हाइपरलूप तकनीक भारत में ; चेन्‍नई से बेंगलुरू के बीच शुरू होगी

Ø  चेन्‍नई से बेंगलुरू की सड़क मार्ग से दूरी 345 किलोमीटर है। अगर आप बस से इस मार्ग पर सफर करेंगे तो आपको कम से कम 6 घंटे 30 का मिनट का समय लगेगा। वहीं ट्रेन से यह समय 6 घंटे है। अगर आप हवाई जहाज से यह सफर करेंगे तो 50 मिनट का समय लगेगा

Ø  लेकिन एक नई परिवहन प्रणाली से यह समय घटकर केवल 30 मिनट रह जाएगा।

Ø  अमेरिकी आंत्रप्रन्‍योर तथा आविष्‍कारक एलन मस्‍क ने हाइपरलूप नाम की परिवहन प्रणाली का ईजाद किया है। इसकी स्‍पीड 1200 किलोमीटर प्रतिघंटा है तथा यह कॉन्‍क्रीट के पिलर्स पर बनाई गई ट्यूब्‍स के अंदर चलने वाला खास वाहन है।

मार्च तक सभी एनजीओ का करें ऑडिट : सुप्रीम कोर्ट

किस लिए यह मत

देशभर के करीब तीस लाख गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) के हिसाब-किताब का लेखा-जोखा न होने और एनजीओ को नियमित करने का कोई तंत्र न होने पर

और क्या कहा न्यायालय ने

Ø  कोर्ट ने 31 मार्च तक सभी एनजीओ का ऑडिट कर कोर्ट में रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

Ø   कोर्ट ने सरकार से कहा है कि वह एनजीओ को नियमित करने, उन्हें मान्यता देने और उनकी फंडिंग के बारे में दिशानिर्देश तय करे।

खेल प्रशासन सुधार की जरूरत

# Business standard Editorial

हाल की घटना

हाल के दिनों में देश के खेल जगत से जुड़ी दो घटनाओं ने देश के तेजी से विकसित होते खेल उद्योग के नियमन के लिए कानून की आवश्यकता पर बल दिया है।

शिक्षा नीति में क्या नए बदलाव

खबरों में क्यों

केंद्र सरकार के अधीन केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई के कुछ हालिया फैसले जिसमे कहा गया है की  2016 समाप्त होते-होते इस बोर्ड ने फैसला किया कि वर्ष 2018 में दसवीं की बोर्ड परीक्षा फिर आरंभ होगी।

अर्थव्यवस्था पर 2017 में नोटबंदी के क्या हो सकते है असर

विमुद्रीकरण अर्थात नोटबंदी अपने आप में एक बड़ा झटका था।अब रोचक प्रश्न यह है कि सुधार की गति क्या होगी तेज या धीमी? हालांकि संभावना तो धीमे सुधार की ही है|

उच्चतम न्यायालय ने मांगी देनदारों की सूची

बैंकों के फंसे कर्ज (एनपीए) की वसूली पर सुप्रीम कोर्ट सख्त है। कोर्ट ने कर्ज वसूली टिब्यूनल (डीआरटी) में ढांचागत संसाधनों की कमी पर सरकार से सवाल किए हैं। अदालत ने पूछा है कि क्या मौजूदा संसाधनों में तय समयसीमा के भीतर कर्ज वसूली का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

राजनीति में धर्म के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी कुछ सवाल बचते हैं

            द इकनॉमिक टाइम्स की संपादकीय 

- आदर्श रूप में देखा जाए तो राजनेताओं को धर्म या जाति के नाम पर वोट नहीं मांगने चाहिए. लेकिन सर्वोच्च न्यायालय का आदेश इस आदर्श से आगे जाता है. इसमें अदालत ने कहा है कि धर्म जाति या समुदाय के आधार पर वोट देने की कोई भी अपील चुनाव को भ्रष्ट करने जैसी है.

मध्यस्थता को अधिक प्रभावी बनाने के उपाय सुझाने के लिए श्रीकृष्णा समिति गठित

किसलिए

  • भारत को अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता का केंद्र बनाने और वैकल्पिक विवाद निस्तारण प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए
  • मध्यस्थता को अधिक प्रभावी बनाने के उपाय सुझाने के लिए

विस्तार से

  • समिति की अध्यक्षता उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश बी एन श्रीकृष्णा करेंगे।
  • यह समिति 90 दिन में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

समिति को गठित करने के कारण