लैंगिक समानता की दृष्टि से राजधानी में कितनी जागरूकता:
निर्भया मामले के बाद ऐसा लगा कि देश बदल जाएगा लेकिन जो जहां था वह वहीं है। राजधानी बच्चे व महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं हैं। बस परिचर्चा और चिंता होती है कि इसके लिए भी हम सब जिम्मेदार हैं। क्योंकि जब घटना होती है तब सब जाकरूक हो जाते हैं… Read More
Daily Current Affairs
राष्ट्रीय शिक्षु संवर्धन योजना (National Apprentice Promotion Scheme)
इसके तहत विभिन्न उद्योगों के बीच कार्यनीतिक साझेदारियों का भी आयोजन किया जाएगा, जो अगले तीन वर्षों के दौरान लगभग 4 लाख युवाओं को प्रशिक्षित करेगी तथा उन्हें रोजगार देगी।
यह संभावित कर्मचारियों एवं नियोक्ता के बीच की खाई… Read More
1.भारतीय कौशल संस्थान
किसलिए : युवकों को अधिक रोजगार पाने योग्य एवं स्वनिर्भर बनने के लिए उन्हें अधिकार संपन्न बनाने तथा भारत को विश्व की कौशल राजधानी बनाने के लिए
कहाँ पर : उत्तर प्रदेश के कानपुर में
किसकी साझेदारी में : सिंगापुर के इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्निकल एजुकेशन की साझेदारी में… Read More
क्या था मामला :
फैसला जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट के निर्णय के खिलाफ भारतीय स्टेट बैंक की अपील पर आया है। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि राज्य को अपने स्थायी निवासियों की अचल संपत्तियों के अधिकारों के संबंध में कानून बनाने का ‘पूर्ण संप्रभु अधिकार’ है। संसद में बनाया गया कानून अगर राज्य विधानसभा… Read More
सन्दर्भ :
संसद का हाल ही का winter session हंगामे की भेंट चढ़ गया | यह एक आम बात हो गई है जो संसद कभी 150 से 160 दिन चला करती थि वो अब घट कट 70 -80 दिन हो गई है | संसद की गरिमा बनाए रखने के लिए आवश्यक है की सेशन हंगामे की भेंट नहीं चढ़े और संसद में काम हो |
इस बार मुद्दा क्या था ?
चिर परिचित वजह… Read More
Why in news:
दिव्यांगों से जुड़े विधेयक- नि:शक्त व्यक्ति अधिकार विधेयक 2014 (राइट्स आफ पर्सन दि डिसएबिलिटी बिल- आरपीडीबी) को संसद ने सर्वसम्मति से पारित कर दिया।दिव्यांग व्यक्ति अधिकार वाला यह विधेयक पुराने दिव्यांग अधिनियम-1995 का स्थान लेगा। इस नए कानून से दिव्यांगों के मौलिक अधिकारों का संरक्षण… Read More
निर्भया मामले के चार साल बाद भी अगर हालात लगभग जस के तस हैं तो इसकी वजह यह है कि उससे सबक नहीं सीखे गए. (द इंडियन एक्सप्रेस का संपादकीय)
निर्भया को गए चार साल हो चुके हैं. उसके साथ जो हिंसा हुई थी उसे समझना तो छोड़िए, उसकी कल्पना करना भी मुश्किल है. तब देश ने वादा किया था कि वह महिलाओं को न्याय… Read More
प्रस्तावना :
शासन का हरेक अंग- विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका अपने फैसलों के संभावित नतीजों का अंदाजा लगा पाने में बुरी तरह नाकाम रहा है। इन फैसलों के जरिये जिस मकसद को हासिल करने की उम्मीद की जाती है, वे अक्सर वैधानिक रूप से अनुमानित नतीजे के रूप में पेश किए जाते हैं।
context
राष्ट्रगान… Read More
