चुनाव में धर्म और जाति के इस्तेमाल रोकने के कार्यान्वयन में चुनौती

सुप्रीम कोर्ट ने 21 साल बाद एक बार फिर भारतीय राजनीति के चुनावी मुद्‌दों की आचार संहिता तय करते हुए ऐतिहासिक फैसला दिया है लेकिन, सवाल यह है कि क्या यह फैसला दिशा-निर्देश की तरह काम करेगा या फिर व्यवहार में इसे कानूनी तौर पर लागू किया जा सकेगा?

Ø  अदालत ने कहा है कि चुनाव में कोई भी उम्मीदवार, उसका एजेंट या उम्मीदवार की तरफ से कोई और व्यक्ति मतदाता के धर्म, जाति, नस्ल और भाषा का हवाला देकर न वोट मांग सकता है न किसी को वोट देने से रोका जा सकता है।

मनरेगा में आधार अनिवार्य

  • अप्रैल से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वालों के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत कार्य में आधार अनिवार्य होगा।
  • मनरेगा के तहत पंजीकृत लोगों को प्रमाण के तौर पर आधार नंबर दिखाना होगा।
  • अगर यह नहीं है तो 31 मार्च 2017 तक उन्हें आधार के लिए नामांकन कराने का प्रमाण देना होगा। आधार कार्ड मिलने तक राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आइडी, फोटोयुक्त किसान पासबुक, मनरेगा के तहत जारी जॉब कार्ड और राजपत्रित अधिकारी या तहसीलदार द्व

कार्यान्वयन की चुनौतियां

'कार्ययोजना के अभाव में रणनीति जीत की ओर कदम सुस्त कर देती है। रणनीति के अभाव में कार्ययोजना हार से पहले का इशारा करती है।' मौजूदा नोटबंदी को लेकर मची हाराकिरी में हमें 'द आर्ट ऑफ वार' के इन शब्दों का भान होता है। इस बात पर सर्वानुमति है कि इसका कार्यान्वयन बहुत बड़ी नाकामी साबित हो रहा है। कार्यान्वयन हमेशा से भारत की सबसे बड़ी कमजोरी रही है और नीति निर्माता काफी अरसे से हमारी जटिलता और विविधता से खुद को दिलासा देते आए हैं। 

भारत और कार्यान्वयन की चुनौतियां

उम्मीदवारों को बताना चाहिए आय का स्नोत

चुनाव आयोग ने चुनाव शुचिता से जुड़े एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा है कि उम्मीदवारों को अपने और आश्रितों की आय का स्नोत बताना चाहिए। आयोग का कहना है कि :

Ø  वर्तमान में उम्मीदवार के लिए आमदनी का स्नोत बताना जरूरी नहीं है।

Ø   यहां तक कि यह बताना भी जरूरी नहीं है कि पिछले चुनाव की तुलना में उनकी आमदनी की बढ़ोतरी का स्नेत क्या है।

Ø  अभी मतदाताओं को उम्मीदवार और उनके आश्रितों के पैन नंबर का ही पता होता है।

चुनाव लड़ने पर रोक: गंभीर आरोप तय होने से भी

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सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को उस याचिका पर जल्द सुनवाई को तैयार हो गया है जिसमें गंभीर अपराधों के दोषी पाए गए नेताओं को चुनाव लड़ने से रोकने की मांग की गई है। चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि इस मसले पर जल्द ही संविधान बेंच का गठन किया जाएगा।

Ø  अश्वनी कुमार उपाध्याय ने याचिका दाखिल कर गंभीर अपराध के मामले में आरोप तय होने पर चुनाव लड़ने से रोकने की मांग की है।

उच्चतम न्यायालय ने मांगी देनदारों की सूची

बैंकों के फंसे कर्ज (एनपीए) की वसूली पर सुप्रीम कोर्ट सख्त है। कोर्ट ने कर्ज वसूली टिब्यूनल (डीआरटी) में ढांचागत संसाधनों की कमी पर सरकार से सवाल किए हैं। अदालत ने पूछा है कि क्या मौजूदा संसाधनों में तय समयसीमा के भीतर कर्ज वसूली का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।