Case Study : गर्ल ट्रैफिकिंग की 135 कोशिश नाकाम कर बच्चों की मसीहा बनी अनोआरा खातून

- 11 साल की एक बच्ची ने बहुत बड़ा सपना देखा था-बाल श्रम, बाल विवाह और कन्या तस्करी मुक्त समाज का। अपने सपने को साकार करने में वह पिछले एक दशक से जुटी हुई है। उसने अब तक 50 बाल विवाह रोके हैं, कन्या तस्करी की 135 कोशिशों को नाकाम किया है और 180 बच्चों को तस्करों के चंगुल से छुड़ाकर उनके अपनों से मिलाया है। इसके अलावा 400 बच्चों का स्कूल में दाखिला कराया है। इतने सारे असाधारण कार्य अनोआरा खातून ने किए हैं, जो अब 21 साल की हो चुकी है।

नार्वे दुनिया का सबसे खुशहाल देश, दक्षिण एशिया का सबसे दुखी देश भारत

★संयुक्त राष्ट्र एजेंसी की ओर से जारी ताजा रिपोर्ट में नॉर्वे दुनिया का सबसे खुश देश घोषित किया गया है. पिछले साल डेनमार्क इस लिस्ट में पहले नंबर पर था.

★द वर्ल्ड हैप्पिनेस रिपोर्ट' के मुताबिक, किसी देश की खुशहाली जानने का पैमाना समाजिक सुरक्षा, रहन-सहन और न्याय अहम है.

★ खुशी मापने के तरीकों में आर्थिक विकास, सामाजिक सहायता, जिंदगी अपने ढंग से जीने की आजादी, औसत उम्र, उदारता और भ्रष्टाचार जैसे कई कारकों को भी ध्यान में रखा जाता है.

केंद्र सरकार का नया नियम, यौन शोषण की शिकार महिला कर्मचारी को मिलेगी 90 दिन की पेड लीव

◆ डीओपीटी ने इस संबंध में हाल में सेवा नियमावली में बदलाव किया है, केंद्र सरकार के अंतर्गत काम करने वाली महिला कर्मचारियों के लिए नया नियम लाया गया है।

◆इसके तहत अगर महिला कर्मचारी कार्यस्थल पर यौन शोषण की शिकायत दर्ज कराती है तो पीड़ित महिला कर्मचारी को 90 दिन की वैतनिक अवकाश (पेड लीव) मिल सकता है।

◆कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने इस संबंध में हाल में सेवा नियमावली में बदलाव किया है। हालांकि यह विशेष अवकाश तभी तक जारी रहेगी जब तक मामले की जांच की जा रही है।

संसद में पुरुषों की बराबरी करने में महिलाओं को 50 साल इंतजार करना होगा : रिपोर्ट

  • भारतीय संसद में पुरुषों की संख्या की बराबरी करने में महिलाओं को अगले 50 साल तक इंतजार करना होगा. 
  • अंतर-संसदीय संघ और संयुक्त राष्ट्र (यूएन) वूमेन द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट  में महिला सांसदों की संख्या के लिहाज से दुनिया में भारत का स्थान 148वां है.
  • फिलहाल संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में महिला सांसदों की संख्या केवल 27 यानी 11 फीसदी है.

'नेशनल हेल्थ पॉलिसी' : सबका होगा फ्री इलाज, स्वास्थ्य नीति को कैबिनेट की मंजूरी"

केंद्र सरकार ने  राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति को मंजूरी दे दी है. इस नीति के जरिए देश में ‘सभी को निश्चित स्वास्थ्य सेवाएं' मुहैया कराने का प्रस्ताव है स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि एक बड़े नीतिगत बदलाव के तहत यह नीति प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) स्तर के दायरे में आने वाले सेक्टरों के फलक को बढ़ाती है और एक विस्तृत रुख का रास्ता तैयार करती है. ‘उदाहरण के तौर पर - अब तक पीएचसी सिर्फ टीकाकरण, प्रसूति-पूर्व जांच एवं अन्य के लिए होते थे.

विशाखा केस के 20 साल बाद महिलाएं कितनी आजाद

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Background:

उच्चतम न्यायालय ने 1997 में सुनाए अपने फैसले में कार्यस्थल पर यौन उत्पीडऩ की परिभाषा तय करने और इससे निपटने के दिशानिर्देश तय करने के साथ ही स्त्री-पुरुष समानता के लिए नया आधार तैयार किया था।

विशाखा और उसके बाद

एशिया में संसद में महिलाओं की भागीदारी 0.5% बढ़ी, सिर्फ भारत ही इसमें पीछे: UN Women रिपोर्ट

 एशिया में पार्लियामेंट में महिलाओं का रिप्रेजेंटटेशन सिर्फ 0.5%बढ़ा है,लेकिन भारत अकेला ऐसा देश है जो 2016 में इस मामले में पिछड़ गया। एक ग्लोबल इंटर-पार्लियामेंट्री इंस्टीट्यूशन की रिपोर्ट में यह कहा गया है। 8 मार्च को इंटरनेशनल वुमंस डे है।

स्ट्रॉन्ग पॉलिटिकल कमिटमेंट की जरूरत...

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे : महिलाओं के वित्तीय समावेशन में वृद्दि

- नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के मुताबिक भारत में महिलाओं ने वित्तीय मामलों में लंबी छलांग लगाई है।

- 53 प्रतिशत महिला आबादी के पास अब बैंक अकाउंट है। एक दशक पहले यह आंकड़ा केवल 15 प्रतिशत था।

- इस स्टडी में खुलासा हुआ कि महिलाओं के बचत खातों की संख्या, घर खरीदने और घरेलू मामलों में फैसला लेने में बढ़ोत्तरी हुई है।

- इस डाटा में यह भी सामने आया कि शादीशुदा महिलाओं के साथ हिंसा में भी कमी आई है।

- वैवाहिक जीवन में हिंसा झेल रही महिलाओं का प्रतिशत 37.2 से घटकर 28.8 प्रतिशत हो गया है।

जनसंख्या नियंत्रण : चौथे राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-4) के आंकड़े

-    चौथे राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-4) के मुताबिक राष्ट्रीय स्तर पर परिवार नियोजन के उपाय पर्याप्त रंग ला रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर यह घट कर 2.2 पर पहुंच गया है, जो कि 2.1 के लक्ष्य के बहुत करीब है

-    लेकिन बिहार में कुल प्रजनन दर (टीएफआर) राष्ट्रीय औसत से डेढ़ गुना ज्यादा है। उस पर से यह बड़ी जनसंख्या वाला राज्य है। इसलिए इसका असर राष्ट्रीय आंकड़ों पर पड़ता है। इसी दौरान उत्तर प्रदेश में टीएफआर की देश की सबसे तेज 1.1 अंक की गिरावट दर्ज की गई है।