विशाखा केस के 20 साल बाद महिलाएं कितनी आजाद

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उच्चतम न्यायालय ने 1997 में सुनाए अपने फैसले में कार्यस्थल पर यौन उत्पीडऩ की परिभाषा तय करने और इससे निपटने के दिशानिर्देश तय करने के साथ ही स्त्री-पुरुष समानता के लिए नया आधार तैयार किया था।

विशाखा और उसके बाद

एशिया में संसद में महिलाओं की भागीदारी 0.5% बढ़ी, सिर्फ भारत ही इसमें पीछे: UN Women रिपोर्ट

 एशिया में पार्लियामेंट में महिलाओं का रिप्रेजेंटटेशन सिर्फ 0.5%बढ़ा है,लेकिन भारत अकेला ऐसा देश है जो 2016 में इस मामले में पिछड़ गया। एक ग्लोबल इंटर-पार्लियामेंट्री इंस्टीट्यूशन की रिपोर्ट में यह कहा गया है। 8 मार्च को इंटरनेशनल वुमंस डे है।

स्ट्रॉन्ग पॉलिटिकल कमिटमेंट की जरूरत...

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे : महिलाओं के वित्तीय समावेशन में वृद्दि

- नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक भारत में महिलाओं ने वित्तीय मामलों में लंबी छलांग लगाई है।

- 53 प्रतिशत महिला आबादी के पास अब बैंक अकाउंट है। एक दशक पहले यह आंकड़ा केवल 15 प्रतिशत था।

- इस स्टडी में खुलासा हुआ कि महिलाओं के बचत खातों की संख्या, घर खरीदने और घरेलू मामलों में फैसला लेने में बढ़ोत्तरी हुई है।

- इस डाटा में यह भी सामने आया कि शादीशुदा महिलाओं के साथ हिंसा में भी कमी आई है।

- वैवाहिक जीवन में हिंसा झेल रही महिलाओं का प्रतिशत 37.2 से घटकर 28.8 प्रतिशत हो गया है।

जनसंख्या नियंत्रण : चौथे राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-4) के आंकड़े

-    चौथे राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-4) के मुताबिक राष्ट्रीय स्तर पर परिवार नियोजन के उपाय पर्याप्त रंग ला रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर यह घट कर 2.2 पर पहुंच गया है, जो कि 2.1 के लक्ष्य के बहुत करीब है

-    लेकिन बिहार में कुल प्रजनन दर (टीएफआर) राष्ट्रीय औसत से डेढ़ गुना ज्यादा है। उस पर से यह बड़ी जनसंख्या वाला राज्य है। इसलिए इसका असर राष्ट्रीय आंकड़ों पर पड़ता है। इसी दौरान उत्तर प्रदेश में टीएफआर की देश की सबसे तेज 1.1 अंक की गिरावट दर्ज की गई है।

अमेरिकी थिंक टैंक की रिपोर्ट : 2050 तक भारत में होंगे सबसे ज्यादा मुस्लिम

- दुनियाभर में मुसलमानों की आबादी सबसे ज्यादा तेज़ी से बढ़ रही है और साल 2050 तक भारत पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाला देश बन जाएगा। यह बात अमेरिका के प्यू रिसर्च सेंटर ने अपने शोध में कही है।

- प्यू रिसर्च सेंटर के अनुसार अगर इस्लाम इसी रफ्तार से बढ़ता रहा हो तो इक्कीसवीं सदी के अंत तक वो अनुयायियों की संख्या के मामले में ईसाई धर्म को पीछे छोड़ देगा। इस समय इंडोनेशिया दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश है।

WHO की रिपोर्ट : भारत में 5 करोड़ लोग डिप्रेशन के मरीज़

WHO की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 5 करोड़ लोग डिप्रेशन के मरीज़ हैं। ये वो लोग हैं जो डिप्रेशन की वजह से अपना सामान्य जीवन नहीं जा पा रहे हैं। दक्षिण एशियाई देशों में सबसे ज्यादा डिप्रेशन के मरीज़ भारत में ही रहते हैं।

Ø  इसके अलावा 3 करोड़ 80 लाख लोग ऐसे हैं। जो Anxiety के शिकार हैं। Anxiety एक तरह से चिंता से जुड़ी घबराहट होती है, और कई बार ये इतनी बढ़ जाती है कि Anxiety का शिकार व्यक्ति आत्महत्या तक कर लेता है। यानी भारत में करीब 9 करोड़ लोग ऐसे हैं जो किसी ना किसी तरह की मानसिक परेशानी का सामना कर रहे हैं।

शादी बिल : क्या शादी में खर्च पर लगाम जरूरी है?

सांसद रंजीत रंजन ने शादियों में होने वाले खर्चों को नियंत्रित करने के लिए एक कानून बनाने की मांग की है। उन्होंने संसद के बजट सत्र में शादी बिल (जरूरी रजिस्ट्रेशन और फालतू खर्च रोकने) पेश किया है।

 इन दिनों शादियां अपनी धन संपत्ति को दिखाने का एक साधन बन गया है। गरीब लोगों के ऊपर शादियों में ज्यादा खर्च करने का सामाजिक दबाव है। इस पर रोक जरूरी है क्योंकि ये समाज के लिए अच्छी बात नहीं है।

सेहत पर भारी अवसाद का शिकंजा

Reference: http://www.thehindu.com/opinion/op-ed/basic-income-and-mental-health-gains/article17356686.ece

आज विश्व में अवसाद एक बहुत बड़ी समस्या का रूप लेता जा रहा है। अवसाद के चलते जिस तेजी से मनोरोगियों की तादाद में बढ़ोतरी हो रही है, उसे देखते हुए इस सदी को मनोरोगियों की सदी कहा जाने लगा है।

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में महिला आरक्षण पर जोर

अपनी एक रिपोर्ट के जरिये संयुक्त राष्ट्र ने संसद और अन्य निर्वाचित निकायों में महिला आरक्षण लागू करने की पुरजोर पैरवी की है। रिपोर्ट का शीर्षक 'लीव नो वन बिहाइंडः एक कॉल टू एक्शन फॉर जेंडर इक्वलिटी एंड वूमेंस इकोनॉमिक एंपावरमेंट' है।

क्या है इस रिपोर्ट में :

देशभर में सरकारी अस्पतालों में 10 फीसदी दवाइयों की गुणवत्ता खराब

खबर के मुताबिक दवाइयों की गुणवत्ता जांचने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय कराए गए सर्वे में देशभर में सरकारी अस्पतालों में 10 फीसदी दवाइयां घटिया किस्म की होती हैं.