तटो पर बसे शहरों को चक्रवातो से बचाव के उपाय

उष्ण कटिबंधीय चक्रवात अपनी उग्रता और नुकसान के लिए जाने जाते है परन्तु हाल ही में जलवायु परिवर्तन से वो और खतरनाक हो गए है जहाँ  चक्रवात की आवृत्ति की अपेक्षा उसकी तीव्रता बढी है जिससे उनके नुकसान पहुचाने की क्षमता में वृदि हुई है और यह सीधे तौर पर तटों पर बसे भारतीय शहरों को अधिक नुकसान पहुंचाता सकता है  । चक्रवात को रोक नहीं सकते, लेकिन इसके प्रभाव से बचने के लिए कुछ कदम उठाया जा सकता है जिससे जान-माल का हानि कम हो, जो निम्न है:-

वरदा से मिले सबक ऐसी आपदाओं से निपटने की हमारी तैयारी को और सुधार सकते हैं

(द एशियन एज की संपादकीय टिप्पणी)

सन्दर्भ :- जिस तरह से हमने खुद जलवायु परिवर्तन को न्योता दिया है उसे देखते हुए आज कुदरत ही हमारे लिए सबसे बड़ा संकट साबित हो सकती है.

 

एक भयानक त्रासदी चेन्नई से होकर गुजरे वरदा तूफान ने भयानक तबाही मचाई है. राहत की बात यह रही कि इससे होने वाली मौतें कम से कम (तमिलनाडु में करीब 18 लोगों की मौत हुई) रहीं. यह बताता है कि ऐसी भीषण मौसमी हलचलों से निपटने की हमारी तैयारी में कितना सुधार आया है.

हादसे की पटरी

Why rail accidents in News:

इंदौर-पटना एक्सप्रेस ट्रेन का  कानपुर देहात में रेल हादसा , भारतीय रेल किस प्रकार गंभीर है हादसों को रोकने में उस पर प्रश्न चिह्न करते है |

Looking into Causes

सुनामी क्या है और समुद्र तटीय इलाके क्यों इसकी ज़द में आते हैं?

जापान में मार्च 2011 में आए जबरदस्त भूकंप के बाद सुनामी की खौफनाक तस्वीरें अब भी लोगों के जेहन में बसी हैं. फिर एक बार फिर जापान के फुकुशिमा शहर के पास भूकंप के झटके महसूस किए गए.

इससे पहले 2004 में दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों में भी शक्तिशाली भूकंप के बाद समुद्री हलचल से भारी तबाही मची थी. आपको बताते हैं सुनामी से जुड़े कुछ तथ्य और आखिर क्यों भूकंप के बाद समुद्र तटीय इलाका इसकी चपेट में आ जाता है.

भूकंप जोखिम वाले क्षेत्रों का एटलस जारी: देश के सिर्फ साढ़े चार फीसद भवन ही भूकंपरोधी

देश के सिर्फ साढ़े चार फीसद भवन ही भूकंपरोधी हैं, बाकी भूकंप की स्थिति में जोखिमपूर्ण साबित होंगे। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने  भूकंप जोखिम वाले क्षेत्रों का एटलस जारी कर खतरे से आगाह किया। 

हाल के वर्षो में भयावह होती बाढ़

पिछले कुछ  वर्षो तक बाढ़ को ग्रामीण समस्या के रूप में ही देखा जाता था और हमेशा बाढ़ से ग्रस्त रहने वाले इलाकों के लोगों, जो मुख्यत: किसान होते थे, की मान्यता थी कि बाढ़ आती है और चली जाती है। ऐसा विरले ही होता कि कभी ढाई दिन से ज्यादा टिकी हो। लेकिन हमारे बाढ़-नियंत्रण के प्रयासों ने अब गांवों की कौन कहे, शहरी क्षेत्रों को भी अपने में समेट लिया है और ये ढाई दिन की बाढ़ ढाई हफ्तों, बल्कि कहीं-कहीं तो ढाई महीने की भी हो गई है। पानी आता है, मगर जाता नहीं है। पानी की निकासी के मुहानों का या तो दम घुट गया है या फिर वे बंद हो चुके हैं।

smart city project : सीखें गुड़गांव का सबक

बारिश ने हमारे उन शहरों की कमर तोड़ दी है, जिन पर हम इतराते फिरते हैं और जिन्हें पैरिस या शंघाई बनाने का सपना देखते हैं। पिछले तीन-चार दिनों में हुई बरसात से देश की आर्थिक राजधानी मुंबई, हाइटेक सिटी के नाम से मशहूर बेंगलुरूऔर मिलेनियम सिटी कहलाने वाले गुरुग्राम (गुड़गांव) में जनजीवन ठप हो गया। 

औद्योगिक आपदा: एनडीआरएफ ने शुरू किया राष्ट्रव्यापी अभ्यास

 रासायनिक और औद्योगिक आपदाओं से निपटने की तैयारियों का जायजा लेने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल :एनडीआरएफ: कई प्रांतों में प्रमुख औद्योगिक प्रतिष्ठानों पर अभ्यास करेगा।
- एनडीआरएफ को प्राकृतिक आपदाओं के अलावा रासायनिक, जैविक, रेडियोधर्मी और परमाणु :सीबीआरएन: हादसों की किसी भी स्थिति से निपटने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

भयानक भूकंप (Earthquake) से बर्बाद हो सकते हैं पूर्वी भारत के कई शहर!

  • वैज्ञानिकों के मुताबिक, बांग्‍लादेश के नीचे एक भयंकर भूकंप बन रहा है। एक नए शोध में यह चेतावनी दी गई है कि यह भूकंप पूर्वोत्‍तर भारत के कई शहरों को बर्बाद कर सकता है। 
  • जर्नल में छपे शोध में वैज्ञानिकों का कहना है उनके पास दुनिया के सबसे बड़े नदी डेल्‍टा के नीचे की दो टेक्‍टॉनिक प्‍लेट्स के पास बढ़ते तनाव के सबूत हैं।
  • उनका अनुमान है कि अगर तनाव की सीमा टूटती है तो इस क्षेत्र के कम से कम 140 मिलियन लोगों पर असर पड़ेगा।
  • सिर्फ कंपन के सीधे प्रभाव से विनाश नहीं होगा, बल्कि महान नदियों के रास्‍तों, समुद्र तट के करीब की जमीन में व्‍यापक दौर पर बदलाव आ जाएगा। यह न

भारत में आपदा प्रबंधन : कंपट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (कैग) की रिपोर्ट

=>​भारत में संभावनाएं ज्यादा 
- भारत, दुनिया के उन देशों में शामिल है, जहां प्राकृतिक आपदाओं का खतरा यहां की 1.2 अरब आबादी पर मंडराता रहता है। देश के कई इलाके तो इस लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं, इसके बावजूद देश का आपदा प्रबंधन बेहद खराब स्थिति में है।

- आपदा प्रबंधन पर आई कंपट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (कैग) की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक 2006 में नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (एनडीएमए) का गठन किया गया था, लेकिन इसके पास न तो उचित सूचनाएं होती हैं, न ही एक्शन कंट्रोल।