#Business_Standard_Editorial
बदलते हुए परिप्रेक्ष्य में रेल परिवहन को बदलने की आवश्यकता
रेलवे ने हमेशा खुद को देश की आर्थिक गतिविधियों की रीढ़ बताते हुए गर्व अनुभव किया है। एक वक्त था जब रेलवे की हड़ताल एक क्षण में अर्थव्यवस्था को ध्वस्त कर सकती थी और खाद्यान्न, डीजल तथा अन्य अनिवार्य वस्तुओं की… Read More
रेल मंत्रालय के समक्ष पेश की गई सेफ्टी रिपोर्ट में कहा गया है कि रेल हादसों और ट्रेनों के पटरी से उतरने के लिए रेलवे स्टाफ की लापरवाही जिम्मेदार है।
इन हादसों में बड़े पैमाने पर लोगों की जानें गई हैं और तमाम लोग घायल हुए हैं
समिति ने पिछले रेल हादसों के डेटा जुटाए और उनका विश्लेषण किया।
हाल… Read More
एसोसिएशन फोर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की एक रिपोर्ट के मुताबिक राजनीतिक दलों को 2004-05 और 2014-15 के बीच अज्ञात स्रोतों से 7,833 करोड़ रुपए मिले जो उनकी कुल आय का 69 प्रतिशत है।
कांग्रेस और भाजपा इस तरह के स्रोतों से अधिकतम धन हासिल करने वाली राजनीतिक पार्टी हैं।
एडीआर की इस रिपोर्ट के… Read More
सन्दर्भ : भारतीय पुलिस सेवा के दो वरिष्ठ अधिकारियों को कथित तौर पर काम में कोताही बरतने के चलते बर्खास्त
किस नियम के तहत
अखिल भारतीय सेवा (मृत्यु सह सेवानिवृत्ति लाभ) नियम-1958 के तहत प्रशासनिक अधिकारियों की एक बार पंद्रह साल और दूसरी बार पच्चीस साल की सेवा पूरी होने पर उनके कामकाज की समीक्षा… Read More
# Business Standard Editorial
वर्ष 2012 के बाद से भारत में भी कारोबारी चक्र में मंदी देखने को मिली है। भारत में मंदी कम निवेश और कम कारोबारी मुनाफे के मिलेजुले रूप में नजर आती है। एक अतिरिक्त विशेषता जिसने अर्थव्यवस्था पर इस बार नकारात्मक असर डाला है वह है बैलेंस शीट का संकट। मोटेतौर पर देखा जाए… Read More
#Editorial of business standard
कैशलेस के लिए अबाध संयोजकता यानी कनेक्टिविटी की आवश्यकता है जो हमारे पास नहीं है। बिना उसके इस लक्ष्य को हासिल नहीं किया जा सकता। कनेक्टिविटी सुविधा के लिए प्रभावी और किफायती संचार संपर्क की आवश्यकता है वह भी उचित दरों पर। इसके लिए ऐसे लक्ष्य तय करने होंगे जो हकीकत… Read More
क्यों खबरों में
सुप्रीम कोर्ट ने ‘इंडियन ज्यूडिशियरी एनुअल रिपोर्ट 2015-16’ और ‘सब-ऑर्डिनेट कोर्ट्स ऑफ इंडिया : ए रिपोर्ट ऑन एक्सेस टू जस्टिस 2016’ शीर्षक से दो रिपोर्ट जारी की हैं। इसमें अदालतों में लंबित मुकदमों की भयावह तस्वीर सामने आई है।
नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, विभिन्न जिला अदालतों में… Read More
सुप्रीम कोर्ट ने इस पर उचित ही नाराजगी जताई कि आखिर गैर सरकारी संगठनों एवं समितियों के कोष और उनके उपयोग की निगरानी के लिए कोई नियामक व्यवस्था क्यों नहीं है?
किस्म-किस्म के गैर सरकारी संगठन और समितियां कहां से कितना धन हासिल करती हैं और उसे किस तरह खर्च करती हैं, यह सब सुनिश्चित करने वाली… Read More
