जनसंख्या वृद्धि और शहरीकरण के कारण कोलकाता और मुंबई 2070 तक दुनिया के सबसे ज्यादा असुरक्षित महानगर बन सकते हैं. समुद्र तल के बढ़ते स्तर के कारण दुनिया के विभिन्न शहरों को खतरे के हालिया अध्ययन में इन दोनों शहरों को सबसे ज्यादा ख़तरा है.
★समुद्र तल का स्तर ग्लोबल वार्मिंग (वैश्विक तापमान में वृद्धि… Read More
दुनिया में जितना पानी उपलब्ध है उसका सिर्फ चार फीसद ही भारत के पास है। इतने में ही भारत पर अपनी आबादी जो दुनिया की आबादी का 18 फीसद है, की पानी संबंधी जरूरतों को पूरा करने का भार है, लेकिन यह भी ध्यान रहे कि करोड़ों क्यूबिक क्यूसेक पानी हर साल बहकर समुद्र में चला जाता है।
नदियों को आपस में… Read More
क्या है यह
ठोस कूड़ा एक सामान्य शब्द है जिसका इस्तेमाल उत्पादन प्रक्रिया के दौरान पैदा होने वाले अनुपयोगी सह-उत्पादों के साथ-साथ ऐसी बेकार वस्तुओं के लिए भी किया जाता है जिनकी उनके मालिकों के लिए कोई उपयोगिता नहीं है।
म्युनिसिपल सालिड वेस्ट यानी शहरी ठोस कूड़े का अर्थ ऐसी ठोस बेकार वस्तुओं से… Read More
बेतहाशा शहरीकरण और तेजी से हो रहे निर्माण के चलते सैकड़ों तालाबों का अस्तित्व मिट चुका है। तालाबों और झीलों की जगह पार्क, स्कूल, कार्यालय व मकान बनाए जा रहे हैं।
Øदिल्ली में 285 तालाब ऐसे हैं जिन पर अतिक्रमण हो चुका है।
Øविशेषज्ञ बताते हैं कि यमुना की गोद और अरावली की पहाड़ियों के आंचल में बैठी… Read More
विश्व बैंक ने चेतावनी दी है कि जल संकट के चलते देशों की आर्थिक वृद्धि प्रभावित हो सकती है, लोगों का विस्थापन बढ़ सकता है और यह भारत समेत पूरे विश्व में संघर्ष की समस्याएं खड़ी कर सकता है, जहां विभिन्न क्षेत्रों में लोग पानी की कमी से जूझ रहे हैं।
★अंतरराष्ट्रीय वित्तीय निकाय का कहना है कि जलवायु… Read More
वनाग्नि कहाँ कहाँ
वनाग्नि से उत्तराखंड के जंगल तो धधक ही रहे हैं जो अभी की headlines बने हुए है
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) और आर्यभट्ट प्रेक्षण शोध संस्थान (एरीज) के अध्ययनों से पता चलता है कि जम्मू-कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर राज्यों तक देश के उत्तरी हिस्सों के जंगल आग की चपेट… Read More
