केंद्र सरकार का नया नियम, यौन शोषण की शिकार महिला कर्मचारी को मिलेगी 90 दिन की पेड लीव

◆ डीओपीटी ने इस संबंध में हाल में सेवा नियमावली में बदलाव किया है, केंद्र सरकार के अंतर्गत काम करने वाली महिला कर्मचारियों के लिए नया नियम लाया गया है।

◆इसके तहत अगर महिला कर्मचारी कार्यस्थल पर यौन शोषण की शिकायत दर्ज कराती है तो पीड़ित महिला कर्मचारी को 90 दिन की वैतनिक अवकाश (पेड लीव) मिल सकता है।

◆कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने इस संबंध में हाल में सेवा नियमावली में बदलाव किया है। हालांकि यह विशेष अवकाश तभी तक जारी रहेगी जब तक मामले की जांच की जा रही है।

संसद में पुरुषों की बराबरी करने में महिलाओं को 50 साल इंतजार करना होगा : रिपोर्ट

  • भारतीय संसद में पुरुषों की संख्या की बराबरी करने में महिलाओं को अगले 50 साल तक इंतजार करना होगा. 
  • अंतर-संसदीय संघ और संयुक्त राष्ट्र (यूएन) वूमेन द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट  में महिला सांसदों की संख्या के लिहाज से दुनिया में भारत का स्थान 148वां है.
  • फिलहाल संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में महिला सांसदों की संख्या केवल 27 यानी 11 फीसदी है.

एशिया में संसद में महिलाओं की भागीदारी 0.5% बढ़ी, सिर्फ भारत ही इसमें पीछे: UN Women रिपोर्ट

 एशिया में पार्लियामेंट में महिलाओं का रिप्रेजेंटटेशन सिर्फ 0.5%बढ़ा है,लेकिन भारत अकेला ऐसा देश है जो 2016 में इस मामले में पिछड़ गया। एक ग्लोबल इंटर-पार्लियामेंट्री इंस्टीट्यूशन की रिपोर्ट में यह कहा गया है। 8 मार्च को इंटरनेशनल वुमंस डे है।

स्ट्रॉन्ग पॉलिटिकल कमिटमेंट की जरूरत...

आसान नहीं है विवाह में सादगी का आदर्श अपनाना

सांसद रंजीता रंजन ने शादी में फिजूलखर्ची रोकने के लिए जो निजी सदस्य विधेयक तैयार किया है उसकी भावना का स्वागत किया जाना चाहिए लेकिन, उस चुनौती को नज़रंदाज नहीं किया जाना चाहिए जो दहेज विरोधी तमाम कानूनों को ठीक से लागू किए जाने के बारे में भारतीय समाज के सामने लंबे समय से उपस्थित है। हालांकि, शादी में होने वाली फिजूलखर्ची को दहेज से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए। दहेज में दबाव और मांग का तत्व होता है और फिजूलखर्ची में सब कुछ मनमर्जी से किया जाता है।

महिलाओं के खिलाफ अपराध का बढ़ता स्तर : NCRB

देश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ. दिल्ली में तो स्थिति और बदतर ही हुई है| राष्ट्रीय क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने साल 2015 में राज्यवार महिलाओं के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों से संबंधित आंकड़े जारी किए हैं. देश के अलग-अलग राज्यों में महिलाएं कितनी असुरक्षित हैं, यह बताने के साथ-साथ ये आंकड़े कई गम्भीर सवाल भी पैदा करते हैं. इन आंकड़ों का अध्ययन करने पर स्थापित धारणा के उलट यह बात सामने आती है कि सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक दृष्टि से विकसित दिल्ली और चंडीगढ़ जैसे शहर महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में भी अव्वल हैं|

निर्भया कांड के चार साल बाद भी हमने नहीं सीखे अहम सबक

निर्भया मामले के चार साल बाद भी अगर हालात लगभग जस के तस हैं तो इसकी वजह यह है कि उससे सबक नहीं सीखे गए. (द इंडियन एक्सप्रेस का संपादकीय)

स्वयं सहायता समूह महिलाओं के सशक्तिकरण का माध्यम

स्वयं सहायता समूह महिलाओं के सशक्तिकरण का माध्यम बन गए हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्र में यह महिलाओं को सशक्त और आर्थिक रूप से सृमद्ध बनाने के लिए एक कारगार माध्यम है।

What is self help group (क्या  है स्वयं सहायता समूह ):

भारत में हर घंटे 26 महिलाओं के खिलाफ अपराध

माना जाता है कि बदलते वक्त के साथ सोच भी बदल जाती है। लेकिन महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में हमारे समाज की सोच बदली नहीं है, बल्कि ये और भी खराब हो गई है। 

पर क्या हिया हकीकत आंकड़ो के हिसाब से 

सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार पीड़िता को दी गर्भपात की इजाजत (मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ़ प्रेगनेंसी एक्ट 1971 में बदलाव)

 सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए महाराष्ट्र की एक बलात्कार पीड़ित महिला को गर्भपात की इजाजत दे दी. कोर्ट ने एमटीपी एक्ट की धारा 5 के तहत महिला को यह इजाजत दी. बताया जा रहा है कि महिला के गर्भ में पलने वाला यह भ्रूण 24 हफ्ते का है.

=>परिस्थितिजन्य होगा गर्भपात का फैसला :- 

★ कोर्ट ने यह फैसला केईएम मेडिकल कॉलेज की सात सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट के मद्देनजर लिया है. समिति ने कोर्ट के सामने अपनी रिपोर्ट पेश करते हुए कहा था कि गर्भपात से पीड़ित महिला की जान कोई खतरा नहीं है.