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कैसे जड़ी बूटियाँ हो सकती है छोटे किसानो के समावेशी विकास में सहायक

देश में औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती छोटे किसानों के लिए क्रांतिकारी कदम हो सकती है। इससे उन किसानों की अतिरिक्त आमदनी हो सकती है जो खासकर असिंचित और खराब गुणवत्ता वाली जमीन पर खेती करते हैं। इनमें से अधिकांश पौधों का इस्तेमाल परंपरागत और निर्धारित औषधि, प्रसाधन सामग्री और इत्र बनाने में होता है… Read More

परिवर्तनशील जलवायु के तहत एक चुनौती के रूप में उभर रहे जैविक दबाव

जैविक दवाब का अर्थ है ऐसे रोग, कीट- नाशीजीव और खरपतवार जो की जीवों (पौधे पशु और मनुष्य) के सामान्य विकास को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करते है। जैविक दबाव के लिए परपोषी, नाशीजीव औऱ पर्यावरण के बीच हितकारी पारस्परिक संपर्क की आवश्यकता होती है।  इस प्रकार के प्रतिबलो से महामारी के वर्ष में 100… Read More

खाद्य प्रबंधन की बदइंतजामी और व्यर्थ जाते फल और सब्जिया

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) की एक अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार खाद्य प्रबंधन की बदइंतजामी के चलते खेत से खलिहान और यहां से उपभोक्ताओं तक पहुंचने के पहले ही लगभग एक लाख करोड़ रुपये मूल्य के फल, सब्जियां और अन्य खाद्य वस्तुएं हर साल सड़कर नष्ट हो जाती हैं Detail खाद्य वस्तुओं के रखरखाव के… Read More

राष्ट्रीय बोवाइन उत्पादकता मिशन

देश मे पहली बार राष्ट्रीय बोवाइन उत्पादकता मिशन के अंतर्गत ई पशुधन हाट पोर्टल स्थापित किया गया है। यह पोर्टल देशी नस्लों के लिए प्रजनकों और किसानों को जोड़ने मे एक महतवापूर्ण भूमिका निभाएगा। इस पोर्टल के द्वारा किसानो को देशी नस्लों की नस्ल वार सूचना प्राप्त होगी।  इससे किसान एवं प्रजनक देशी… Read More

स्वयं सहायता समूह महिलाओं के सशक्तिकरण का माध्यम

स्वयं सहायता समूह महिलाओं के सशक्तिकरण का माध्यम बन गए हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्र में यह महिलाओं को सशक्त और आर्थिक रूप से सृमद्ध बनाने के लिए एक कारगार माध्यम है। What is self help group (क्या  है स्वयं सहायता समूह ): स्वयं सहायता समूह समान सामाजिक एवं आर्थिक पृष्ठभूमि वाले 10-20 सदस्यों का एक… Read More

कृषि उत्पादों की उचित मार्केटिंग के लिए सरकार के उपाय

अब यह जरूरी हो गया है कि बाजार, किसान की पहुच के अन्दर हो और उनके और उपभोक्ताओं के बीच कोई बिचौलिया नहीं हो, उपज का मूल्य पारदर्शी तरीके से तय हो और किसान को उनकी उपज का अविलंब भुगतान हो। केन्द्र सरकार इसके लिए देश भर में एक ऐसा ढांचा खड़ा कर रही है जिसमें बाजार सीधे खेत से जुड़ जाएंगे और उपभोक्ता… Read More

किसानों के हितों के साथ-साथ अर्थव्‍यवस्‍था में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए विभिन्‍न निर्णय

सरकार ने चालू रबी सीजन में किसानों के हितों के साथ-साथ अर्थव्‍यवस्‍था में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए कुछ विशेष निर्णय लिये हैं। ये निर्णय परिचालनगत उपायों के रूप में हैं, जिनका उल्‍लेख नीचे किया गया है : 1.      नाबार्ड ने रबी सीजन में कृषि संबंधी कार्यकलापों के लिए राज्‍य सहकारी बैंकों… Read More

ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर नोटबंदी का असर

लगातार दो वर्षों के सूखे के बाद इस साल बेहतर मॉनसून की मेहरबानी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आखिरकार सुधार होता दिख रहा था। आशा जताई गई कि खरीफ उत्पादन में भारी बढ़ोतरी से ग्रामीण उपभोग में इजाफा समग्र आर्थिक वृद्घि को तेजी देता। मगर प्रधानमंत्री ने नोटबंदी का जो फैसला किया, वह ग्रामीण अर्थव्यवस्था… Read More

वर्ष 2015-16 के अनुमान के अनुसार लगभग रु॰1 लाख करोड़ का मत्स्य उत्पादन देश मे

भारत मत्स्य-उत्पादो के निर्यात मे 14.8 प्रतिशत की औसत वार्षिक विकास दर के साथ विश्‍व में प्रथम स्‍थान पर रहा नीली क्रांति” का मकसद मछली उत्‍पादन बढ़ाना और 8 प्रतिशत की दर से सालाना उत्पादन हासिल कर 2020 तक 15 मिलियन टन का आंकड़ा छूना  देश में मात्स्यिकी और जल कृषि में हुई तेज प्रगति से मछली… Read More

पुआल के इस्तेमाल से मिलेगी धुंध से निजात

पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के अलावा पाकिस्तान के पश्चिमी पंजाब के कुछ इलाकों की पुआल आधारित खेती प्रणाली का दिल्ली के प्रदुषण  से नजदीकी नाता है| समय के साथ विकराल होती पुआल की समस्या : पहले की तुलना में अब कहीं ज्यादा पुआल पैदा हो रहा है। इस पुआल को समेट पाना पहले… Read More
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