कोयला जलाने से वायु प्रदूषण होता है जो जलवायु और मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। लेकिन बची हुई राख भी भारी नुकसानदायक हो सकती है। ड्यूक एनर्जी ने लंबे समय तक कैरोलिनास के 36 बड़े तालाबों में कोयले की राख के तरल रूप को जमा किया। लेकिन जब भारी बारिश ने इस 2.7 करोड़ गैलन राख के तालाब को स्थानीय… Read More
खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) ने अपनी महत्वाकांक्षी रणनीति के समर्थन के लिए एक्शन प्लान जारी किया है। गौरतलब है कि इस कार्यनीति को 2022 से 2031 के बीच कृषि क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों से जारी किया गया था। यह रणनीति ऐसी टिकाऊ, समावेशी और लचीली कृषि खाद्य प्रणालियों की कल्पना करती है… Read More
भारत में अपशिष्ट प्रबंधन नियम "सतत विकास", "सावधानी" और "प्रदूषक भुगतान" के सिद्धांतों पर आधारित हैं। ये सिद्धांत नगर पालिकाओं और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को पर्यावरणीय रूप से जवाबदेह और जिम्मेदार तरीके से कार्य करने के लिए बाध्य करते हैं - यदि उनके कार्यों से संतुलन बिगड़ता है तो संतुलन बहाल करना… Read More
खराब और बेतरतीब नियोजन केवल समस्याओं को ही जन्म नहीं देता बल्कि वह शहरी जीवन को कष्टकारी भी बनाता है। इसके अतिरिक्त वह शहरों की प्रगति में भी बाधक बनता है। जब यह स्पष्ट है कि आने वाले समय में शहरों में आबादी का बोझ और बढ़ेगा तब फिर उनका नियोजन इस तरह किया जाना चाहिए ताकि उनमें नागरिक सुविधाओं का… Read More
जलवायु परिवर्तन के इस दौर में अब चरम और अनियमित मौसमी घटनाओं के बारे में कोई बहाना नहीं बनाया जा सकता है। अभूतपूर्व बारिश अब असामान्य घटना नहीं रही। लेकिन यह सिर्फ बार-बार होने वाली चरम मौसमी घटनाओं की मार नहीं है। हम जलवायु परिवर्तन को और अधिक गंभीर बनाने वाले कारकों- अनियोजित शहरीकरण, एक… Read More
वर्तमान स्थिति:
भारत में पिछले तीन साल से सर्दियों का मौसम सामान्य नहीं रहा है। इस देश में मॉनसून के बाद दूसरा सबसे अधिक नमी वाला मौसम, यानी जाड़ा असामान्य तौर पर सूखा और गर्म रहा। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, बीते साल का दिसंबर देश में अब तक का सबसे गर्म दिसंबर था। उत्तर-पश्चिम क्षेत्र… Read More
वर्तमान स्थिति:
दुनिया का कोई भी देश मजबूत विनिर्माण आधार के बगैर गरीबी कम करने या सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि को बनाए रखने में कामयाब नहीं हुआ है। वर्ष 1979-2014 के बीच विनिर्माण जीवीए (ग्रॉस वैल्यू एडेड) का योगदान भारत के कुल घरेलू उत्पाद में 16-18 फीसदी के बीच रहा, जो उसके बाद 2019 तक… Read More
मौजूदा हालात हमें भविष्य की पारिस्थितिकीय असुरक्षा की तरफ ले जा रहे हैं। जिस तरह से पहाड़ टूट रहे हैं और लगातार भू-स्खलन की घटनाएं बढ़ रही हैं, एक दिन ऐसा भी हो सकता है कि हिमालय अपना अस्तित्व खो दे। इसलिए हिमालय को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चिंतन-मंथन होना चाहिए। यह मात्र पहाड़ को बचाने के लिए… Read More
