋण प्राप्त करने में मदद मिलेगी। सरकार  ने इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए 20,339  करोड़  रुपए का प्रावधान किया है।

2016-17 में भारत का सीफूड निर्यात सबसे ज्यादा रहा – एमपीईडीए

अंतरराष्‍ट्रीय बाजारों में फ्रोजन झींगा और फ्रोजन मछली की भारी मांग के मद्देनजर, भारत ने 2016-17 में अब तक का सबसे ज्‍यादा 5.78 अरब अमरीकी डॉलर (37,870.90 करोड़ रूपये) मूल्‍य का 11,34,948 मीट्रिक टन सीफूड का निर्यात किया, जो एक साल पहले 9,45,892 टन और 4.69 अरब डॉलर था। अमरीका और दक्षिण पूर्व एशिया लगातार सबसे ज्‍यादा आयात करने वाले देशों में रहे, जबकि यूरोपीय संघ से मांग में भी इस अवधि में इजाफा हुआ है।

कारोबार बनाम आहार

#Jansatta

Context

वर्ष 2008 की विश्वव्यापी मंदी के बाद शुरू हुई खेती की जमीन के अधिग्रहण की प्रकिया भले ही अब मंद पड़ गई हो लेकिन वैश्विक खाद्य तंत्र पर कब्जा जमाने की प्रवृत्ति में कोई कमी नहीं आई है। छोटी जोतों और स्थानीय खाद्य बाजार की जगह वैश्विक खाद्य आपूर्ति तंत्र स्थापित करने की जो प्रक्रिया दूसरे विश्वयुद्ध के बाद यूरोप-अमेरिका में शुरू हुई थी वह अब तीसरी दुनिया को अपनी गिरफ्त में लेती जा रही है।

सॉयल हेल्थ कार्ड स्कीम से फसल की उत्पादकता में वृद्धि

सॉयल हेल्थ कार्ड स्कीम किसानों के लिए शुरू की गयी एक क्रांतिकारी योजना है जिससे किसानों की खेती और उपज पर काफी फर्क पड़ रहा है। इससे फसल की  उत्पादकता में वृद्धि हो रही है और खेती की लागत कम हो रही है।

About Scheme:

Ø  इस स्कीम का शुभारंभ माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 19 फरवरी 2015 को सूरतगढ़, राजस्थान में किया गया था।

जानें, क्या होती है GM फसल और कैसे होती है तैयार

जेनेटिकली मोडिफाइड (जीएम) फसलों के मामले में भारत लंबे समय से ऊहापोह की स्थिति में है। लेकिन, अब पर्यावरण मंत्रालय की एक कमिटी ने सरसों की जीएम फसल को मंजूरी दी है और इसे सरकार से भी हरी झंडी मिल सकती है।

जीएम फसल क्या होती है और कैसे विकसित किया जाता है ..

परंपरागत तरीकों से सूखे की समस्या को मात देते लोग

#Editorial_Hindustan Times

Drought in Country

अभी देश से मानसून बहुत दूर है और भारत का बड़ा हिस्सा सूखे, पानी की कमी व पलायन से जूझ रहा है। बुंदेलखंड के तो सैकड़ों गांव वीरान होने शुरू भी हो गए हैं।

Ø  एक सरकारी आंकड़े के मुताबिक, देश के लगभग सभी हिस्सों में बड़े जल संचयन स्थलों (जलाशयों) में पिछले साल की तुलना में कम पानी बचा है।