कृषि उत्पादों की उचित मार्केटिंग के लिए सरकार के उपाय

अब यह जरूरी हो गया है कि बाजार, किसान की पहुच के अन्दर हो और उनके और उपभोक्ताओं के बीच कोई बिचौलिया नहीं हो, उपज का मूल्य पारदर्शी तरीके से तय हो और किसान को उनकी उपज का अविलंब भुगतान हो। केन्द्र सरकार इसके लिए देश भर में एक ऐसा ढांचा खड़ा कर रही है जिसमें बाजार सीधे खेत से जुड़ जाएंगे और उपभोक्ता सीधे किसान के खेत से उपज खरीद सकेंगे। 

किसानों के हितों के साथ-साथ अर्थव्‍यवस्‍था में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए विभिन्‍न निर्णय

सरकार ने चालू रबी सीजन में किसानों के हितों के साथ-साथ अर्थव्‍यवस्‍था में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए कुछ विशेष निर्णय लिये हैं। ये निर्णय परिचालनगत उपायों के रूप में हैं, जिनका उल्‍लेख नीचे किया गया है :

ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नोटबंदी का असर

लगातार दो वर्षों के सूखे के बाद इस साल बेहतर मॉनसून की मेहरबानी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आखिरकार सुधार होता दिख रहा था। आशा जताई गई कि खरीफ उत्पादन में भारी बढ़ोतरी से ग्रामीण उपभोग में इजाफा समग्र आर्थिक वृद्घि को तेजी देता। मगर प्रधानमंत्री ने नोटबंदी का जो फैसला किया, वह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बुरी तरह शिकंजे में कस रहा है।

क्यों हुआ असर

वर्ष 2015-16 के अनुमान के अनुसार लगभग रु॰1 लाख करोड़ का मत्स्य उत्पादन देश मे

पुआल के इस्तेमाल से मिलेगी धुंध से निजात

पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के अलावा पाकिस्तान के पश्चिमी पंजाब के कुछ इलाकों की पुआल आधारित खेती प्रणाली का दिल्ली के प्रदुषण  से नजदीकी नाता है|

समय के साथ विकराल होती पुआल की समस्या :

ला-नीना' की ज़द में दुनिया, इस बार सर्दियां होंगी लंबी

पिछले दो-तान सालों की रिकॉर्डतोड़ गर्मी के बाद इस साल पूरे दुनिया में सर्दी अपना असर दिखाएगी. इसकी वजह प्रशान्त महासागर में ला-नीना की हलचल है जिसके और ज्यादा फैलने की आशंका बढ़ रही है.

What is La nina

अल नीनो जिसका सम्बंध भारत में सूखे, बाढ़ और गर्मी से है और इसी के उलट ला-नीना है. प्रशान्त महासागर में बनने वाला अल नीनो और ला-नीना पूरे विश्व के तापमान को प्रभावित करता है।

अब सूखे से प्रभावित न होने वाली कृषि का समय आ गया है

सिचाई पर केन्द्रण क्यों :

सिंचाई क्षेत्र में छह दशकों के निवेश के बावजूद सुनिश्चित सिंचाई के तहत 142 मिलियन हेक्‍टयेर कृषि भूमि में से केवल 45 प्रतिशत ही कवर हो पाई है।

पिछले दो वर्षों में दस राज्‍यों में गंभीर सूखा पड़ा, जिससे कृषि क्षेत्र पर बुरा प्रभाव पड़ा और वस्‍तुओं की कीमते बढ़ी हैं। वर्षा आधारित कृषि भूमि के अतिरिक्‍त छह लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र को सिंचाई के अंतर्गत लाने के लिए योजना के कार्यान्‍वयन के पहले एक वर्ष में पांच हजार तीन सौ करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है

योजना इस सन्दर्भ में

वैश्विक राजस्थान कृषि तकनीक सम्मेलन’(Global Rajasthan agri tech. meet 'GRAM' ):

Objectives                            

  • कृषि से संबंधित प्रौद्योगिकियों के विकास का रास्ता प्रशस्त करना तथा किसान समुदाय के सामने विश्व में कृषि क्षेत्र से संबंधित सर्वश्रेष्ठ पद्धतियों को सामने लाना।
  • किसानों समुदाय को विश्व भर में फैली निवेश प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी प्रदान करना।                         

ग्लोबल एग्रीटेक सम्मेलन में केंद्रीय कृषि मंत्री श्री राधामोहन सिंह ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लिए बनाई गई  योजनाओं का विवरण दिया जो निम्नांकित है-                    

जैविक कृषि

जैविक कृषि एक समेकित कृषि है। इसके द्वारा जैव विविधता, जैविक चक्रण और मृदा जैविक कार्यकलाप संवर्धित होते हैं। जैविक कृषि के द्वारा सिंथैटिक उर्वरकों, विकासगत हार्मोनों, वृद्धिकारक एंटीबायोटिक पदार्थों, सिंथैटिक कीटनाशकों के इस्तेमाल के बिना फसschemeलों और पशुओं के लिए पर्यावरण अनुकूल वातावरण उत्पन्न होता है। 

जैविक कृषि को बढ़ावा देने के लिए सरकार की योजनाए

जैविक कृषि की संभावना देखते हुए सरकार इस क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कृषि कार्यक्रम लागू कर रही है  ताकि यहां के गांव के लोग खुशहाल हो सकें। ये योजनाएं हैं-

फसल अवशिष्ट : संसाधन या प्रदूषक

फसल अवशिष्ट दहन को हाल में भारतीय महानगरो में प्रदूषण वृद्धि के कारको के रूप में स्वीकार किया गया हैं। नवम्बर - दिसम्बर के समय वायु दाब अधिक होने से दहन से प्राप्त प्रदूषकों का संकेन्द्रण एक ही जगह होता रहता हैं , जो समस्या को और भी बढ़ाता हैं। यद्यपि इसका सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव दिल्ली में होता हैं , लेकिन नीचे का मानचित्र दर्शाता हैं यह पूरे भारत की समस्या हैं।

इसके समाधान के लिए, फसल अवशिष्ट को हमें " संसाधन " के रूप में देखना चाहिए। इसके लिए निम्न बिंदु विचारणीय हैं -