WHO की रिपोर्ट : भारत में 5 करोड़ लोग डिप्रेशन के मरीज़

WHO की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 5 करोड़ लोग डिप्रेशन के मरीज़ हैं। ये वो लोग हैं जो डिप्रेशन की वजह से अपना सामान्य जीवन नहीं जा पा रहे हैं। दक्षिण एशियाई देशों में सबसे ज्यादा डिप्रेशन के मरीज़ भारत में ही रहते हैं।

Ø  इसके अलावा 3 करोड़ 80 लाख लोग ऐसे हैं। जो Anxiety के शिकार हैं। Anxiety एक तरह से चिंता से जुड़ी घबराहट होती है, और कई बार ये इतनी बढ़ जाती है कि Anxiety का शिकार व्यक्ति आत्महत्या तक कर लेता है। यानी भारत में करीब 9 करोड़ लोग ऐसे हैं जो किसी ना किसी तरह की मानसिक परेशानी का सामना कर रहे हैं।

शादी बिल : क्या शादी में खर्च पर लगाम जरूरी है?

सांसद रंजीत रंजन ने शादियों में होने वाले खर्चों को नियंत्रित करने के लिए एक कानून बनाने की मांग की है। उन्होंने संसद के बजट सत्र में शादी बिल (जरूरी रजिस्ट्रेशन और फालतू खर्च रोकने) पेश किया है।

 इन दिनों शादियां अपनी धन संपत्ति को दिखाने का एक साधन बन गया है। गरीब लोगों के ऊपर शादियों में ज्यादा खर्च करने का सामाजिक दबाव है। इस पर रोक जरूरी है क्योंकि ये समाज के लिए अच्छी बात नहीं है।

सेहत पर भारी अवसाद का शिकंजा

Reference: http://www.thehindu.com/opinion/op-ed/basic-income-and-mental-health-gains/article17356686.ece

आज विश्व में अवसाद एक बहुत बड़ी समस्या का रूप लेता जा रहा है। अवसाद के चलते जिस तेजी से मनोरोगियों की तादाद में बढ़ोतरी हो रही है, उसे देखते हुए इस सदी को मनोरोगियों की सदी कहा जाने लगा है।

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में महिला आरक्षण पर जोर

अपनी एक रिपोर्ट के जरिये संयुक्त राष्ट्र ने संसद और अन्य निर्वाचित निकायों में महिला आरक्षण लागू करने की पुरजोर पैरवी की है। रिपोर्ट का शीर्षक 'लीव नो वन बिहाइंडः एक कॉल टू एक्शन फॉर जेंडर इक्वलिटी एंड वूमेंस इकोनॉमिक एंपावरमेंट' है।

क्या है इस रिपोर्ट में :

देशभर में सरकारी अस्पतालों में 10 फीसदी दवाइयों की गुणवत्ता खराब

खबर के मुताबिक दवाइयों की गुणवत्ता जांचने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय कराए गए सर्वे में देशभर में सरकारी अस्पतालों में 10 फीसदी दवाइयां घटिया किस्म की होती हैं.

मजदूर संगठन और असंगठित क्षेत्र

#Business_Standard Editorial

Trade Unions in India

इस समय देश में करीब 20,000 मजदूर संगठन ट्रेड यूनियन ऐक्ट ऑफ 1926 के अधीन पंजीकृत हैं। हालांकि इस सूची को अद्यतन किए जाने की आवश्यकता है। देश के तमाम हिस्सों में बिखरे पड़े ये छोटे मजदूर संगठन देश के पांच प्रमुख केंद्रीय मजदूर संगठनों से जुड़े हुए हैं। 

आसान नहीं है विवाह में सादगी का आदर्श अपनाना

सांसद रंजीता रंजन ने शादी में फिजूलखर्ची रोकने के लिए जो निजी सदस्य विधेयक तैयार किया है उसकी भावना का स्वागत किया जाना चाहिए लेकिन, उस चुनौती को नज़रंदाज नहीं किया जाना चाहिए जो दहेज विरोधी तमाम कानूनों को ठीक से लागू किए जाने के बारे में भारतीय समाज के सामने लंबे समय से उपस्थित है। हालांकि, शादी में होने वाली फिजूलखर्ची को दहेज से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए। दहेज में दबाव और मांग का तत्व होता है और फिजूलखर्ची में सब कुछ मनमर्जी से किया जाता है।

महिलाओं के खिलाफ अपराध का बढ़ता स्तर : NCRB

देश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ. दिल्ली में तो स्थिति और बदतर ही हुई है| राष्ट्रीय क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने साल 2015 में राज्यवार महिलाओं के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों से संबंधित आंकड़े जारी किए हैं. देश के अलग-अलग राज्यों में महिलाएं कितनी असुरक्षित हैं, यह बताने के साथ-साथ ये आंकड़े कई गम्भीर सवाल भी पैदा करते हैं. इन आंकड़ों का अध्ययन करने पर स्थापित धारणा के उलट यह बात सामने आती है कि सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक दृष्टि से विकसित दिल्ली और चंडीगढ़ जैसे शहर महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में भी अव्वल हैं|

दिल्ली : 2016 में प्रत्येक दिन दुष्कर्म के छह और छेड़छाड़ के 12 मामले दर्ज

In news:

दिल्ली में अपराध से जुड़े आंकड़े अभी भी सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं. 2016 में अपराध के कुल 2,09,519 मामले दर्ज किए गए. इनमें 73.29 फीसदी मामलों का समाधान नहीं हुआ है. 2015 में यह आंकड़ा 72.78 फीसदी था. ये बातें सोमवार को दिल्ली पुलिस द्वारा जारी की गई वार्षिक रिपोर्ट में सामने आई हैं.