'नेशनल हेल्थ पॉलिसी' : सबका होगा फ्री इलाज, स्वास्थ्य नीति को कैबिनेट की मंजूरी"

केंद्र सरकार ने  राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति को मंजूरी दे दी है. इस नीति के जरिए देश में ‘सभी को निश्चित स्वास्थ्य सेवाएं' मुहैया कराने का प्रस्ताव है स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि एक बड़े नीतिगत बदलाव के तहत यह नीति प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) स्तर के दायरे में आने वाले सेक्टरों के फलक को बढ़ाती है और एक विस्तृत रुख का रास्ता तैयार करती है. ‘उदाहरण के तौर पर - अब तक पीएचसी सिर्फ टीकाकरण, प्रसूति-पूर्व जांच एवं अन्य के लिए होते थे.

मातृत्व लाभ संशोधन विधेयक 2016

  • केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री ने सदन में मातृत्व लाभ संशोधन विधेयक, 2016 पेश किया जिसे सदन ने बहुमत से पारित कर दिया
  • 1961 के मूल कानून की जगह संशोधित विधेयक में संगठित क्षेत्र की महिला कामगारों के लिए मातृत्व अवकाश की अवधि बढ़ाने के साथ-साथ कई नए प्रावधान शामिल किए गए हैं.
  • इसके तहत बच्चे को कानूनन गोद लेने वाली महिलाओं के साथ-साथ सरोगेसी यानी उधार की कोख के जरिये संतान सुख पाने वाली महिलाओं को भी कानून के दायरे में लाया गया है

शत्रु संपत्ति (संशोधन) विधेयक को संसद की मंजूरी

In news:

संसद ने विवादास्पद शत्रु संपत्ति (संशोधन और विधिमान्यकरण) विधेयक, 2017 को अपनी मंजूरी दे दी है. विधेयक में संशोधन के राज्यसभा के प्रस्तावों को लोकसभा ने मंगलवार को ध्वनिमत से मंजूर कर लिया. राज्यसभा इसे पहले ही पारित कर चुकी है

In detail

परियोजनाओं को मंजूरी देने के दौरान इसके पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों की अनदेखी: CAG

Ø  नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (सीएजी) ने परियोजनाओं को पर्यावरण मंजूरी देने में कई खामियां पाई हैं.

Ø  संसद में पेश सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि पर्यावरण मंजूरी दिए जाने से पूर्व इन परियोजनाओं के प्रभावों का सही मूल्यांकन नहीं किया जा रहा है.

Ø  साथ ही पर्यावरण मंत्रालय परियोजना को जिन शर्तों के आधार पर मंजूरी देता है, कंपनियां उनका भी पालन नहीं करती. रिपोर्ट में सरकार की ओर से परियोजनाओं की निगरानी के लिए पुख्ता तंत्र नहीं होने की भी बात कही है.

उच्च न्यायालयों में हिंदी व क्षेत्रीय भाषाओं में हो काम : संसदीय समिति की सिफारिश

उच्च न्यायापालिका में अंग्रेजी का वर्चस्व खत्म करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है। कानून एवं कार्मिक मामलों की संसदीय समिति ने देश के सभी 24 उच्च न्यायालयों में हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में भी कामकाज किए जाने की सिफारिश की है।

- अभी सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट की सारी कार्यवाही केवल अंग्रेजी में ही होती है। फैसला भी अंग्रेजी में ही सुनाया जाता है।

- संसदीय समिति का कहना है कि इस बारे में फैसला लेने के लिए संविधान ने केंद्र सरकार को पर्याप्त अधिकार दे रखा है। इसके लिए न्यायपालिका से सलाह लेने की कोई जरूरत नहीं है।

कार्यपालिका आदेश-कानून पर कब हो अदालती दखल?

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भारत में उच्चतर न्यायपालिका में कार्यपालिका के फैसलों की संवैधानिक समीक्षा की सशक्त और सतर्क संस्कृति रही है। कुछ समय पहले ही उच्चतम न्यायालय ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66ए को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इससे स्वतंत्र अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बाधित होने का खतरा है।

कोर्ट के इसे मामलो में निर्णय