देश के 91 प्रमुख जलाशयों के जलस्तर में 1 प्रतिशत की कमी

 देश  के 91 प्रमुख जलाशयों में 113.034 बीसीएम (अरब घन मीटर) जल का संग्रहण आंका गया। यह इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 72 प्रतिशत है। यह पिछले वर्ष की इसी अवधि के कुल संग्रहण का 130 प्रतिशत तथा पिछले दस वर्षों के औसत जल संग्रहण का 99 प्रतिशत है।

इन 91 जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता 157.799 बीसीएम है, जो समग्र रूप से देश की अनुमानित कुल जल संग्रहण क्षमता 253.388 बीसीएम का लगभग 62 प्रतिशत है। इन 91 जलाशयों में से 37 जलाशय ऐसे हैं जो 60 मेगावाट से अधिक की स्‍थापित क्षमता के साथ पनबिजली संबंधी लाभ देते हैं।

क्षेत्रवार संग्रहण स्‍थिति

क्विटो सम्मलेन: शहरों को समावेशी और सतत बनायें; ताकि शहर जीने के लायक रहें

आज का संपादकीय #The_Hindu_Editorial

सन्दर्भ:- यह एक बड़ी चुनौती है कि भारत सहित दुनिया भर में शहरों की आबादी जिस तरह से बढ़ रही है उस हिसाब से वहां जीवन की गुणवत्ता नहीं बढ़ रही. (द हिंदू का संपादकीय)

अंतरदेशीय जल मार्ग राष्ट्रीय कनेक्टिविटी में एक ‘गेम चेंजर’ साबित होगा।

जहाँ दुनिया भर के बंदरगाहों ने नुकसान दर्ज किया है, वहीँ भारतीय बंदरगाहों ने 2.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की और लगभग 6000 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित किया है।

जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में खाद्य सुरक्षा और पोषण

सन्दर्भ :- विश्व की आबादी में वृद्धि और जलवायु परिवर्तन को देखते हुए दुनिया भर में खाद्य उत्पादकता बढ़ाने की जरूरत

2050 तक विश्व की आबादी लगभग 9.5 अरब हो जाएगी, जिसका स्पष्ट मतलब है कि हमें दो अरब अतिरिक्त लोगों के लिए 70 प्रतिशत ज्यादा खाना पैदा करना होगा। इसलिए खाद्य और कृषि प्रणाली को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनाना होगा और ज्यादा लचीला, उपजाऊ व टिकाऊ बनाने की जरूरत होगी। इसके लिए प्राकृतिक संसाधनों का उचित इस्तेमाल करना होगा और खेती के बाद होने वाले नुकसान में कमी के साथ ही फसल की कटाई, भंडारण, पैकेजिंग और ढुलाई व विपणन की प्रक्रियाओं के साथ ही जरूरी बुनियादी ढांचा सुविधाओं मे

अमेरिका को पीछे छोड़ भारत 2020 तक कोयला उत्पादन में बनेगा दूसरे नंबर का देश

कोयला उत्पादन के क्षेत्र में भारत के लिए एक अच्छी खबर है। भारत कोयला उत्पाcoal_reserveदन के मामले में जल्द ही अमेरिका को पछाड़ देगा। बाजार विश्लेषक बीएमआई की एक रिसर्च बताती है कि साल 2020 तक भारत अमेरिका को पछाड़ कोयला उत्पादन के मामले में चीन के बाद नंबर दो देश बन जाएगा।

पानी पर लगी यह आग देश को झुलसा रही है; समस्या के कारण और समाधान के सुझाव

सन्दर्भ- कावेरी जैसे विवादों के समाधान के लिए एक राष्ट्रीय जल आयोग बनना चाहिए. हिंदुस्तान टाइम्स का संपादकीय

इस्राइल ने सुझाया उपाय, जिससे सुलझ सकता है दशकों पुराना कावेरी विवाद" (माइक्रो ड्रिप इरिगेशन')

पिछले कई सालों से कर्नाटक और तमिलनाडु, कावेरी के पानी को लेकर आमने सामने है. दशकों से चला आ रहा यह विवाद तब और गंभीर हो गया जब इस साल कर्नाटक में मॉनसून में भारी कमी देखी गई. 

♂लेकिन इसके साथ ही जानकारों ने यह चिंता भी जताई है कि बारिश में लगातार कमी के बावजूद इन राज्यों में उन फसलों को उगाया जा रहा है जिसमें पानी का बहुत ज्यादा इस्तेमाल होता है.

क्या है सिंधु जल समझौता? और सिंधु जल समझौते के प्रावधान।

सिंधु नदी का इलाका करीब 11.2 लाख किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है. ये इलाका पाकिस्तान (47 प्रतिशत), भारत (39 प्रतिशत), चीन (8 प्रतिशत) और अफ़गानिस्तान (6 प्रतिशत) में है.
एक आंकड़े के मुताबिक करीब 30 करोड़ लोग सिंधु नदी के आसपास के इलाकों में रहते हैं.

=>>सिंधु जल समझौते की प्रमुख बातें :-
1. समझौते के अंतर्गत सिंधु नदी की सहायक नदियों को पूर्वी और पश्चिमी नदियों में विभाजित किया गया. सतलज, ब्यास और रावी नदियों को पूर्वी नदी बताया गया जबकि झेलम, चेनाब और सिंधु को पश्चिमी नदी बताया गया.