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कुछ समय से मोबाइल पर बात करते हुए बीच में फोन कट जाने की समस्या बढ़ती जा रही है। लेकिन मोबाइल कंपनियों की ओर से अब तक सिर्फ तकनीकी खराबी या कमी बता कर इस पर परदा डालने की कोशिश की जाती रही है।
कम्पनियों के पास नया हथियार अपनी जिम्मेदारी से बचने का
अब तक बीच में अचानक फोन कट जाने को… Read More
नेशनल एलिजिबिलिटी कम एन्ट्रेंस टेस्ट (एनईईटी) को लेकर विवाद जारी है. 29 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि देशभर के मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिले एक कॉमन एन्ट्रेंस टेस्ट के जरिये किए जाएंगे. पहले दौर का टेस्ट 1 मई को हो चुका है जबकि दूसरे दौर का टेस्ट 24 जुलाई को… Read More
देश के 10 राज्यों में भीषण सूखे के चलते अर्थव्यवस्था को करीब 6,50,000 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है।
_ एक स्टडी के मुताबिक 256 जिलों के करीब 33 करोड़ लोग सूखे से बुरी तरह प्रभावित हैं। लगातार दो साल मॉनसून खराब रहने, जलाशयों में पानी की कमी और भूजल के स्तर में लगातार जारी गिरावट के… Read More
आजकल देश में उच्च शिक्षा की कमियों को दूर कर उसमें गुणवत्ता लाने की चर्चा बड़े जोरों पर है| गुणवत्ता के सरोकार के बारे में हमारा ध्यान उनअंतरराष्ट्रीय मानदंडों की ओर ही जा रहा है जो अन्यत्र देश काल के संदर्भ में ठीक हो सकते हैं, लेकिन यह क्या यह जरूरी है की वो हर जगह ठीक हों इस पर विचार कर ही… Read More
दुनिया में जितना पानी उपलब्ध है उसका सिर्फ चार फीसद ही भारत के पास है। इतने में ही भारत पर अपनी आबादी जो दुनिया की आबादी का 18 फीसद है, की पानी संबंधी जरूरतों को पूरा करने का भार है, लेकिन यह भी ध्यान रहे कि करोड़ों क्यूबिक क्यूसेक पानी हर साल बहकर समुद्र में चला जाता है।
नदियों को आपस में… Read More
देश में औसतन हर साल 30 हजार हेक्टेयर खेती योग्य भूमि कम होने और 13 राज्यों के गंभीर सूखे की चपेट में आने के बीच पर्यावरणविदों ने सरकार से मांग की है कि सूखे की समस्या के निपटारे के लिए दीर्घाकालीन पहल करने की जरूरत है और देशभर में जलधाराओं, पुराने जलाशयों, कुओं को जीवंत बनाये जाने की जरूरत है।
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वनाग्नि कहाँ कहाँ
वनाग्नि से उत्तराखंड के जंगल तो धधक ही रहे हैं जो अभी की headlines बने हुए है
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) और आर्यभट्ट प्रेक्षण शोध संस्थान (एरीज) के अध्ययनों से पता चलता है कि जम्मू-कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर राज्यों तक देश के उत्तरी हिस्सों के जंगल आग की चपेट… Read More
मौजूदा उपभोक्ता संरक्षण कानून
मौजूदा उपभोक्ता संरक्षण कानून 1986 में लागू किया गया था।
इस कानून को लागू करते समय उपभोक्ताओं को शोषण से मुक्त करते हुए उपभोक्ता हितों की सुरक्षा करने का प्रयास किया गया।
इस कानून में उपभोक्ताओं को शीघ्र न्याय दिलाने के लिए त्रि-स्तरीय अर्धन्यायिक व्यवस्था की है… Read More
