15 अगस्त को ही आजाद हुए पाकिस्तान का स्वतंत्रता दिवस 14 अगस्त कैसे हो गया?


प्रश्न :- इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट के मुताबिक भारत और पाकिस्तान एक ही दिन आजाद हुए थे. तो फिर पाकिस्तान अपनी आजादी का जश्न 14 अगस्त को कैसे मनाने लगा?

भारत की 3 नए स्थल यूनेस्को की विश्व धरोहर में शामिल

यूनेस्को  (UNESCO )ने इस साल भारत से जुड़े तीनों नामांकनों को अपने विश्व विरासत स्थलों मंजूरी दे दी | ये है 

नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहर विश्व धरोहर, यूनेस्को ने दी नई पहचान

 यूनेस्को ने प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के अवशेष को वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल कर लिया। 15 जुलाई को करीब दो बजे यूनेस्को ने अपनी वेबसाइट पर जब इसे शामिल किया तो विश्व के प्रथम विश्वविद्यालय नालंदा की खोई प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई मिली।

★यूनेस्को नेशंस एजुकेशनल, साइंटिफिक एंड कल्चरल ऑर्गनाइजेशन (यूनेस्को) ने महाबोधि मंदिर के बाद बिहार के दूसरे स्थल नालंदा के खंडहर को विश्व धरोहर में शामिल किया है। 
★★विश्व धरोहर में शामिल होने वाला यह भारत का 33 वां धरोहर है।

पर्यटन के लिए रामायण और कृष्ण सर्किट बनेंगे

केंद्र सरकार पर्यटन के लिहाज से भगवान राम से संबद्ध छह राज्यों में 11 तीर्थस्थलों का एक रामायण सर्किट विकसित करने जा रही है। इस प्रस्तावित सर्किट के चार जिले उत्तर प्रदेश में हैं।

केंद्र ने एक कृष्ण सर्किट बनाने का भी प्रस्ताव रखा है। यहां पर पांच राज्यों में भगवान कृष्ण से जुड़े 12 जिलों को विकसित किया जाएगा।

पर्यटन मंत्री महेश शर्मा की अध्यक्षता में रामायण और कृष्ण सर्किट की राष्ट्रीय समिति की पहली बैठक में यह दो प्रस्ताव रखे गए। थीम आधारित सर्किट से जुड़ी परियोजनाओं के लिए उत्तर प्रदेश को 300 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। सरकार ने पहले ही इस पर सैद्धांतिक सहमति दे दी है।

सिंधु घाटी की सभ्यता 5500 साल नहीं बल्कि 8000 साल से अधिक पुरानी; और कई नए खुलासे

सिंधु घाटी की सभ्यता 5500 साल नहीं बल्कि 8000 साल से अधिक पुरानी है। यह दावा आईआईटी खड़गपुर और भारतीय पुरातत्व विभाग के वैज्ञानिकों ने अपने नए शोध में किया है। इस लिहाजसे यह सभ्यता मिस्त्र और मेसोपोटामिया की सभ्यता से पहले विकसित हुई थी। इतना हीनहीं शोधकर्ताओं ने हडप्पा सभ्यता से 1000 वर्ष पूर्व की सभ्यता के प्रमाण भी खोज निकाले है।

★3000 साल पूर्व इस सभ्यता के विलुप्त होने के कारण मौसम में बदलाव था। आईआईटी खड़गपुर के जियोलॉजी और जियोफिजिक्स डिपार्टमेंट के प्रमुख अनिंदय सरकार ने कहा कि हमने सिंधु सभ्यता की प्राचीनतम पॉटरी को खोजा है।'

सिंधु घाटी सभ्यता

- सिंधु घाटी की सभ्यता 5500 साल नहीं बल्कि 8000 साल से अधिक पुरानी; और कई नए खुलासे सिंधु घाटी की सभ्यता 5500 साल नहीं बल्कि 8000 साल से अधिक पुरानी है। यह दावा आईआईटी खड़गपुर और भारतीय पुरातत्व विभाग के वैज्ञानिकों ने अपने नए शोध में किया है। इस लिहाजसे यह सभ्यता मिस्त्र और मेसोपोटामिया की सभ्यता से पहले विकसित हुई थी। इतना हीनहीं शोधकर्ताओं ने हडप्पा सभ्यता से 1000 वर्ष पूर्व की सभ्यता के प्रमाण भी खोज निकाले है।

"कनाडा के पीएम ने कोमागाटा मारू के लिए सिखों से मांगी माफी" (साथ ही जानेंगे क्या थी कामागाटा मारू घटना) Komagata Maru incident

★ कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कनाडा की संसद में कोमागाटा मारू जहाज पर सवार यात्रियों के वंशज और सिखों से माफी मांगी. ट्रूडो ने कहा कि जिस दर्द और पीड़ा से वो लोग गुजरे उसे कोई शब्द नहीं मिटा सकता.

€=>कामागाटा मारू जहाज घटना क्या थी :-
★कोमागाटा मारू कोयला ढोने वाला, भाप-इंजन से चलने वाला पानी का जहाज था. हॉन्गकॉन्ग में रहने वाले कारोबारी गुरदीत सिंह ने इसे यात्री जहाज में बदलवाया था. उस समय भारत और हॉन्गकॉन्ग दोनों ब्रितानी शासन के अधीन थे.

हरियाणा के भिवानी जिले में पुरानी हड़प्पाकालीन सभ्यता अवशेष

  • हरियाणा के भिवानी जिले के गांव तिगड़ाना में पांच हजार साल पुरानी हड़प्पाकालीन सभ्यता के महत्वपूर्ण अवशेष मिले हैं
  • खोदाई से पता चला है कि हड़प्पाकाल के दौरान तिगड़ाना महत्वपूर्ण औद्योगिक और व्यावसायिक केंद्र था।
  • यहां से गुजरात व अफगानिस्तान तक व्यवसाय होता था।
  • खोदाई में मिले अवशेष से पता चला है कि अरावली पर्वत श्रृंखला उस समय भी मौजूद थी। इस पर्वत श्रृंखला में पत्थर व तांबे से आभूषण बनाए जाते थे
  • खोदाई के दौरान चूल्हे व हारा (बड़ा चूल्हा)

कनाडा द्वारा कामागाटा मारू (Komagata Maru) के लिए माफी की माफी की पेशकश

भारत के 352 प्रवासियों को वापस भेजने के लिए कनाडा 102 साल बाद भारत से माफी मांगने जा रहा है
कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन टड्रो बैसाखी के मौके पर घोषणा की है कि 18 मई को वह कामागाटामारू घटना के लिए माफी मांगेंगे।
क्या है कामागाटामारू घटना
 जापानी भापजहाज कोमागाटामारू में 376 भारतीय प्रवासी 23 मई 1914 को वेंकूवर पहुंचे थे।
 कामागाटामारू के यात्री कनाडा आने वाले दूसरे लाखों प्रवासियों की तरह बेहतर जीवन की चाह लेकर यहां पहुंचे थे। लेकिन भेतभावकारी नीति के चलते कनाडा ने उन्हें यहां से लौटा दिया।