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शादी बिल : क्या शादी में खर्च पर लगाम जरूरी है?

सांसद रंजीत रंजन ने शादियों में होने वाले खर्चों को नियंत्रित करने के लिए एक कानून बनाने की मांग की है। उन्होंने संसद के बजट सत्र में शादी बिल (जरूरी रजिस्ट्रेशन और फालतू खर्च रोकने) पेश किया है।

 इन दिनों शादियां अपनी धन संपत्ति को दिखाने का एक साधन बन गया है। गरीब लोगों के ऊपर शादियों में ज्यादा खर्च करने का सामाजिक दबाव है। इस पर रोक जरूरी है क्योंकि ये समाज के लिए अच्छी बात नहीं है।

प्रदूषण ने लील ली 48 हजार से अधिक जिंदगी

हाल ही में एन्वायरमेंटल साइंस एंड पॉल्यूशन रिसर्च जरनल में आइआइटी मुंबई की एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक वायु प्रदूषण से स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव तो पड़ ही रहा है, मृत्यु दर में भी तेजी से वृद्धि हो रही है। यह रिपोर्ट बताती है कि:

सेहत पर भारी अवसाद का शिकंजा

Reference: http://www.thehindu.com/opinion/op-ed/basic-income-and-mental-health-gains/article17356686.ece

आज विश्व में अवसाद एक बहुत बड़ी समस्या का रूप लेता जा रहा है। अवसाद के चलते जिस तेजी से मनोरोगियों की तादाद में बढ़ोतरी हो रही है, उसे देखते हुए इस सदी को मनोरोगियों की सदी कहा जाने लगा है।

GST : तीन सदस्यीय होगा जीएसटी अपीलीय ट्रिब्यूनल

संरचना :

  • वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संबंधी विवादों के निपटारे के लिए तीन सदस्यीय जीएसटी अपीलीय ट्रिब्यूनल बनेगा। सरकार केंद्रीय जीएसटी कानून के तहत जीएसटी ट्रिब्यूनल का गठन करेगी।
  • इसकी तर्ज पर राज्यों में भी इसी प्रकार के ट्रिब्यूनल बनेंगे।

अध्यक्ष :- जीएसटी ट्रिब्यूनल की राष्ट्रीय पीठ का अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के किसी न्यायाधीश या किसी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को ही बनाया जा सकेगा।

कृषि क्षेत्र दहाई के आंकड़े में वृद्धि की ओर

सरकार का कृषि क्षेत्र पर नए सिरे से बल देना , गरीबी को पूरी तरह से समाप्त करने और देश की विकास गाथा में ग्रामीण गरीबों को अभिन्न अंग बनाने की सोची समझी कार्यनीति है। दरअसल इस प्रकार के व्यय से जमीनी हकीकत में कोई बदलाव नहीं आया और यह अस्थायी राहत साबित हुआ। लेकिन अनुभव के आधार पर सरकार ने लोगों को एक व्यवहार्य कैरियर विकल्प के रूप में कृषि को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने के वास्ते स्थायी ग्रामीण बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए योजनाएं शुरू की है।                                                 

नकली नोटों से निपटने की दोहरी चुनौती

  • पांच सौ और 2000 रुपये के नए नोट प्रचलन में लाने के समय सरकार ने दावा किया था कि इससे नकली नोटों के कारोबारियों पर पुख्ता तरीके से लगाम लगेगी लेकिन पिछले दो महीने के अनुभव कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं।
  • पिछले एक महीने के भीतर ही दिल्ली, मुंबई, माल्दा, जालंधर पटना से लेकर तेलंगाना तक में दर्जन भर नकली नोटों के मामले सामने आए हैं। इनमें अधिकांश दो हजार के नोटों से संबंधित हैं।
  • इस काम में एक तरफ पाक की खुफिया एजेंसी आईएसआई जहां बहुत ही जोरशोर से लगी है तो देश के भीतर भी नकली नोट के नक्काल नए सिरे से सक्रिय हो गए हैं।
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