चेन्नई, अहमदाबाद और वाराणसी को स्मार्ट सिटी बनाने में सहायता करेगा जापान

  • जापान ने स्मार्ट सिटी के रूप में चेन्नई, अहमदाबाद और वाराणसी के विकास कार्यों से जुड़ने का निर्णय लिया है।  
  • अब तक कई प्रमुख देश 15 स्मार्ट शहरों के विकास से जुड़ने के लिए आगे आ चुके हैं।                                              
  • इनमें ये शामिल हैं:--                         
  • व्यापार विकास एजेंसी (यूएसटीडीए)- विशाखापत्तनम, अजमेर एवं इलाहाबाद ।
  • UK:पुणे, अमरावती (आंध्र प्रदेश) एवं इंदौर। 
  • France: चंडीगढ़, पुडुचेरी एवं नागपुर और
  • जर्मनी - भुवनेश्वर, कोयंबटूर एवं कोच

तटो पर बसे शहरों को चक्रवातो से बचाव के उपाय

उष्ण कटिबंधीय चक्रवात अपनी उग्रता और नुकसान के लिए जाने जाते है परन्तु हाल ही में जलवायु परिवर्तन से वो और खतरनाक हो गए है जहाँ  चक्रवात की आवृत्ति की अपेक्षा उसकी तीव्रता बढी है जिससे उनके नुकसान पहुचाने की क्षमता में वृदि हुई है और यह सीधे तौर पर तटों पर बसे भारतीय शहरों को अधिक नुकसान पहुंचाता सकता है  । चक्रवात को रोक नहीं सकते, लेकिन इसके प्रभाव से बचने के लिए कुछ कदम उठाया जा सकता है जिससे जान-माल का हानि कम हो, जो निम्न है:-

सभी जल विवादों के लिए एक ही न्यायाधिकरण

केंद्र ने सभी अंतरराज्यीय नदी जल विवादों को निपटने के लिए एक ही स्थायी न्यायाधिकरण गठित करने का फैसला किया है। 
★उद्देश्य:- इसका मकसद विवादों को तेजी से निपटारा करना है।
- ज्ञात हो कि इस समय विभिन्न विवादों के लिए कई अलग-अलग न्यायाधिकरण है।  
★केंद्र ने इसके साथ ही जरूरत के हिसाब से विवादों पर गौर करने के लिए कुछ पीठ स्थापित करने का प्रस्ताव किया है। 
★न्यायाधिकरण के विपरीत, यह पीठ विशेष विवाद सुलझ जाने के बाद अस्तित्व में नहीं रहेगी। इसके लिए सरकार अंतरराज्यीय जल विवाद अधिनियम 1956 में संशोधन कर करेगी। 

सुनामी क्या है और समुद्र तटीय इलाके क्यों इसकी ज़द में आते हैं?

जापान में मार्च 2011 में आए जबरदस्त भूकंप के बाद सुनामी की खौफनाक तस्वीरें अब भी लोगों के जेहन में बसी हैं. फिर एक बार फिर जापान के फुकुशिमा शहर के पास भूकंप के झटके महसूस किए गए.

इससे पहले 2004 में दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों में भी शक्तिशाली भूकंप के बाद समुद्री हलचल से भारी तबाही मची थी. आपको बताते हैं सुनामी से जुड़े कुछ तथ्य और आखिर क्यों भूकंप के बाद समुद्र तटीय इलाका इसकी चपेट में आ जाता है.

ला-नीना' की ज़द में दुनिया, इस बार सर्दियां होंगी लंबी

पिछले दो-तान सालों की रिकॉर्डतोड़ गर्मी के बाद इस साल पूरे दुनिया में सर्दी अपना असर दिखाएगी. इसकी वजह प्रशान्त महासागर में ला-नीना की हलचल है जिसके और ज्यादा फैलने की आशंका बढ़ रही है.

What is La nina

अल नीनो जिसका सम्बंध भारत में सूखे, बाढ़ और गर्मी से है और इसी के उलट ला-नीना है. प्रशान्त महासागर में बनने वाला अल नीनो और ला-नीना पूरे विश्व के तापमान को प्रभावित करता है।

मेट कोक पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी के खिलाफ देसी स्टील निर्माता

Why in News:

देसी स्टील निर्माताओं ने सरकार से कहा है कि वह मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया व चीन से आयातित मेटलर्जिकल कोक पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी न लगाए क्योंकि वाणिज्य मंत्रालय ने ऐसे आयात पर 25 डॉलर प्रति टन का शुल्क लगाने की सिफारिश की है|

Why this opposition:

 मेट कोक पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाए जाने से भारत में स्टील क्षेत्र की लागत बढ़ जाएगी। यह शुल्क लगाए जाने से तैयार स्टील की कीमत 700-1500 रुपये प्रति टन बढ़ जाएगी। मेट कोक की कीमत जनवरी 2016 के 121 डॉलर प्रति टन के मुकाबले बढ़कर अभी 285 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गई है।

चंद्रभागा नदी

  • पुराणों में वर्णित सरस्वती नदी की भारत के पश्चिमोत्तर हिस्से में मौजूदगी की पुष्टि की। इसके बाद अब भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर के वैज्ञानिकों ने एक और ‘विलुप्त’ भारतीय नदी के साक्ष्य पाने का दावा कर रहे हैं।
  • इस प्राचीन नदी का नाम चंद्रभागा है और माना जा रहा है कि 13वीं शताब्दी में बने कोणार्क के सूर्य मंदिर से दो किलोमीटर की दूरी पर इसका अस्तित्व था।
  • पौराणिक कहानियों में इस मंदिर के आसपास चंद्रभागा नदी की मौजूदगी का संकेत मिलता है। चित्रों व तस्वीरों में भी नदी को दर्शाया गया है।

देश के 91 प्रमुख जलाशयों के जलस्तर में 1 प्रतिशत की कमी

 देश  के 91 प्रमुख जलाशयों में 113.034 बीसीएम (अरब घन मीटर) जल का संग्रहण आंका गया। यह इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 72 प्रतिशत है। यह पिछले वर्ष की इसी अवधि के कुल संग्रहण का 130 प्रतिशत तथा पिछले दस वर्षों के औसत जल संग्रहण का 99 प्रतिशत है।

इन 91 जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता 157.799 बीसीएम है, जो समग्र रूप से देश की अनुमानित कुल जल संग्रहण क्षमता 253.388 बीसीएम का लगभग 62 प्रतिशत है। इन 91 जलाशयों में से 37 जलाशय ऐसे हैं जो 60 मेगावाट से अधिक की स्‍थापित क्षमता के साथ पनबिजली संबंधी लाभ देते हैं।

क्षेत्रवार संग्रहण स्‍थिति

क्विटो सम्मलेन: शहरों को समावेशी और सतत बनायें; ताकि शहर जीने के लायक रहें

आज का संपादकीय #The_Hindu_Editorial

सन्दर्भ:- यह एक बड़ी चुनौती है कि भारत सहित दुनिया भर में शहरों की आबादी जिस तरह से बढ़ रही है उस हिसाब से वहां जीवन की गुणवत्ता नहीं बढ़ रही. (द हिंदू का संपादकीय)