निर्भया कांड के चार साल बाद भी हमने नहीं सीखे अहम सबक

निर्भया मामले के चार साल बाद भी अगर हालात लगभग जस के तस हैं तो इसकी वजह यह है कि उससे सबक नहीं सीखे गए. (द इंडियन एक्सप्रेस का संपादकीय)

स्वयं सहायता समूह महिलाओं के सशक्तिकरण का माध्यम

स्वयं सहायता समूह महिलाओं के सशक्तिकरण का माध्यम बन गए हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्र में यह महिलाओं को सशक्त और आर्थिक रूप से सृमद्ध बनाने के लिए एक कारगार माध्यम है।

What is self help group (क्या  है स्वयं सहायता समूह ):

भारत में हर घंटे 26 महिलाओं के खिलाफ अपराध

माना जाता है कि बदलते वक्त के साथ सोच भी बदल जाती है। लेकिन महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में हमारे समाज की सोच बदली नहीं है, बल्कि ये और भी खराब हो गई है। 

पर क्या हिया हकीकत आंकड़ो के हिसाब से 

सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार पीड़िता को दी गर्भपात की इजाजत (मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ़ प्रेगनेंसी एक्ट 1971 में बदलाव)

 सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए महाराष्ट्र की एक बलात्कार पीड़ित महिला को गर्भपात की इजाजत दे दी. कोर्ट ने एमटीपी एक्ट की धारा 5 के तहत महिला को यह इजाजत दी. बताया जा रहा है कि महिला के गर्भ में पलने वाला यह भ्रूण 24 हफ्ते का है.

=>परिस्थितिजन्य होगा गर्भपात का फैसला :- 

★ कोर्ट ने यह फैसला केईएम मेडिकल कॉलेज की सात सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट के मद्देनजर लिया है. समिति ने कोर्ट के सामने अपनी रिपोर्ट पेश करते हुए कहा था कि गर्भपात से पीड़ित महिला की जान कोई खतरा नहीं है.

गर्भपात कानून के खिलाफ याचिका पर नोटिस

क्या है यह मामला : महिला को गर्भधारण किए 24 सप्ताह हो गए हैं। उसने कहा कि वह गरीब पृष्ठभूमि की है और उसका भ्रूण मस्तिष्क संबंधी जन्मजात विकृति ‘ऐनिन्सफली’ से पीड़ित है, लेकिन चिकित्सकों ने गर्भपात करने से इनकार कर दिया है, जिसको देखते हुए गर्भपात की 20 सप्ताह की सीमा के कारण महिला के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को खतरा है। 

महिला सुरक्षा : कार्यस्थल में यौन-उत्पीडन रोकथाम, निषेध और निवारण अधिनियम 2013

वर्ष 2013 से पहले कार्यस्थल में यौन उत्पीडऩ जैसी घटनाओं के लिए अलग से कोई कानून नहीं था। इस अधिनियम के आने से स्त्रियों में आशा जागी कि वे अपनी अस्मिता और सुरक्षा की रक्षा करते हुए करियर में आगे बढ सकेेंगी। इसके बावजूद इस कानून को लागू करने की दिशा में सुनिश्चित कदम नहीं उठाए जा सके।

- राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में कार्यस्थलों में स्त्रियों के सम्मान के खिलाफ होने वाली घटनाएं काफी तेजी से बढी हैं। वर्ष 2013 में लगभग ढाई सौ शिकायतें आईं तो वर्ष 2014 में इनकी संख्या दोगुनी हो गई।

"महिला सुरक्षा : बसों में पैनिक बटन, GPS लगाना होगा अनिवार्य"

बसों में महिलाओं से होने वाले छेड़छाड़ को रोकने के लिए पैनिक बटन लगाने की शुरुआत राजस्थान से कर दी गई है।

  • बस में ड्राइवर की सीट के ठीक पीछे रेड बटन दिया गया है। खतरे महसूस होने पर कोई भी महिला इसे दबा सकेगी। इससे मैसेज कंट्रोल रूम पहुंचेगा और फौरन एक्शन लिया जाएगा। अब हर नई बस में इस तरह की फैसिलिटी दी जाएगी।

=> बटन दबाने पर क्या होगा...

- लाल रंग का यह पैनिक बटन ड्राइवर की सीट के ठीक पीछे दिया गया है।

महिलाओं को 27 फीसदी कम वेतन

  • ऑनलाइन कॅरियर और रिक्रूटमेंट सॉल्यूशन प्रोवाइडर कंपनी मॉन्स्टर इंडिया की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत में यह अंतर 27 फीसदी तक है।wome
  • पुरुषों का औसत वेतन 288.68 रुपए प्रति घंटा है जबकि महिलाओं की आय 207.85 रुपए प्रति घंटा तक है। 
  • इसके मुताबिक आईटी सेक्टर में सबसे अधिक 337.3 रुपए प्रति घंटा वेतन मिलता है।
  • इस सेक्टर में स्त्री-पुरुष कर्मचारियों के वेतन में फासला 3

अशिक्षित मांओं की तुलना में शिक्षित मांओं के हैं कम बच्‍चे

  • देश में लड़कियों के शिक्षित होने का असर जनसंख्‍या में कमी के रूप में दिख रहा है। पढ़ी-लिखी महिलाएं कम बच्‍चों को जन्‍म दे रही हैं।
  •  साल 2011 की जनगणना के मुताबिक भारत में 3 करोड़ 40 लाख शादीशुदा महिलाएं हैं। एक महिला के औसतन 3.3 बच्चे हैं।  वहीं, साल 2001 की जनगणना के मुताबिक उस वक्‍त यह औसत 3.8 का था। जबकि, साल 1991 में ये संख्या औसत 4.3 था। 
  • रिपोर्ट के मुताबिक अनपढ़ और शिक्षित महिलाओं की तुलना करने पर इस आकड़े में बहुत अंतर है। जो महिलाएं अनपढ़ हैं, उनके औसतन 3.8 बच्चे हैं।
  • वहीं, शिक्षित महिलाओं के औसतन 1.

शनि शिंगणापुर मंदिर विवाद: आस्था का हक

- अहमदनगर में शनि शिंगणापुर मंदिर के गर्भगृह में परंपरा के इतर महिलाओं की पूजा-अर्चना के अधिकार पर विवाद जारी है।

** सर्वविदित है कि देश में जाति, धर्म व लिंगभेद से परे समता का अधिकार संविधान ने दिया है। महिलाओं ने देश में कई यूरोपीय देशों से पहले सामाजिक व लोकतांत्रिक अधिकार हासिल किये। 
- देश के प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति के रूप में महिलाओं की शानदार पारी का जिक्र करने की अावश्यकता नहीं है। *****जहां तक धर्म में सामाजिक न्याय की बात है तो उसका निर्धारण सदियों से चली आ रही धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के आधार पर निर्धारित होता है।